
चिकन टिक्का , चिकन टंगड़ी, चिकन तंदूरी, चिकन फ्राई समेत और भी ना जाने चिकन से बनी कितने तरह की डिश खाई जाती हैं. यही वजह है कि ब्रायलर चिकन की बिक्री खूब होती है. पोल्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो अकेले दिल्ली की गाजीपुर मंडी से ही हर रोज करीब पांच लाख मुर्गे बिक जाते हैं. देशभर में सालाना 430 करोड़ मुर्गों से ज्यादा की बिक्री हो जाती है. लेकिन आजकल तो मानों चिकन बाजार पर आफत टूटी हुई है. चिकन की बिक्री घटकर 20 फीसद ही रह गई है.
रेट भी बीते 10 से 15 दिन में ही 30 रुपये तक कम हो गए हैं. आस्था के महीने सावन के चलते बाजार में चिकन की डिमांड कम हो जाती है. लोग पूरे महीने चिकन नहीं खाते हैं. दूसरी ओर हाल ही में बकरीद मनाई गई है तो मुस्लिमों के बीच भी चिकन की डिमांड कम है.
गाजीपुर में चिकन का कारोबार करने वाले हाजी जमील ने किसान तक को बताया कि सावन के पहले सोमवार यानि तीन जुलाई से पहले चिकन के रेट 90 से 100 रुपये किलो तक चल रहे थे. लेकिन एक जुलाई से धीरे-धीरे चिकन की डिमांड आना कम हो गई. डिमांड कम हुई तो रेट भी गिरने लगे.
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एक जुलाई को 11 सौ ग्राम के चिकन से लेकर 12 सौ ग्राम वजन तक के चिकन के रेट गाजीपुर मंडी में 85 रुपये किलो थे. अगले दिन यानि दो जुलाई को ये रेट 80 रुपये पर आ गए. तीन जुलाई को चिकन के रेट आठ रुपये और घट गए तो इस वजन का चिकन 72 रुपये किलो तक बिकने लगा.
हाजी जमील ने बताया कि सात जुलाई को गाजीपुर का चिकन बाजार सबसे कम रेट पर आ गया था. इस दिन 11 सौ ग्राम के चिकन से लेकर 12 सौ ग्राम वजन तक के चिकन के रेट 63 रुपये किलो पर आ गए थे. जबकि उससे एक दिन पहले यानि छह जुलाई को इस वजन का चिकन 70 रुपये किलो के भाव से बिका था. लेकिन क्योंकि हरियाणा और पंजाब में बारिश के चलते जगह-जगह पानी भरा हुआ है.
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वहां से माल कम आ रहा है तो इसलिए अगले ही दिन यानि आठ जुलाई को चिकन के रेट 75 रुपये किलो पर आ गए. गौरतलब रहे कि बाजार में चिकन के रेट उसके वजन के हिसाब से तय होते हैं. 11 सौ ग्राम वजन से लेकर डेढ़ किलो वजन वाले मुर्गे के रेट ज्यादा होंगे. इसके बाद मुर्गे के रेट कम होना शुरू हो जाते हैं.