Fever Milk: गाय-भैंस को प्रसूति ज्वर से बचाने के लिए ये हैं एक्सपर्ट टिप्स, पढ़ें डिटेल 

Fever Milk: गाय-भैंस को प्रसूति ज्वर से बचाने के लिए ये हैं एक्सपर्ट टिप्स, पढ़ें डिटेल 

Fever Milk गाय-भैंस के बच्चा देने के बाद अलर्ट रहने की जरूरत होती है. जबकि बहुत सारे पशुपालक बच्चा होते ही गाय-भैंस की तरफ से बेफ्रिक हो जाते हैं. अलर्ट रहना इसलिए जरूरी है कि बच्चा देने के फौरन बाद गाय-भैंस प्रसूति ज्वर यानि बुखार की चपेट में आ जाती हैं. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jan 13, 2026,
  • Updated Jan 13, 2026, 12:02 PM IST

Fever Milk मौसम कोई भी हो, प्रसूति ज्वर हर मौसम में पशुपालक और गाय-भैंस को परेशान करता है. क्यों जैसा इसका नाम है उसके मुताबिक गाय-भैंस के बच्चा देने के बाद इसके आने की ज्यादा संभावनाएं रहती हैं. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो पशुपालन में बच्चा होने के बाद होने वाला बुखार (प्रसूति ज्वर) एक बड़ी परेशानी है. गाय-भैंस के बच्चा देने के दो से तीन दिन बाद ये बुखार होता है. कई बार ये 15 दिन बाद भी होने लगता है. ये बुखार पशुपालक को दोहरा नुकसान पहुंचाता है. एक तो पशु बीमार होता है तो उसके इलाज पर खर्च करना पड़ता है. वहीं ये बुखार ऐसे वक्त पर होता है जब गाय-भैंस बच्चा देने के बाद दूध देना शुरू ही करती है. 

ऐसे में दूध उत्पादन का तो नुकसान होता ही है, साथ में कई बार पशु की जान भी चली जाती है. इस बुखार से पशुओं के शरीर में मैग्नीशियम की कमी हो जाती है. इसलिए कैल्शियम-मैग्निशियम बोरेग्लुकोनेट के मिश्रण की दवा इसमे बहुत फायदेमंद होती है. लेकिन दवाई हमेशा डॉक्टर की सलाह के बाद ही दें. करीब 75 फीसद पीडि़त पशु उपचार के दो घंटे में ही ठीक हो जाते हैं. वहीं 25 फीसद मामलों में ये बुखार दोबारा भी हो जाता है. 

ऐसे पहचाने पशु प्रसूति ज्वर की चपेट में है

  • रोगी पशु में बैचेनी बढ़ जाती है. 
  • पशु कमजोर हो जाता है और चलने में लड़खड़ाने लगता है.
  • पशु खाना-पीना और जुगाली करना बंद कर देता है.
  • मांसपेशियों में कमजोरी के कारण शरीर में कंपन होने लगती है.
  • पशु बार-बार सिर हिलाने और जोर-जोर से रंभाने लगता है.

प्रसूति ज्वर हो तो पशु का ऐसे करें इलाज 

रोग के लक्षण दिखाई देते हीं तुरंत रोगी पशु को कैल्शियम बोरेग्लुकोट दवा की 450 मिली लीटर की एक बोतल रक्त की नाड़ी के रास्ते चढ़ा देनी चाहिए. यह दवा धीरे-धीरे 10-20 बूंदे प्रति मिनट की दर से लगभग 20 मिनट में चढ़ानी चाहिए. यदि पशु दवा की खुराक देने के 8-12 घंटे के भीतर उठ कर खुद खड़ा नहीं होता तो इसी दवा की एक और खुराक देनी चाहिए. लेकिन डॉक्टर से सलाह के बाद. वहीं रोगी पशु का 24 घंटे तक उपचार के बाद दूध नहीं निकालना चाहिए.

बच्चा होने पर इन बातों का रखें ख्याल  

इस रोग से बचाव के लिए पशु को ब्यांतकाल में संतुलित आहार दें. संतुलित आहार के लिए दाना-मिश्रण, हरा चारा और सूखा चारा उचित अनुपात में दें. ध्यान रहे कि दाना मिश्रण में दो फीसद उच्च गुणवत्ता का खनिज लवण और एक फीसद साधारण नमक जरूर शामिल करें. यदि दाना मिश्रण में खनिज लवण और साधारण नमक नहीं मिलाया गया है तो पशु को 50 ग्राम खनिज लवण और 25 ग्राम साधारण नमक हर रोज जरूर दें.

लेकिन ब्याने से एक महीने पहले खनिज मिश्रण की मात्रा 50 ग्राम प्रतिदिन से घटा कर 30 ग्राम प्रतिदिन कर दें. ऐसा करने से ब्याने के बाद कैल्शियम की बढ़ी हुई जरूरत को पूरा करने के लिए हड्डियों से कैल्शियम अवशोषित करने की प्रक्रिया त्र्याने से पहले ही अमल में आ जाती है, जिससे ब्याने के बाद पशु के खून में कैल्शियम का स्तर सामान्य बना रहता है.

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