
साल 2026 की शुरुआत से करीब 12 फीसदी तक मजबूती दिखाने वाला सोयाबीन बाजार अब साल की दूसरी छमाही में दबाव में आ सकता है. फिच सॉल्यूशन्स की यूनिट बिजनेस मॉनिटर इंटरनेशनल (BMI) ने कहा है कि अमेरिका के किसान इस बार मक्का की बजाय सोयाबीन की बुवाई बढ़ाने की तैयारी में हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों की तेजी सीमित हो सकती है. BMI ने सोयाबीन के दूसरे महीने के CBOT वायदा का औसत वार्षिक अनुमान बढ़ाकर 1130 सेंट प्रति बुशल कर दिया है, जो सालाना आधार पर 7.7 फीसदी ज्यादा है.
बिजनेसलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी ने कहा है कि यह संशोधन दो बड़े कारणों से हुआ है. इसमें पहला कारण 2025 की चौथी तिमाही और 2026 की पहली तिमाही में अमेरिका-चीन के बीच उम्मीद से बेहतर व्यापार और दूसरा कारण अमेरिका-ईरान तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी है.
BMI ने कहा है कि मौजूदा तेजी टिकाऊ नहीं है. बाजार का ध्यान जैसे ही सप्लाई और उत्पादन पर जाएगा और ‘लूज फंडामेंटल्स’ यानी कमजोर मूलभूत स्थिति सामने आएगी, जो कीमतों पर दबाव बनाएगी. इस आकलन को अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की प्रॉस्पेक्टिव प्लांटिंग रिपोर्ट ने भी मजबूती दी है, जिसमें सोयाबीन का रकबा बढ़ने की पुष्टि हुई है.
USDA के अनुसार, 2026 में किसान 847 लाख एकड़ में सोयाबीन बोने का इरादा रखते हैं, जो पिछले साल से करीब 4 फीसदी ज्यादा है. 29 में से 20 राज्यों में सोयाबीन का रकबा या तो बढ़ेगा या स्थिर रहेगा. इससे आने वाले सीजन में उत्पादन बढ़ने की संभावना और मजबूत हो गई है.
वहीं, इंटरनेशनल ग्रेन्स काउंसिल (International Grains Council) ने कहा है कि 2026-27 सीजन में वैश्विक सोयाबीन उत्पादन बढ़कर 4423 लाख टन तक पहुंच सकता है, जबकि 2025-26 में यह 4259 लाख टन रहने का अनुमान है. इसी तरह कुल उपलब्धता भी बढ़कर 5204 लाख टन हो सकती है, जो पिछले साल के 5077 लाख टन से ज्यादा है.
BMI के मुताबिक, वैश्विक बाजार पर दबाव का एक बड़ा कारण ब्राजील की फसल भी होगी. दुनिया के प्रमुख निर्यातक देशों में शामिल ब्राजील में लगातार दूसरी बार रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद है. इसके साथ ही वहां से बढ़ती भौतिक सप्लाई निकट अवधि में कीमतों को सीमित रख सकती है.
BMI के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में सोयाबीन का औसत भाव 1155 सेंट प्रति बुशल रह सकता है. इसके बाद तीसरी तिमाही में यह घटकर 1130 सेंट और चौथी तिमाही में 1105 सेंट तक आ सकता है. एजेंसी का कहना है कि दूसरी तिमाही में कच्चे तेल के समर्थन और संभावित अमेरिका-चीन बैठक से बाजार को सहारा मिलेगा, लेकिन साल के दूसरे हिस्से में नई फसल और बढ़ती सप्लाई का असर दिखेगा.
हालांकि, अमेरिका और चीन के बीच समझौते के तहत चीन को फरवरी तक 120 लाख टन सोयाबीन खरीदना है और इसके बाद हर साल 250 लाख टन की खरीद का लक्ष्य है, लेकिन वास्तविक निर्यात आंकड़े अभी कमजोर हैं. अमेरिकी शिपमेंट करीब 85 लाख टन है, जो एक साल पहले 200 लाख टन से ज्यादा था.
BMI के अनुसार, अगर चीन की मांग उम्मीद के अनुसार नहीं बढ़ी तो बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है. वहीं, वैश्विक खपत 423 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है, जो सालाना आधार पर 2.7 फीसदी अधिक है. इसके बावजूद करीब 41 लाख टन का उत्पादन अधिशेष (सरप्लस) रहने की संभावना है, जो कीमतों को नियंत्रित रख सकता है.
BMI का कहना है कि अगर अमेरिका-चीन के बीच औपचारिक और बड़े स्तर का समझौता होता है या चीन की खरीद तेज होती है तो कीमतों में फिर उछाल आ सकता है. वहीं, अमेरिका-ईरान तनाव लंबा खिंचने पर उर्वरक सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे मक्का और गेहूं पर असर पड़ेगा. हालांकि, सोयाबीन पर इसका सीधा असर सीमित रहेगा, लेकिन मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं अब भी बड़ा जोखिम बनी हुई हैं.