
बाजारों में खोपरा की आवक बढ़ने के बावजूद कीमतों में मजबूती आने से नारियल तेल के व्यापारी परेशान हैं. व्यापारियों को उम्मीद थी कि ओणम के बाद कीमतें कम होंगी, खासकर फसल कटाई का मौसम शुरू होने के बाद. लेकिन कीमतें ऊंची बनी रहीं और थोक बाजार में केरल में 362 रुपये प्रति किलो और तमिलनाडु में 310 रुपये तक पहुंच गईं. खोपरा की कीमतें केरल में 222 रुपये और तमिलनाडु में 217 रुपये चल रही हैं. कीमतें बढ़ने से छोटे व्यापारी और तेल मिल मालिक चिंता में हैं क्योंकि कच्चे माल की कीमत बढ़ने से मिलें बंद होने की कगार पर हैं.
कोचीन ऑयल मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष थलथ महमूद ने कहा कि नारियल तेल की खुदरा कीमतें लगभग 390 रुपये के आसपास बनी हुई हैं, जिससे उपभोक्ता सस्ते खाने के तेल की ओर रुख कर रहे हैं. खोपरा की बढ़ती कीमत ने नारियल तेल उद्योग को प्रभावित किया है, जिससे कई छोटी मिलिंग यूनिट बंद हो गई हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु में कई ट्रेडिंग सेंटर खोपरा जमा कर रहे हैं, जिससे मार्केट में शॉर्टेज पैदा हुई है और कीमतों के इस स्तर पर बने रहने का यह भी एक कारण है.
जानकारों के मुताबिक, कीमतों में मजबूती का कारण इंडोनेशिया और श्रीलंका जैसे उत्पादक देशों में नारियल की भारी कमी है जिससे निर्यात में रुकावटें आ रही हैं. दूसरी ओर, नारियल के वैल्यू एडेड प्रोडक्ट की बढ़ती मांग से भी कीमतें तेजी से बढ़ी हैं.
जलवायु का प्रभाव और फसल की अनदेखी
सूखे, तापमान में बदलाव और कीटों ने भारत और अन्य प्रमुख उत्पादकों (फिलीपींस, इंडोनेशिया, श्रीलंका) में पैदावार कम कर दी है, जिससे पिछले कम दामों के कारण किसानों ने बागानों की अनदेखी की है. किसानों को लगता है कि नारियल की खेती में अधिक फायदा नहीं रह गया है और वे दूसरी फसलों की ओर शिफ्ट हुए हैं. इससे नारियल की सप्लाई प्रभावित हो रही है.
वैल्यू-एडेड उत्पादों की बढ़ती मांग
द हिंदू बिजनेसलाइन के अनुसार, नारियल से बनने वाले सामान (तेल, दूध, सूखा नारियल) की बढ़ती दुनिया में और घरेलू मांग नारियल को खोपरा उत्पादन से दूर कर रही है, जिससे आपूर्ति कम हो रही है. लोगों की आय बढ़ने के साथ नारियल से बनने वाले प्रोडक्ट की मांग बढ़ रही है, लेकिन उसे पूरा करने के लिए सप्लाई पर्याप्त नहीं है.
निर्यात में तेजी का असर
द हिंदू बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत से ताजे नारियल और बिना छिलके वाले नारियल के बढ़ते निर्यात से भी सप्लाई में कमी आती है. देश में अभी नारियल की कटाई का सीजन चल रहा है जिसका बड़े पैमाने पर निर्यात होता है. साथ ही, दूसरे देशों से आयात भी हो रहा है. इसके वावजूद नारियल के दाम में लगातार तेजी बनी हुई है.
सरकारी सहायता (MSP): अभी हाल में सरकार ने खोपरा के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) (2026 सीजन के लिए) बढ़ा दिया ताकि किसानों को फायदा हो और वे इसकी बागवानी को अधिक बढ़ावा दें. किसानों को बेहतर रिटर्न दिलाने के लिए एमएसपी में वृद्धि की गई जिसका असर नारियल के बढ़े रेट के रूप में देखा जा रहा है. जब एमएसपी बढ़ता है तो उसका असर महंगाई पर दिखता है.