सेब बागवानों की मेहनत पर बारिश ने फेरा पानी, सड़कें बंद, मंडी तक नहीं पहुंच पा रहे फल

सेब बागवानों की मेहनत पर बारिश ने फेरा पानी, सड़कें बंद, मंडी तक नहीं पहुंच पा रहे फल

सेब बहुल इन क्षेत्रों में कभी ट्रकों की कतार मंडियों की ओर जाती थी, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि सेब खेतों में ही खराब हो रहे हैं. जिन बागवानों ने सालभर मेहनत की, उन्हें अब अपनी फसल भूसे के भाव बेचनी पड़ रही है.

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क‍िसान तक
  • शिमला,
  • Aug 29, 2025,
  • Updated Aug 29, 2025, 2:35 PM IST

हिमाचल के शिमला जिले के रामपुर उपमंडल की चार पंचायतों काशा पाट, मुनीश, देवठी और कूहल लगातार तीसरे साल भी एक जैसी तकलीफ से जूझ रही हैं. सेरी पुल के पास सड़क धंसने से इन पंचायतों का मुख्य सड़क से संपर्क पूरी तरह टूट गया है. जिस वक्त सेब बागवानों की मेहनत का फल बाजार पहुंचना चाहिए, उसी समय सड़क बंद हो जाती है. नतीजा ये कि सेब खेतों में ही सड़ रहे हैं या फिर कौड़ियों के भाव बेचने को मजबूर हैं.

तीन साल से नहीं मिली राहत
ग्रामीणों का कहना है कि ये तीसरा साल है जब बरसात शुरू होते ही यही सड़क धंस जाती है, लेकिन प्रशासन और सरकार की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं खोजा गया. सिर्फ कागज़ों में करोड़ों रुपये खर्च दिखाए जाते हैं, जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है.

सेब फंसे, बाजार नहीं पहुंच पाए...
सेब बहुल इन क्षेत्रों में कभी ट्रकों की कतार मंडियों की ओर जाती थी, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि सेब खेतों में ही खराब हो रहे हैं. जिन बागवानों ने सालभर मेहनत की, उन्हें अब अपनी फसल भूसे के भाव बेचनी पड़ रही है.

राशन और गैस पहुंचाना भी जंग से कम नहीं
यहां सिर्फ सेब ही नहीं, आम जनजीवन भी ठप हो गया है. राशन, गैस और जरूरी सामान गांव तक नहीं पहुंच पा रहा. ग्रामीणों को 7-8 घंटे पैदल चलकर जरूरत की चीजें लानी पड़ रही हैं. बच्चों की पढ़ाई और बीमारों की जिंदगी तक इस टूटे रास्ते में अटक गई है.

बस सेवा भी ठप, दिखावे के लिए स्पेन की व्यवस्था
लोगों की सुविधा के लिए कोई बस सेवा उपलब्ध नहीं है. सरकार ने सिर्फ दिखावे के लिए एक छोटी स्पेन (वाहन) की व्यवस्था की है, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है. इससे न तो सेब ढोया जा सकता है और न ही ग्रामीणों की जरूरतें पूरी होती हैं.

नेताओं और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
भाजपा नेता कॉल नेगी ने कहा, “तीन साल से लोग लगातार गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ. सेब मंडी तक नहीं पहुंच पाता और बस सुविधा पूरी तरह बंद है.”

शबनम ठाकुर, निवासी काशा पाट, बताती हैं, “जैसे ही बारिश शुरू होती है, सड़क बंद हो जाती है. 7-8 घंटे पैदल चलना पड़ता है. सेब फंस जाता है, गैस-राशन की किल्लत हो जाती है.”

पूर्व पंचायत समिति सदस्य शीशी राम ने कहा, “यह मंत्री का गृह क्षेत्र है, फिर भी सड़क की स्थिति शर्मनाक है.”

स्थानीय निवासी चेतन पाकला ने बताया, “तीन साल से लोग परेशान हैं, सरकार विफल रही है.”

-बिश्वेश्वर नेगी की रिपोर्ट

-----------समाप्त---------

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