India-EU Deal: 'भारतीय बाजार पर कॉरपोरेट का होगा सिस्टमैटिक कब्ज़ा,' संयुक्त किसान मोर्चा ने जताया कड़ा विरोध

India-EU Deal: 'भारतीय बाजार पर कॉरपोरेट का होगा सिस्टमैटिक कब्ज़ा,' संयुक्त किसान मोर्चा ने जताया कड़ा विरोध

SKM ने कहा कि इस डील का मतलब है कि हर साल 4 अरब यूरो की सब्सिडी वाली EU डेयरी, प्रोसेस्ड फूड, वाइन और स्पिरिट के लिए रास्ते खुल जाएंगे. SKM ने इस बात पर जोर दिया कि EU की कॉमन एग्रीकल्चरल पॉलिसी (CAP) बहुत ज़्यादा, गलत सब्सिडी देती है, जिसकी बराबरी हमारे किसान कभी नहीं कर सकते.

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क‍िसान तक
  • नोएडा,
  • Jan 31, 2026,
  • Updated Jan 31, 2026, 1:41 PM IST

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता कोई उचित डील नहीं है, बल्कि यह "आर्थिक उपनिवेशीकरण का ब्लूप्रिंट" है, जिससे भारतीय बाजार पर कॉरपोरेट का सिस्टमैटिक कब्ज़ा हो जाएगा.  एक बयान में, SKM ने कहा कि प्रोसेस्ड फूड मार्केट के खुलने से घरेलू कृषि उत्पादन और छोटे किसानों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा. SKM ने भारत-यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस समझौते से घरेलू खेती और इंडस्ट्री खत्म हो जाएगी, और भारत में रोजगार के मौके बर्बाद हो जाएंगे. 

'छोटे किसानों के लिए विनाशकारी होगा प्रोसेस्ड फूड मार्केट खुलना'

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि जैतून के तेल, मार्जरीन और दूसरे वेजिटेबल तेल, फलों के जूस और नॉन-अल्कोहलिक बीयर, प्रोसेस्ड फूड और भेड़ के मांस पर भारतीय सरकार द्वारा इंपोर्ट ड्यूटी में पूरी छूट देने से किसानों पर बुरा असर पड़ेगा. SKM ने कहा कि कृषि क्षेत्र उतना खुला नहीं है जितना भारत सरकार दावा करती है, लेकिन प्रोसेस्ड फूड मार्केट के खुलने से घरेलू कृषि उत्पादन और छोटे किसानों पर बड़ा और विनाशकारी असर पड़ेगा. इसमें वाइन पर इंपोर्ट ड्यूटी 150 परसेंट से घटाकर 20 परसेंट और 30 परसेंट, स्पिरिट्स पर 150 परसेंट से 40 परसेंट, बीयर पर 110 परसेंट से 50 परसेंट, कीवी और नाशपाती पर 33 परसेंट से 10 प्रतिशत, और सॉसेज और दूसरे मीट प्रोडक्ट्स पर 110 परसेंट से 50 परसेंट करने पर भी आपत्ति जताई गई. 

'भारत के अपने मानक हो रहे कमजोर'

SKM ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि वे यूरोपीय संघ के दबाव में आकर भारत से अंगूर और आम जैसे कृषि उत्पादों के निर्यात को रोकने के लिए अपनी जटिल और महंगी सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी (SPS) बाधाओं को बनाए रख रहे हैं. जबकि FTA का इस्तेमाल करके अपने उत्पादों की एंट्री आसान बनाने के लिए भारत के अपने मानकों को कमजोर कर रहे हैं. 2020-21 के किसान आंदोलन का नेतृत्व करने वाली संस्था ने कहा कि यह दोहरा मापदंड EU के किसानों की रक्षा करता है, जबकि हमारे खेतों और उपभोक्ताओं को गलत और असुरक्षित मुकाबले के सामने छोड़ देता है. 

इस डील के बाद भी अंगूर, सेब, आम और दूसरे प्रोड्यूसर्स को सख्ती से रिजेक्ट करना बार-बार जारी रहेगा. ऐसे सिस्टम में शामिल होना किसानों के हितों के साथ धोखा है. SKM ने कहा कि इस डील का मतलब है कि हर साल 4 अरब यूरो की सब्सिडी वाली EU डेयरी, प्रोसेस्ड फूड, वाइन और स्पिरिट के लिए रास्ते खुल जाएंगे.  SKM ने इस बात पर जोर दिया कि EU की कॉमन एग्रीकल्चरल पॉलिसी (CAP) बहुत ज़्यादा, गलत सब्सिडी देती है, जिसकी बराबरी हमारे किसान कभी नहीं कर सकते. 

क्यों विरोध कर रहा है SKM?

इसमें कहा गया है कि EU के 96.6 प्रतिशत सामानों पर टैरिफ खत्म करने से सस्ते इंपोर्ट की बाढ़ आ जाएगी, जिससे एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स की इंटरनेशनल कीमतों पर असर पड़ेगा और घरेलू कीमतें गिर जाएंगी, जैसा कि दालों और खाने के तेल के मामले में हुआ था. यह कॉम्पिटिशन नहीं है; यह भारत के छोटे किसानों के खिलाफ आर्थिक युद्ध है. इसमें चेतावनी दी गई है कि FTA का "हाई लेवल" इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी प्रोटेक्शन यूरोपीय बीज और एग्रो-केमिकल कंपनियों की मोनोपॉली के लिए एक ट्रोजन हॉर्स है. SKM ने कहा कि EU का मकसद बीजों और पौधों की किस्मों पर TRIPS-प्लस प्रावधान लागू करना है, जिससे बीज बचाने, बदलने और दोबारा इस्तेमाल करने के भारत के पुराने अधिकारों को गैर-कानूनी बना दिया जाएगा. 

इसमें कहा गया कि इसके अलावा, फार्मास्युटिकल पेटेंट को बढ़ाकर और डेटा एक्सक्लूसिविटी को लागू करके, यह भारत के जेनेरिक दवा उद्योग को खत्म करना चाहता है, जिससे लाखों लोगों के लिए हेल्थकेयर महंगा हो जाएगा. इसमें आगे कहा गया है कि इस डील के जरिए बीजेपी सरकार ने लोगों की जिंदगी और किसानों के अधिकारों से ऊपर कॉर्पोरेट मुनाफ़े को रखा है. यह एजेंडा NDA सरकार के प्रस्तावित बीज बिल 2025 में भी झलकता है. 

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