पति को खोया, मुआवजे की आस भी टूटी: डेढ़ साल बाद आई विसरा रिपोर्ट ने बढ़ाई किसान परिवार की मुश्किलें

पति को खोया, मुआवजे की आस भी टूटी: डेढ़ साल बाद आई विसरा रिपोर्ट ने बढ़ाई किसान परिवार की मुश्किलें

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में किसान राकेश नन्थूजी बोथले की मौत के डेढ़ साल बाद आई विसरा रिपोर्ट ने उनके परिवार की मुआवजे की उम्मीद तोड़ दी है. परिवार का दावा है कि किसान की मौत खेत में सांप के काटने से हुई थी और पोस्टमार्टम में भी इसके संकेत मिले थे, लेकिन देर से आई विसरा रिपोर्ट में सांप के काटने से मौत की पुष्टि नहीं हुई. अब पत्नी पपीता बोथले दो बच्चों के साथ आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं और मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रही हैं.

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क‍िसान तक
  • चंद्रपुर (महाराष्ट्र),
  • Aug 24, 2026,
  • Updated Aug 24, 2026, 1:10 PM IST

एक तरफ पति की मौत का गम, मौत के डेढ़ साल बाद भी आंसू हैं कि रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. दूसरी तरफ परिवार चलाने की जिम्मेदारी और अब डेढ़ साल के लंबे इंतजार के बाद ऐसी विसरा रिपोर्ट, जिसने परिवार को मिलने वाली आर्थिक मदद की उम्मीद ही तोड़ दी. महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के भद्रावती तहसील में वाघेडा गांव के किसान राकेश नंथूजी बोथले की वर्ष 2024 में 13 दिसंबर को मौत हो गई थी. मृतक किसान की पत्नी पपीता राकेश बोथले और परिवार का दावा है कि उनकी मौत खेत में सांप के काटने से हुई थी. पोस्टमार्टम और पुलिस पांंचनामा में सांप के काटने का जिक्र भी किया गया था और मृतक के शरीर पर सांप के काटने के निशान भी बताए गए थे.

पोस्टमार्टम के बाद मृतक का विसरा जांच के लिए भेजा गया था. परिवार को उम्मीद थी कि जांच रिपोर्ट जल्द आएगी और उन्हें सरकारी सहायता मिल सकेगी. लेकिन डेढ़ साल बाद विसरा रिपोर्ट सामने आई तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई. रिपोर्ट में मौत सांप के काटने से नहीं होने की बात कही गई.

विसरा रिपोर्ट ने बढ़ाई परेशानी

पति की मौत के बाद पपीता को उम्मीद थी कि सांप के काटने से मौत होने पर सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता से परिवार को कुछ राहत मिलेगी. सांप के काटने से मृत्यु होने पर मिलने वाली दो लाख रुपये की सहायता से बेटी और बेटे की पढ़ाई और भविष्य को कुछ सहारा मिलने की उम्मीद थी. लेकिन यह उम्मीद डेढ़ साल तक सरकारी प्रक्रिया में अटकी रही. विसरा रिपोर्ट लेकर पपीता कृषि अधिकारी के कार्यालय गई लेकिन वहां विसरा रिपोर्ट निगेटिव होने का हवाला देकर वापस लौटा दिया गया.

ये सिर्फ एक किसान परिवार की आपबीती नहीं है. विसरा रिपोर्ट आने में दो-दो साल लग जाते हैं. ऐसे में पीड़ित किसान परिवारों को मुआवजा मिलने में सालों लग जाते है. कई परिवारों को तो सालों इंतजार के बाद भी मुआवजा नहीं मिलता पाता. 

किसान राकेश की मौत के बाद उनका परिवार पूरी तरह आर्थिक संकट में आ गया. घर में कमाने वाले एकमात्र पुरुष की मौत के बाद पत्नी पपीता राकेश बोथले के कंधों पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी आ गई. परिवार के पास करीब दो एकड़ जमीन है. इसी जमीन के सहारे और मजदूरी कर पपीता अपने 14 वर्ष के बेटे और 9 वर्ष की बेटी के साथ किसी तरह बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चला रही हैं.

परिवार के लिए यह सिर्फ एक रिपोर्ट नहीं, बल्कि उनके भविष्य पर पड़ा दूसरा बड़ा आघात है. एक तरफ पति को खोने का दर्द, दूसरी तरफ डेढ़ साल तक मुआवजे की आस में इंतजार और अब रिपोर्ट के आधार पर आर्थिक सहायता से वंचित होने का खतरा.

किसान परिवार को कैसे मिलेगी मुआवजा?

परिवार का सवाल है कि अगर पोस्टमार्टम के दौरान सांप के काटने के निशान पाए गए थे और रिपोर्ट में भी इसका जिक्र था, तो विसरा रिपोर्ट आने में डेढ़ साल क्यों लगे? और डेढ़ साल बाद आई रिपोर्ट में मौत का कारण अलग कैसे. हालाकि रिपोर्ट में मौत के कारण की पुष्टि नहीं की गई है पर सांप काटने से मौत नहीं हुई है, ये जरूर लिखा है. दरअसल विसरा की जांच करने में काफी समय लगाया जाता है. ऐसे में रिपोर्ट में मौत का असली कारण सामने नहीं आ पाता.

"स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे शेतकरी अपघात सुरक्षा सानुग्रह अनुदान योजना" के तहत किसानों की मौत सांप काटने, आसमानी बिजली गिरने, सड़क हादसा या नदी में डूबकर होने पर 2 लाख की मदद का प्रावधान है. सांप काटने के मामले में विसरा रिपोर्ट की जरूरत होती है. उसके आधार पर ही सहायता मिलती है, लेकिन विसरा रिपोर्ट आने में सालों लग जाते हैं.

चंद्रपुर जिले की बात करें तो 2022-23 में सांप काटने से 22 किसान, 2023-24 में 19 किसान और 2024 -25 में 20 किसानों की मौत हुई है. इन चार सालों में कुल 61 किसानों की मौत सांप काटने से हुई है. इस साल की जानकारी अभी नहीं मिली है. सांप काटने के बावजूद जिन्हें किसी कारणवश आर्थिक मदद नहीं मिली, इसकी जानकारी कृषि विभाग के पास भी नहीं है. इनमें राकेश नंथूजी बोथले जैसे और भी कई किसान परिवार हो सकते हैं.

बच्चों के भविष्य को लेकर किसान परिवार चिंतित

पपीता बोथले आज भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं. कमाने वाले पति को खोने के बाद दो एकड़ जमीन के सहारे परिवार चलाना उनके लिए आसान नहीं है. उन्हें उम्मीद थी कि सरकारी मदद मिलेगी तो बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में कुछ सहारा मिलेगा. लेकिन अब मुआवजे पर ही सवाल खड़ा हो गया है.

डेढ़ साल तक परिवार ने मुआवजे की उम्मीद में इंतजार किया, लेकिन रिपोर्ट ने उम्मीद ही छीन ली. अब पीड़ित परिवार प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच, विसरा रिपोर्ट की दोबारा जांच और उन्हें न्याय दिलाने की मांग कर रहा है. अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में परिवार की परेशानी को समझते हुए क्या कदम उठाता है और पपीता बोथले और उनके बच्चों को न्याय कब मिलता है.(विकास राजूरकर का इनपुट)

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