किसानों को बड़ा झटका: MSP से नीचे बिक रही 9 फसलें, रागी-मूंग की हालत सबसे खराब

किसानों को बड़ा झटका: MSP से नीचे बिक रही 9 फसलें, रागी-मूंग की हालत सबसे खराब

देशभर की मंडियों में कई प्रमुख फसलों के भाव MSP से नीचे दर्ज किए गए हैं. गेहूं, मक्का, मूंग, रागी, बाजरा, अरहर और अन्य फसलों के कम दाम से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. ताजा मंडी आंकड़ों में MSP और बाजार भाव के बीच बड़ा अंतर सामने आया है, जिससे किसानों की आय पर असर पड़ रहा है.

MSP से हजारों रुपये नीचे पहुंची कीमतेंMSP से हजारों रुपये नीचे पहुंची कीमतें
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jul 27, 2026,
  • Updated Jul 27, 2026, 8:29 AM IST

किसानों के लिए एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है. देशभर की कई मंडियों में इस समय कई प्रमुख फसलों के भाव सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से भी नीचे चल रहे हैं. ताजा मंडी आंकड़ों के अनुसार, गेहूं, मक्का, मूंग, बाजरा, रागी, अरहर, चना, मूंगफली और सूरजमुखी जैसी फसलों को किसानों को कम कीमत पर बेचना पड़ रहा है. इससे किसानों को अपनी लागत निकालने और बेहतर मुनाफा कमाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. सबसे ज्यादा गिरावट कुछ दलहन और मोटे अनाज की फसलों में देखने को मिली है. MSP का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है, लेकिन मंडियों में कम भाव मिलने से यह लक्ष्य अभी भी चुनौती बना हुआ है. आइए जानते हैं किन फसलों के दाम MSP से नीचे चल रहे हैं और किसानों पर इसका क्या असर पड़ रहा है.

गेहूं का भाव MSP से 84 रुपये नीचे

गेहूं किसानों के लिए भी मंडी भाव चिंता का विषय बना हुआ है. सरकार ने गेहूं का MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जबकि 17 जुलाई 2026 को इसका अखिल भारतीय औसत मंडी थोक भाव 2501 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. यानी गेहूं करीब 84 रुपये प्रति क्विंटल MSP से नीचे बिक रहा है. आंकड़ों के अनुसार गेहूं का भाव MSP से करीब 3.25 प्रतिशत कम रहा.

हालांकि गेहूं की कीमतों में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं है, लेकिन MSP से नीचे बिक्री होने से किसानों की लागत और मुनाफे पर असर पड़ सकता है.

मक्का और बाजरा किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान

मक्का की स्थिति किसानों के लिए ज्यादा चिंता वाली है. मक्का का MSP 2400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है, जबकि मंडियों में इसका औसत भाव 1952 रुपये प्रति क्विंटल रहा. यानी मक्का करीब 448 रुपये प्रति क्विंटल MSP से कम कीमत पर बिक रहा है. यह MSP से लगभग 18.67 प्रतिशत नीचे है.

वहीं बाजरा भी MSP से काफी कम भाव पर बिक रहा है. बाजरे का MSP 2775 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि मंडी भाव 2158 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. बाजरे की कीमत MSP से करीब 22.23 प्रतिशत कम रही. इससे खासकर उन किसानों को नुकसान हो सकता है जो मोटे अनाज की खेती पर निर्भर हैं.

मूंग और रागी की कीमतों में बड़ी गिरावट

दलहन फसलों में मूंग की स्थिति सबसे ज्यादा खराब दिखाई दे रही है. सरकार ने मूंग का MSP 8768 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन मंडियों में इसका औसत भाव 6846 रुपये प्रति क्विंटल रहा. यानी मूंग करीब 1922 रुपये प्रति क्विंटल MSP से नीचे बिक रही है. यह MSP के मुकाबले लगभग 21.92 प्रतिशत कम है.

रागी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. रागी का MSP 4886 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि मंडी में इसका औसत भाव 3345 रुपये प्रति क्विंटल रहा. रागी MSP से करीब 31.54 प्रतिशत नीचे बिक रही है, जो सभी सूचीबद्ध फसलों में सबसे बड़ी गिरावट है.

अरहर और चने के भाव भी MSP से नीचे

दलहन किसानों को अरहर और चने में भी MSP का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है. अरहर का MSP 8000 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि मंडी भाव 7504 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. यानी अरहर करीब 496 रुपये प्रति क्विंटल कम भाव पर बिक रही है.

इसी तरह चने का MSP 5875 रुपये प्रति क्विंटल है और मंडियों में इसका भाव 5744 रुपये प्रति क्विंटल रहा. चना करीब 131 रुपये प्रति क्विंटल MSP से नीचे बिक रहा है.

मूंगफली और सूरजमुखी के दाम में भी गिरावट

तिलहन फसलों में मूंगफली और सूरजमुखी की कीमतें भी MSP से नीचे दर्ज की गई हैं. मूंगफली का MSP 7263 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि मंडी भाव 7132 रुपये प्रति क्विंटल रहा. इसमें MSP के मुकाबले करीब 1.80 प्रतिशत की गिरावट है.

वहीं सूरजमुखी का MSP 7721 रुपये प्रति क्विंटल तय है, लेकिन मंडियों में इसका भाव 6998 रुपये प्रति क्विंटल रहा. सूरजमुखी करीब 723 रुपये प्रति क्विंटल MSP से कम कीमत पर बिक रहा है.

किसानों को MSP का लाभ दिलाना बड़ी चुनौती

MSP का उद्देश्य किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाना है, ताकि उन्हें बाजार में कम कीमत मिलने पर नुकसान न उठाना पड़े. लेकिन कई बार मंडियों में मांग और आपूर्ति, बाजार की स्थिति, भंडारण की कमी और खरीद व्यवस्था कमजोर होने के कारण किसानों को MSP से कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ती है.

किसान संगठनों की ओर से लगातार मांग की जाती रही है कि सरकार ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित रूप से मिल सके. मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि कई प्रमुख फसलों के लिए अभी भी MSP और वास्तविक मंडी भाव के बीच अंतर बना हुआ है.

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