Maize Price: US-ईरान सीजफायर के बाद नरम पड़े मक्‍का के दाम, आगे और गिरावट की आशंका

Maize Price: US-ईरान सीजफायर के बाद नरम पड़े मक्‍का के दाम, आगे और गिरावट की आशंका

वैश्विक रिपोर्ट्स के मुताबिक, उर्वरक सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद और बढ़ते स्टॉक के चलते मक्‍का के दाम में नरमी का रुख दिख रहा है. आगे कीमतों की दिशा उर्वरक आपूर्ति, कच्चे तेल और वैश्विक मांग-आपूर्ति संतुलन पर निर्भर करेगी.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 11, 2026,
  • Updated Apr 11, 2026, 8:08 PM IST

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉर्न की कीमतें चार हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच चुकी हैं और निकट भविष्य में इनमें और नरमी आने के संकेत मिल रहे हैं. विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका-ईरान के बीच हुए सीजफायर ने नाइट्रोजन उर्वरकों की आपूर्ति बाधित होने के बड़े खतरे को फिलहाल टाल दिया है. इससे बाजार में जो तेजी का दबाव था, वह कम हो गया है और कीमतों पर असर दिखने लगा है. बिजनेसलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्च एजेंसी फिच सॉल्‍यूशन्स की यूनिट BMI ने कहा कि सीजफायर ने कॉर्न कीमतों में शामिल जोखिम प्रीमियम को कम कर दिया है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होरमुज के जरिए उर्वरक आपूर्ति में रुकावट का खतरा घटने से बाजार की धारणा कमजोर हुई है. हालांकि एजेंसी ने यह भी साफ किया कि भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं और स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है.

वैश्विक बाजार में मिलाजुला रुख

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने कहा कि 10 मार्च के बाद वैश्विक मक्‍का निर्यात बोली में बहुत बड़ा बदलाव नहीं दिखा है, लेकिन अलग-अलग देशों में अलग ट्रेंड देखने को मिला है. अर्जेंटीना में मजबूत मांग के कारण कीमतें हल्की बढ़ीं, जबकि ब्राजील में मौसमी आपूर्ति घटने के चलते कीमतों में गिरावट आई है. इसके अलावा यूक्रेन में मांग बढ़ने से दरें ऊपर गईं, वहीं अमेरिका में रिकॉर्ड स्टॉक के कारण कीमतों पर दबाव बना है.

BMI ने 2026 के लिए कॉर्न की औसत कीमत का अनुमान बढ़ाकर 458.2 सेंट प्रति बुशल कर दिया है. एजेंसी के मुताबिक, दूसरी तिमाही में औसत 453 सेंट, तीसरी में 462 सेंट और चौथी तिमाही में 470 सेंट तक कीमतें रह सकती हैं. फिलहाल शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड (CBOT) में कॉर्न फ्यूचर्स करीब 442.69 सेंट प्रति बुशल पर कारोबार कर रहा है.

USDA की रिपोर्ट से बढ़ा दबाव

ING थिंक के अनुसार वैश्विक कॉर्न बाजार का आउटलुक अब कुछ हद तक कमजोर नजर आ रहा है. USDA की WASDE रिपोर्ट में 2025-26 के लिए अंत स्टॉक 294.8 मिलियन टन आंका गया है, जो अनुमान से ज्यादा है. उत्पादन भी बढ़कर 1.32 अरब टन रहने का अनुमान है, जिसमें भारत, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका की बेहतर पैदावार का योगदान माना जा रहा है.

इंटरनेशनल ग्रेन्स काउंसिल के मुताबिक 2026-27 में कॉर्न उत्पादन घटकर 1.30 अरब टन रह सकता है, जबकि खपत बढ़कर 1.315 अरब टन तक पहुंचने की संभावना है. महंगे उर्वरकों के कारण किसान दूसरी फसलों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है और बाजार में संतुलन बदल सकता है.

अमेरिका में रकबा घटने का असर

BMI का मानना है कि अमेरिका में कॉर्न का रकबा घटने से 2027 सीजन तक उत्पादन पर दबाव आ सकता है. एजेंसी के अनुसार उत्पादन और खपत के बीच अंतर घटकर 5.5 मिलियन टन का घाटा हो सकता है. इससे स्टॉक-टू-यूज अनुपात भी कम होकर 20.9 प्रतिशत तक आ सकता है, जो बाजार के लिए एक अहम संकेत है.

विश्लेषकों का कहना है कि सीजफायर के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होरमुज में शिपिंग सामान्य होने की गति काफी अहम रहेगी. अगर उर्वरक आपूर्ति में बाधा बनी रहती है तो कीमतों को फिर से समर्थन मिल सकता है. इसके अलावा ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें इथेनॉल के जरिए कॉर्न की मांग को सहारा देती रहेंगी.

ब्राजील पर सबसे ज्यादा जोखिम

BMI के अनुसार, उर्वरक आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा का सबसे ज्यादा असर ब्राजील पर पड़ सकता है, क्योंकि वह अपनी 85 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी करता है. साथ ही चीन द्वारा फॉस्फेट निर्यात पर अगस्त तक लगाए गए प्रतिबंध से भी वैश्विक सप्लाई पर दबाव बना रह सकता है.

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