
कर्नाटक के सूरजमुखी, मूंग और सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए राहत की खबर है. केंद्र सरकार ने खरीफ 2026-27 सीजन के लिए राज्य में प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत इन तीनों फसलों की खरीद को मंजूरी दे दी है. इसके तहत 13,413 मीट्रिक टन सूरजमुखी, 38,250 मीट्रिक टन मूंग और 1,15,500 मीट्रिक टन सोयाबीन की खरीद की जाएगी. किसानों से यह उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी जाएगी.
केंद्रीय मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने बुधवार को इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि केंद्र की इस मंजूरी से बाजार में फसलों की कीमत MSP से नीचे जाने की स्थिति में किसानों को राहत मिलेगी.
कुमारस्वामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि ये मंजूरियां MSP पर सरकारी खरीद के जरिए किसानों को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करेंगी. उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार भी जताया.
कृषि और किसान कल्याण विभाग ने 29 सितंबर को तीन अलग-अलग पत्र जारी कर सूरजमुखी, मूंग और सोयाबीन की PSS के तहत खरीद की मंजूरी दी. केंद्र ने यह फैसला कर्नाटक सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्तावों के आधार पर लिया है.
राज्य सरकार ने सूरजमुखी और मूंग की खरीद के लिए 11 अगस्त को केंद्र से अनुरोध किया था, जबकि सोयाबीन की खरीद को लेकर 17 अगस्त को पत्र भेजा गया था. इसके बाद केंद्र ने तीनों फसलों की निर्धारित मात्रा को PSS के तहत खरीदने की मंजूरी दे दी.
केंद्र की मंजूरी के मुताबिक कर्नाटक में खरीफ 2026-27 के दौरान सबसे ज्यादा सोयाबीन की खरीद की जाएगी. इसके अलावा मूंग और सूरजमुखी को भी योजना में शामिल किया गया है.
इस तरह तीनों फसलों को मिलाकर 1,67,163 मीट्रिक टन तक की खरीद को मंजूरी मिली है.
केंद्र ने खरीद की मात्रा के साथ इसकी समय सीमा भी तय कर दी है. सरकारी खरीद शुरू होने के बाद 90 दिनों तक चलेगी. हालांकि, खरीद कब से शुरू होगी, इसकी तारीख कर्नाटक सरकार तय करेगी.
केंद्रीय नोडल एजेंसियों को खरीद शुरू होने की तारीख की जानकारी केंद्र सरकार को देने के निर्देश दिए गए हैं. खरीद शुरू करने से पहले एजेंसियों को उपज के वैज्ञानिक तरीके से भंडारण के लिए पर्याप्त जगह की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी.
सरकारी एजेंसियां उतनी ही मात्रा में उपज खरीद सकेंगी, जिसके सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित होगी.
PSS के तहत खरीद की एक अहम शर्त बाजार भाव से जुड़ी है. सरकारी खरीद उस स्थिति में की जाएगी, जब संबंधित फसल का बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से नीचे होगा.
इसके अलावा केवल फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) मानकों को पूरा करने वाली उपज ही खरीदी जाएगी. यानी किसानों को अपनी फसल सरकारी खरीद केंद्र पर बेचने के लिए तय क्वालिटी मानकों का पालन करना होगा.
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बाजार में कीमत गिरने के दौरान किसानों को उनकी उपज का कम से कम MSP दिलाना है.
सरकारी खरीद में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए किसानों का रजिस्ट्रेशन और पहचान भी महत्वपूर्ण होगी. केंद्र के निर्देश के मुताबिक खरीद रजिस्टर्ड किसानों से ही की जाएगी.
किसान की पहचान के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल किया जाएगा. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि PSS के तहत सरकारी खरीद का लाभ वास्तविक और रजिस्टर्ड किसानों तक पहुंचे.
किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्देश भुगतान से जुड़ा है. केंद्र सरकार ने कर्नाटक सरकार से सरकारी खरीद होने के तीन दिनों के भीतर किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान सुनिश्चित करने को कहा है.
इसके अलावा राज्य सरकार को मंजूर मात्रा की कुल खरीद लागत का कम से कम 15 प्रतिशत रिवॉल्विंग फंड के तौर पर उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है. इससे खरीद प्रक्रिया और किसानों के भुगतान के लिए जरूरी धन की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी.
केंद्र सरकार ने राज्य से PSS के तहत होने वाली पूरी खरीद प्रक्रिया को मंडी टैक्स या सेस से छूट देने को भी कहा है. इसके साथ केंद्रीय नोडल एजेंसियों को जरूरत के मुताबिक सीधे खरीद केंद्र खोलने में राज्य सरकार से सहयोग करने को कहा गया है.
इसका मकसद खरीद प्रक्रिया को आसान बनाना और किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए जरूरी सुविधा उपलब्ध कराना है.
PSS के तहत खरीद के दौरान SC और ST वर्ग के लाभार्थी किसानों से संबंधित डेटा भी जुटाया जाएगा. केंद्र ने राज्य सरकार और केंद्रीय नोडल एजेंसियों को इसके लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं.
यह डेटा PM-AASHA के तहत संबंधित मद में निर्धारित फंड के बेहतर इस्तेमाल और लाभार्थियों का रिकॉर्ड तैयार करने में काम आएगा.
कुल मिलाकर केंद्र की मंजूरी ऐसे समय में आई है, जब खरीफ फसलों की मंडियों में आवक का दौर शुरू होने वाला है. बाजार भाव MSP से नीचे जाने की स्थिति में PSS के तहत सरकारी खरीद किसानों के लिए कीमतों का सुरक्षा कवच बन सकती है.