
देशभर में प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में किसानों की चिंता लगातार बढ़ती दिख रही है. मंडियों में एक तरफ पिछले साल के मुकाबले थोक दाम कमजोर बने हुए हैं. वहीं, दूसरी ओर भाव नए घोषित MSP- 2585 रुपये प्रति क्विंटल से भी नीचे जाने लगे हैं, जो साफ संकेत दे रहे हैं कि नई आवक आवक शुरू होते ही गेहूं के दामों पर और दबाव बनेगा, जो कहीं न कहीं सरकार के लिए एक तरह से फायदेमंद रहता है. यानी किसान निजी बाजार में भाव गिरने से एमएसपी की आस में सरकार को एमएसपी पर गेहूं बेचना ज्यादा पसंद करेंगे, जिससे सरकार को बफर स्टॉक के लिए खरीद में मदद मिलेगी.
वर्तमान में मंडियों में जो गेहूं बिक रहा है, वह रबी सीजन 2024 में उगाया गया गेहूं है. यानी रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26, जिसके लिए गेहूं का MSP 2,425 रुपये प्रति क्विंटल तय है. वहीं, रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए सरकार ने गेहूं का MSP बढ़ाकर 2,585 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है, जो मार्च के अंत या अप्रैल से आने वाली नई फसल पर लागू होगा. लेकिन चिंता की बात यह है कि जनवरी 2026 में ही कई बड़े उत्पादक राज्यों में थोक भाव इस नए MSP से नीचे या आसपास आ चुके हैं.
जनवरी 2026 के थोक आंकड़े बताते हैं कि कई राज्यों में दाम इस MSP से बस थोड़ा ही ऊपर बने हुए हैं. जनवरी 2026 में राज्यवार थोक दाम देखें तो उत्तर प्रदेश में औसतन 2,537 रुपये, मध्य प्रदेश में 2,578 रुपये, राजस्थान में 2,639 रुपये और बिहार में 2,640 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास भाव दर्ज किए गए हैं. पंजाब में औसत भाव 2,560 रुपये और हरियाणा में दिसंबर के आंकड़ों के आधार पर 2,598 रुपये के आसपास रहा है. ये सभी भाव नए MSP 2,585 रुपये के बेहद करीब या उससे नीचे हैं.
वहीं, अगर सालाना स्तर पर तुलना करें तो गेहूं भाव में जनवरी 2025 के मुकाबले जनवरी 2026 में पंजाब में करीब 16 प्रतिशत, दिल्ली में 15 प्रतिशत, गुजरात और मध्य प्रदेश में 13 से 14 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज हुई है. इस बीच, रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के अनुमान से भाव को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योकि साल 2022 से ही गेहूं का एक्सपोर्ट बैन है और घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव पड़ रहा है.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इस ओर संकेत दे चुके हैं कि इस बार उत्पादन मजबूत रहने की संभावना है. ऐसे में मंडियों में आवक बढ़ने और पर कीमतें और गिर सकती है. ऐसा होने पर किसानों के पास अंत में सरकार को एमएसपी पर गेहूं बेचने से ही सहारा मिलने की उम्मीद रहेगी.