Ground Report: चीनी की कीमत बढ़ने से चाय दुकानदार घबराए, मिठाइयां भी महंगी होने की आशंका

Ground Report: चीनी की कीमत बढ़ने से चाय दुकानदार घबराए, मिठाइयां भी महंगी होने की आशंका

चीनी की कीमतों में तेजी ने चाय दुकानदारों और मिठाई कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है. एक महीने में चीनी करीब ₹12 किलो महंगी होकर ₹62 तक पहुंच गई है. महंगी चीनी के चलते चाय के दाम और मिठाइयों की कीमत बढ़ने की आशंका है.

Chai shop owners crisis sugar price hikeChai shop owners crisis sugar price hike
आशुतोष मिश्रा
  • New Delhi,
  • Aug 24, 2026,
  • Updated Aug 24, 2026, 8:25 PM IST

चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. खुदरा बाजार में चीनी के दाम पिछले एक महीने में करीब ₹12 प्रति किलोग्राम बढ़ गए हैं. करीब एक महीने पहले जो चीनी ₹48 किलो मिल रही थी, उसकी कीमत अब बढ़कर करीब ₹62 किलो तक पहुंच गई है. त्योहारी सीजन अभी शुरू भी नहीं हुआ है और उससे पहले ही बढ़ी कीमतों का असर घर के बजट पर दिखने लगा है. चीनी की बढ़ी कीमतों के बीच सरकार की सब्सिडी वाले सफल आउटलेट्स पर भी पिछले दो दिनों से चीनी उपलब्ध नहीं है. एक ग्राहक ने कहा कि ₹61 किलो की कीमत पर चीनी खरीदना अभी भी संभालने लायक है, लेकिन दुकानों की अलमारियों से चीनी के पैकेट गायब हो गए हैं.

त्योहारों से पहले बढ़ी परिवारों की चिंता

त्योहारी सीजन करीब आने के साथ लोगों को घरेलू बजट बिगड़ने की चिंता सताने लगी है. लोगों का कहना है कि चीनी जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीज के दाम बढ़ने से महंगाई का सीधा असर परिवारों के खर्च पर पड़ता है. चाय से लेकर मिठाइयों तक, चीनी की कीमत बढ़ने का असर कई जगह दिखाई दे रहा है.

चाय की दुकानों पर भी बढ़ा खर्च

चीनी महंगी होने का असर छोटे चाय दुकानदारों पर भी पड़ रहा है. दुकानदारों का कहना है कि अगर वे चाय के दाम बढ़ाते हैं तो ग्राहकों के कम होने का डर है. वहीं, कीमत नहीं बढ़ाने पर उनकी कमाई प्रभावित हो रही है. कुछ छोटे दुकानदार रोजाना 3 से 4 किलो तक चीनी का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए बढ़ी कीमत का असर उनकी लागत पर सीधे पड़ रहा है.

मिठाई की कीमतें बढ़ने का भी खतरा

महंगी चीनी का असर मिठाई कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है. छोटी मिठाई की दुकानों में रोजाना करीब 50 से 70 किलो चीनी की खपत होती है. दुकानदारों के मुताबिक, जिस चीनी को वे पहले बाजार से ₹40 से ₹45 किलो के भाव पर खरीदते थे, उसकी कीमत अब करीब ₹70 किलो तक पहुंच गई है. ऐसे में रक्षाबंधन तक मिठाइयों के दाम बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है.

सरकार ने चीनी की कमी से किया इनकार

सरकार का कहना है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है. विपक्ष का आरोप है कि एथेनॉल उत्पादन की वजह से गन्ना चीनी मिलों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच रहा है और इसका असर चीनी की कीमतों पर पड़ रहा है. सरकार ने इस दावे को खारिज किया है.

वहीं, सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. अल नीनो और फसल को हुए नुकसान जैसे कारण मौजूदा स्थिति के पीछे प्रमुख वजह हैं. सरकार ने चीनी की कमी की बात से भी इनकार किया है.

बाजार की धारणा से बढ़े दाम: ISMA

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी ISMA ने भी देश में चीनी की कमी से इनकार किया है. संगठन के मुताबिक, देश में पर्याप्त चीनी स्टॉक मौजूद है. ISMA का कहना है कि मौसम से जुड़ी वजहों से गन्ने की फसल को नुकसान हुआ है और चीनी की कमी की अफवाहों के कारण थोक खरीदारों ने समय से पहले स्टॉक करना शुरू कर दिया. संगठन के मुताबिक, इसी बाजार धारणा का असर कीमतों पर पड़ा है.

अगले सात दिनों में कीमतें घटने की उम्मीद

ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी के मुताबिक, मौजूदा स्थिति चीनी की वास्तविक कमी के बजाय बाजार की धारणा और स्टॉक करने की प्रवृत्ति से जुड़ी है. उन्होंने कहा कि चीनी की कीमतों में अगले सात दिनों में कमी आ सकती है. हालांकि, फिलहाल खुदरा बाजार में बढ़े हुए दामों से उपभोक्ताओं और कारोबारियों को राहत नहीं मिली है.

सरकार और चीनी मिलों के संगठन दोनों ही चीनी की कमी और इथेनॉल को कीमत बढ़ने का मुख्य कारण नहीं मानते हैं. इसके बावजूद चीनी के दाम में तेज बढ़ोतरी हुई है. सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन बाजार में कीमतें जल्द नीचे आएंगी या नहीं, इसे लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है.

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