कृषि विश्वविद्यालय पेपर लीक केस में प्रोफेसर समेत 6 गिरफ्तार, पुलिस ने 36 घंटे में खोली पूरी कड़ी

कृषि विश्वविद्यालय पेपर लीक केस में प्रोफेसर समेत 6 गिरफ्तार, पुलिस ने 36 घंटे में खोली पूरी कड़ी

रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बीएससी एग्रीकल्चर की एंटोमोलॉजी परीक्षा का पेपर लीक करने के मामले में पुलिस ने प्रोफेसर समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

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महेंद्र नामदेव
  • Raipur,
  • Aug 23, 2026,
  • Updated Aug 23, 2026, 2:07 PM IST

रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. पुलिस ने करीब 36 घंटे की लगातार जांच के बाद पेपर लीक के स्रोत और आरोपियों की पहचान की.

परीक्षा से दो घंटे पहले वायरल हुआ था पेपर

20 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष, द्वितीय सेमेस्टर के AGCH-221 कीटशास्त्र विषय की परीक्षा होनी थी. परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले सुबह 8:41 बजे कवर्धा कृषि महाविद्यालय के ई-मेल पर प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिली. इसके करीब 13 मिनट बाद सुबह 8:54 बजे संबंधित अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई.

छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने भी वॉट्सऐप के जरिए प्रश्नपत्र के कुछ हिस्से वायरल होने की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी थी. जांच में सोशल मीडिया के जरिए प्रश्नपत्र प्रसारित किए जाने की पुष्टि हुई. इसके बाद विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक और स्नातक परीक्षा प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. एन.आर. रंगारे की शिकायत पर तेलीबांधा थाने में मामला दर्ज किया गया.

दुर्ग से मिली पेपर लीक की अहम कड़ी

जांच के दौरान पुलिस को दुर्ग निवासी अनुज मिंज के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली. इसके बाद पुलिस टीम ने दुर्ग पहुंचकर उसे हिरासत में लिया और पूछताछ की. मामले की कड़ियां जोड़ने के लिए कबीरधाम, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और आसपास के जिलों में अलग-अलग पुलिस टीमें भेजी गईं. पूछताछ और जांच के आधार पर पुलिस ने पेपर लीक में शामिल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

प्रोफेसर ने लिफाफे में छेद कर रिकॉर्ड किया प्रश्नपत्र

पुलिस के अनुसार, भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग में वर्ष 2019 से प्रोफेसर के पद पर कार्यरत योगेश सोनकेसरिया इस मामले का मुख्य आरोपी है. पिछले करीब एक साल से वह अपने कॉलेज की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लेने का काम कर रहा था.

17 अगस्त को वह उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के लिए जोरा स्थित कृषि महाविद्यालय, रायपुर पहुंचा था. इसी दौरान उसने आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त किए. पुलिस के मुताबिक, AGCH-221 का प्रश्नपत्र वाला लिफाफा वह अपने घर ले गए थे.

पुलिस का दावा है कि घर पहुंचने के बाद सोनकेसरिया ने प्रश्नपत्र वाले लिफाफे के साथ छेड़छाड़ की. उसने सुई और नुकीले उपकरण से लिफाफे में छोटा छेद किया और मोबाइल कैमरा अंदर डालकर प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली. इसके बाद प्रश्नपत्र में मौजूद सवालों की सामग्री की नकल तैयार की गई.

11 हजार रुपये में छात्रों को बेचा प्रश्नपत्र

जांच में पुलिस को पता चला कि योगेश सोनकेसरिया ने प्रश्नपत्र की सामग्री अपने कॉलेज के छात्र अजय नायक और दो अन्य छात्रों को कुल 11 हजार रुपये में बेची थी. इसके बाद अजय नायक ने यह सामग्री त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू तक पहुंचाई. इसी नेटवर्क के जरिए प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुआ.

पुलिस ने मामले में योगेश सोनकेसरिया, अजय नायक, त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के पास से 11 हजार रुपये नकद, छह मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर, सुई, सुजा, कॉपी और फेविकोल बरामद किया गया है. पुलिस के मुताबिक, मामले में शामिल दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं और उनकी तलाश की जा रही है.

गिरफ्तार आरोपियों में छह लोग शामिल

गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी योगेश सोनकेसरिया 38 वर्ष, निवासी सिवनी, मध्यप्रदेश, अजय नायक 20 वर्ष, निवासी बलौदाबाजार, त्रिदेव पटेल 22 वर्ष, निवासी महासमुंद, नितिन पाण्डेय 22 वर्ष, निवासी बस्तर, अनुज मिंज 22 वर्ष, निवासी जशपुर और आदित्य साहू 20 वर्ष, निवासी बालोद शामिल हैं.

करीब 1,200 छात्रों की परीक्षा हुई थी प्रभावित

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा 20 अगस्त को आयोजित होनी थी. इस परीक्षा में प्रदेश के कृषि महाविद्यालयों के करीब 1,200 विद्यार्थी शामिल होने वाले थे. प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायत सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा रद्द कर दी. विश्वविद्यालय के मुताबिक, अब यह परीक्षा सितंबर के पहले हफ्ते में दोबारा आयोजित की जाएगी.

मुख्यमंत्री ने दिए थे कड़ी कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे. उन्होंने कहा था कि प्रदेश में परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने या विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी.

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