
महाराष्ट्र में प्याज किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है, जिससे नाराज किसान अब खुलकर सड़कों पर उतर आए हैं. नासिक और छत्रपति संभाजीनगर में सोमवार को बड़ी संख्या में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया और प्याज के गिरते दामों के खिलाफ आवाज बुलंद की. किसानों का कहना है कि उन्हें अपनी लागत तक नहीं मिल रही है, ऐसे में सरकार उन्हें कम से कम 1500 रुपये प्रति क्विंटल मुआवजा दे. इस मांग को लेकर लासलगांव मंडी से लेकर समृद्धि एक्सप्रेसवे तक प्रदर्शन तेज हो गया है.
प्याज के मुद्दे पर राज्य की राजनीति भी गरमा गई है. शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं ने समृद्धि एक्सप्रेसवे जाम कर दिया. इस दौरान एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार, सांसद नीलेश लांके समेत कई नेता नासिक के लासलगांव मंडी में किसानों के समर्थन में पहुंचे. प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्याज और भाकरी खाकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया और मांग की कि सरकार 25 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज खरीदे.
केंद्र सरकार ने हाल ही में प्याज की खरीद 12.35 रुपये प्रति किलो (1235 रुपये प्रति क्विंटल) तय की है, लेकिन किसानों ने इसे साफ तौर पर खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि उत्पादन लागत ही 17 से 20 रुपये प्रति किलो है, ऐसे में यह भाव पूरी तरह घाटे का सौदा है.
किसानों के गुस्से की एक बड़ी वजह वह घटना बनी, जिसमें पैठन के एक किसान को 1,262 किलो प्याज के लिए महज 1 रुपये प्रति किलो का भाव मिला. उसे कुल सिर्फ 1,262 रुपये मिले, जिससे किसान आक्रोशित हो गए.
प्याज संकट के पीछे इस बार बंपर उत्पादन भी एक बड़ी वजह है. 2024-25 में 115–118 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ था जबकि 2025-26 में यह बढ़कर 165–170 लाख मीट्रिक टन हो गया. उत्पादन बढ़ने से बाजार में सप्लाई बढ़ गई और दाम तेजी से गिर गए.
नासिक के किसान निवृत्ति न्याहरकर बताते हैं कि उन्होंने 2.5 एकड़ में प्याज उगाने पर करीब 1 लाख रुपये खर्च किए, लेकिन उन्हें सिर्फ 60,000 रुपये ही मिल पाए. उन्होंने कहा, “खेती की लागत 20 रुपये किलो है, जबकि बाजार में 10-12 रुपये मिल रहे हैं. ऊपर से ओलावृष्टि और बारिश ने फसल की क्वालिटी भी खराब कर दी.”
प्याज निर्यात में कमी भी किसानों पर भारी पड़ रही है. पश्चिम एशिया में तनाव के कारण भी प्याज का निर्यात घटा है. तनाव की वजह से निर्यात किए जाने वाले कंटेनर का किराया 600 डॉलर से बढ़कर 6500 डॉलर पहुंच गया है. बांग्लादेश, जो 46% प्याज खरीदता था, अब सिर्फ 6% आयात कर रहा है. इससे घरेलू बाजार में प्याज की अधिकता और कीमतों में गिरावट आई है.
किसानों का आरोप है कि सरकार की निर्यात नीति और भंडारण व्यवस्था ठीक से काम नहीं कर रही है. उनका कहना है कि यदि कोल्ड स्टोरेज और निर्यात को बढ़ावा मिलता, तो नुकसान कम हो सकता था. महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अनुसार, किसान मजबूरी में 600-850 रुपये प्रति क्विंटल पर प्याज बेच रहे हैं, जबकि लागत इससे कहीं अधिक है.ॉ
किसान नेताओं ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन और तेज होगा. हालिया घटनाओं से साफ है कि महाराष्ट्र में प्याज किसानों की स्थिति गंभीर बनी हुई है. बंपर उत्पादन, कमजोर निर्यात और गिरते दामों ने किसानों को आर्थिक संकट में डाल दिया है. अब सरकार और किसानों के बीच एक रास्ता निकलना बेहद जरूरी हो गया है, वरना यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है.