
भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कृषि और उससे संबद्ध क्षेत्रों के लिए कुल 1,62,671 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जो पिछले वर्ष 1,71,437 करोड़ रुपये था. सरकार अब केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने की बजाय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक आधुनिक और तकनीक-संचालित बिजनेस मॉडल में बदलने के लिए तैयार दिखाई दे रही है. इस बार का विजन मुख्य रूप से उत्पादकता बढ़ाने, नई फसलों को अपनाने और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर टिका है. सरकार का मुख्य लक्ष्य सात महत्वपूर्ण सीढ़ियों—जिसमें भारत-विस्तार, चंदन की खेती, मत्स्य पालन, काजू-कोको कार्यक्रम, उच्च मूल्य वाली कृषि, पशुपालन और बागवानी शामिल हैं—के माध्यम से किसानों की वार्षिक आय में ठोस सुधार करना और उन्हें वैश्विक बाजार की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है.
कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार 'भारत-विस्तार' योजना पर जोर दे रही है. इसके तहत Agri Stack पोर्टल्स और ICAR भारतीय कृषि अनुसंधान परिषदके डेटा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम के साथ जोड़ा जाएगा. इसका सीधा फायदा यह होगा कि किसानों को उनके मोबाइल पर ही मौसम की सटीक जानकारी, मिट्टी की सेहत और फसलों की बीमारियों के बारे में समय रहते पता चल जाएगा. तकनीक के इस मेल से खेती न केवल आसान होगी, बल्कि नुकसान की संभावना भी कम होगी.
खेती को घाटे के सौदे से बाहर निकालने के लिए सरकार अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली खेती को बढ़ावा दे रही है. इस योजना में चंदन की खेती +को एक मुख्य स्तंभ बनाया गया है. सरकार चंदन की खेती और उसके 'पोस्ट-हार्वेस्ट प्रोसेसिंग' (कटाई के बाद के काम) पर ध्यान केंद्रित कर रही है. इससे किसानों को लंबे समय में बड़ा मुनाफा मिल सकेगा. इसके अलावा, काजू और कोको जैसे उत्पादों के लिए भी समर्पित कार्यक्रम शुरू किए गए हैं.
नीली क्रांति को रफ्तार देने के लिए सरकार ने 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास का लक्ष्य रखा है. मत्स्य पालन के क्षेत्र में न केवल मछली पकड़ने, बल्कि तटीय इलाकों में उनकी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर काम होगा. इसमें महिलाओं के नेतृत्व वाले समूहों और 'फिश एफपीओ' को स्टार्टअप्स से जोड़ा जाएगा. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और मछुआरों की आय में स्थिरता आएगी.
बागवानी के लिए एक समर्पित कार्यक्रम चलाया जाएगा है. सरकार का मुख्य फोकस पुराने और कम पैदावार वाले बागों का कायाकल्प करना है. विशेष रूप से अखरोट, बादाम और पाइन नट्स की 'हाई-डेंसिटी' यानी सघन खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे कम जमीन में अधिक पैदावार संभव हो सकेगी. साथ ही, नारियल और कोको के उत्पादन को बढ़ाने के लिए नई योजनाएं लागू की जा रही हैं, जिससे बागवानी करने वाले किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी.
पशुपालन क्षेत्र में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार लोन और सब्सिडी की योजनाएं लेकर आई है. ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पशु चिकित्सा अस्पताल, डायग्नोस्टिक लैब और ब्रीडिंग सेंटर खोलने के लिए पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी. यह काम निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ किया जाएगा. इससे पशुपालकों को अपने पशुओं के इलाज और अच्छी नस्ल के लिए दूर नहीं भागना पड़ेगा, जिससे दूध उत्पादन और डेयरी व्यवसाय में काफी सुधार होगा.
कृषि क्षेत्र को केवल खेती तक सीमित न रखकर इसे एक बिजनेस मॉडल के रूप में देखा जा रहा है. इसके लिए सरकार ट्रेनिंग प्रोग्राम्स को कर्मचारियों और किसानों की भूमिका के अनुसार तैयार कर रही है. लोन-लिंक्ड सब्सिडी के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को कृषि आधारित स्टार्टअप्स शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. लक्ष्य साफ है—गांव का युवा अब खेती को मजबूरी नहीं, बल्कि एक आधुनिक व्यवसाय के रूप में अपनाए, जिससे गांवों से शहरों की ओर पलायन रुके.
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