Rice Price: टारगेट से ज्‍यादा हुई चावल की सरकारी खरीद, क्या कीमतों में आएगी गिरावट?

Rice Price: टारगेट से ज्‍यादा हुई चावल की सरकारी खरीद, क्या कीमतों में आएगी गिरावट?

देश में चावल की सरकारी खरीद लक्ष्य से अधिक हो गई है, जिससे भंडार काफी बढ़ गया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ज्यादा स्टॉक के कारण बाजार में चावल की कीमतों में गिरावट आ सकती है. सरकार की बिक्री नीति और मांग की स्थिति आने वाले समय में कीमतों को प्रभावित कर सकती है.

चावल की बंपर खरीदचावल की बंपर खरीद
क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 05, 2026,
  • Updated May 05, 2026, 12:33 PM IST

भारत में इस साल चावल की सरकारी खरीद ने नया मुकाम छू लिया है. अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच सरकार ने करीब 50 मिलियन टन चावल खरीद लिया है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 6% ज्यादा है. इसका मतलब है कि देश में इस बार उत्पादन भी अच्छा रहा और सरकार ने किसानों से बड़ी मात्रा में फसल खरीदी है. खास बात यह है कि रबी सीजन में भी चावल की खरीद बढ़ी है, जिससे कुल स्टॉक मजबूत हुआ है. अब सरकार के पास इतना चावल जमा हो गया है कि उसे बाजार में निकालने की योजना बनानी पड़ सकती है. यहां अब सवाल यह उठता है की अगर सरकार के पास स्टॉक पूरा है और खरीद भी पूरी हुई है तो क्या सरकार चावल की कीमतों में गिरावट करेगी या नहीं. क्योंकि जब भी देश में चावल या किसी अन्य उत्पादों की कमी होती है तो सरकार सबसे पहले कीमत को बढ़ाती है. 

सरकार का लक्ष्य और बढ़ती खरीद

सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए कुल 56.66 मिलियन टन चावल खरीदने का लक्ष्य रखा है. इसमें खरीफ और रबी दोनों सीजन की फसल शामिल है. अभी तक जो आंकड़े सामने आए हैं, उनके अनुसार अप्रैल के अंत तक लगभग 49.86 मिलियन टन चावल खरीदा जा चुका है. पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 47.02 मिलियन टन था. यानी साफ है कि इस बार खरीद ज्यादा हुई है. इससे किसानों को फायदा हुआ है क्योंकि उनकी फसल सरकार ने अच्छी कीमत पर खरीदी है.

किस राज्यों से आया सबसे ज्यादा चावल

इस बार चावल की खरीद में अलग-अलग राज्यों का योगदान भी दिलचस्प रहा है. तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में खरीद में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है. आंध्र प्रदेश में तो खरीद करीब 70% तक बढ़ गई है. वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में भी खरीद में बढ़त दर्ज की गई है. दूसरी तरफ पंजाब और हरियाणा जैसे पारंपरिक राज्यों में थोड़ी गिरावट देखने को मिली है. इसका मतलब है कि अब चावल उत्पादन और खरीद का केंद्र धीरे-धीरे दूसरे राज्यों की ओर भी बढ़ रहा है.

भंडारण बढ़ने से नई चुनौती

इतनी बड़ी मात्रा में चावल खरीदने के बाद अब सरकार के सामने इसे संभालने की चुनौती भी है. ज्यादा स्टॉक होने का मतलब है कि इसे सही समय पर सही जगह पर इस्तेमाल करना जरूरी है. इसलिए सरकार अब इस चावल को खुले बाजार में बेचने, राज्यों को देने और एथेनॉल बनाने के लिए डिस्टिलरी को सप्लाई करने की योजना बना रही है. पिछले साल के मुकाबले इस साल चावल की बिक्री भी काफी बढ़ी है, खासकर एथेनॉल उत्पादन के लिए.

उत्पादन में भी रिकॉर्ड, किसानों को फायदा

कृषि मंत्रालय के अनुसार, 2025-26 में खरीफ सीजन में चावल का उत्पादन रिकॉर्ड 123.93 मिलियन टन तक पहुंच सकता है. वहीं रबी सीजन में भी उत्पादन बढ़ा है. इसका सीधा फायदा किसानों को मिला है क्योंकि उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए बेहतर मौका मिला. जब उत्पादन और खरीद दोनों बढ़ते हैं, तो किसानों की आय में भी सुधार होता है.

बाजार और भविष्य पर असर

चावल की इतनी बड़ी खरीद का असर आने वाले समय में बाजार पर भी पड़ सकता है. अगर सरकार ज्यादा स्टॉक को बाजार में उतारती है, तो कीमतों पर असर दिख सकता है. वहीं एथेनॉल जैसे नए उपयोग से चावल की मांग भी बढ़ सकती है. कुल मिलाकर, इस बार चावल की कहानी सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि भारत की कृषि व्यवस्था धीरे-धीरे और मजबूत हो रही है और नए रास्तों की ओर बढ़ रही है.

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