सहकारी चीनी मिल से 40 हजार किसानों को दिलाई ताकत, डॉ. कोरे को मिला पद्म श्री सम्मान

सहकारी चीनी मिल से 40 हजार किसानों को दिलाई ताकत, डॉ. कोरे को मिला पद्म श्री सम्मान

पद्म पुरस्कार 2026 में सम्मानित डॉ. प्रभाकर कोरे ने शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ-साथ कृषि और सहकारिता के क्षेत्र में भी बड़ा योगदान दिया है. किसानों के हित में शुरू की गई उनकी सहकारी चीनी मिल और ग्रामीण विकास मॉडल ने हजारों किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है.

क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jun 23, 2026,
  • Updated Jun 23, 2026, 7:47 PM IST

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित दूसरे नागरिक अलंकरण समारोह में पद्म पुरस्कार 2026 दिया. इस समारोह में कुल 65 हस्तियों को सम्मानित किया गया, जिसमें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं. इन सम्मानित व्यक्तित्वों में कर्नाटक के बेलगावी जिले से आने वाले डॉ. प्रभाकर बसप्रभु कोरे का नाम विशेष रूप से दर्ज है, जिन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में बड़ा योगदान देने के लिए पद्म श्री से नवाजा गया है.

डॉ. कोरे ने पिछले चार दशकों में कर्नाटक लिंगायत एजुकेशन (KLE) सोसायटी को 38 संस्थानों से बढ़ाकर 300 से अधिक संस्थानों का विशाल नेटवर्क बना दिया. हालांकि, उनकी पहचान केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने कृषि और सहकारिता के क्षेत्र में भी बड़ा परिवर्तन किया है.

40,000 किसानों की मदद

किसानों के सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए डॉ. कोरे ने एक सहकारी चीनी मिल की स्थापना की, जिसमें 40,000 से अधिक किसान सदस्य जुड़े हुए हैं. यह सहकारी मॉडल कर्नाटक के सफल कृषि-आधारित उद्योगों में गिना जाता है. इससे न सिर्फ किसानों की आय में वृद्धि हुई, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली.

डॉ. कोरे का मानना रहा है कि कृषि और उद्योग के बीच संतुलन बना कर ही ग्रामीण भारत को सशक्त बनाया जा सकता है. इसी सोच के साथ उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना कर किसानों को आधुनिक खेती, नई तकनीक और बेहतर उत्पादन के बारे में प्रशिक्षण दिया.

इसके अलावा, उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना पहुंचाने के लिए दो सामुदायिक रेडियो स्टेशन भी शुरू किए, जिनके माध्यम से किसानों तक मौसम, फसल प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जाती है.

स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा काम

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी उन्होंने 5,000 से अधिक बेड वाले अस्पतालों का नेटवर्क खड़ा किया है, जिसमें 1,200 बेड गरीबों के लिए नि:शुल्क आरक्षित हैं. यह सुविधाएं विशेष रूप से उत्तर कर्नाटक, महाराष्ट्र और गोवा के ग्रामीण इलाकों के लोगों को लाभ पहुंचा रही हैं. डॉ. कोरे ने तीन बार राज्यसभा सदस्य और एक बार विधान परिषद सदस्य के रूप में भी सेवा दी है. उनके समर्पण और योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार और मानद उपाधियां मिल चुकी हैं. ग्रामीण भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के संतुलित विकास का उनका मॉडल आज अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है.

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