
जैसे-जैसे त्योहार नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे चना (चना दाल) की मांग बढ़ गई है. लोग त्योहारों में ज्यादा खरीदारी करते हैं, इसलिए बाजार में चना ज्यादा बिक रहा है. इसी वजह से पिछले दो हफ्तों में चना के दाम ₹225 से ₹300 तक बढ़ गए हैं. अब चना की कीमतें सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के करीब पहुंच रही हैं.
इस समय बाजार में पुराने चना का स्टॉक कम बचा है और उसकी क्वालिटी भी अच्छी नहीं है. मंडियों में नया चना भी कम आ रहा है, इसलिए सप्लाई घट गई है. जब सामान कम होता है और मांग ज्यादा होती है, तो कीमत अपने आप बढ़ जाती है. इसी कारण चना के दाम मजबूत हुए हैं.
पीली मटर के दाम भी बढ़ गए हैं. जब मटर महंगी होती है, तो लोग उसकी जगह चना खरीदने लगते हैं. इससे चना की मांग और ज्यादा बढ़ गई है और इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है.
भारत में बाहर से आने वाला चना, खासकर ऑस्ट्रेलिया से, इस साल कम आया है. आयातक लोग नया घरेलू चना आने का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए अभी कम खरीदारी कर रहे हैं. इस वजह से चना का आयात लगभग 6 प्रतिशत घट गया है, जिससे बाजार में सप्लाई और सख्त हो गई है.
सरकार ने रबी 2026-27 के लिए चना का MSP ₹5,875 प्रति क्विंटल तय किया है. अभी मंडियों में चना का औसत भाव लगभग ₹5,417 प्रति क्विंटल है. जानकारों का कहना है कि आगे चना की कीमतें MSP के आसपास ही रह सकती हैं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार कितनी खरीद करती है.
इस साल चना की बुवाई पिछले साल से ज्यादा हुई है. अभी तक करीब 95.88 लाख हेक्टेयर में चना बोया गया है. इसके बावजूद मांग ज्यादा और सप्लाई कम होने के कारण चना के दाम मजबूत बने हुए हैं.
ऑस्ट्रेलिया में चना की फसल बहुत अच्छी बताई जा रही है. वहां किसानों के पास ज्यादा चना है, लेकिन वे अभी बेचने के लिए रुक गए हैं. वे चाहते हैं कि दाम और बढ़ें, तभी बेचेंगे. इसका असर भारत के बाजार पर भी दिख रहा है. इस तरह त्योहारों की मांग, कम सप्लाई और धीमे आयात की वजह से चना की कीमतें बढ़ रही हैं और आने वाले समय में MSP के आसपास बनी रह सकती हैं.
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