
मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान धान उपार्जन में बंपर खरीद की है. सीजन में प्रदेश में 51 लाख 74 हजार 792 मीट्रिक टन से अधिक धान का उपार्जन किया गया है. यह मात्रा पिछले साल से ज्यादा है. एक सरकारी बयान में कहा गया कि राज्य की उपार्जन नीति और व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता के कारण यह संभव हुआ है. किसानों को सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई वृद्धि और तकनीक आधारित भुगतान व्यवस्था का सीधा लाभ मिला है.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अन्नदाताओं को समर्थ बनाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और किसानों को उनकी उपज का पूरा मूल्य बिना किसी बाधा के समय पर दिलाना राज्य सरकार का संकल्प है. इस साल धान (कॉमन) का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,369 रुपये प्रति क्विंटल तय था, जो पिछले सत्र के मुकाबले 69 रुपये ज्यादा है. पिछले खरीफ सीजन में एमएसपी 2,300 रुपये प्रति क्विंटल था.
मुख्यमंत्री ने बताया कि खरीफ सत्र में प्रदेशभर में 8 लाख 59 हजार 822 धान उत्पादक किसानों का पंजीयन हुआ था. इनमें से लगभग 92 प्रतिशत यानी 7 लाख 89 हजार 757 किसानों ने स्लॉट बुक कर खरीद प्रक्रिया में भाग लिया. वहीं, 7.62 लाख से ज्यादा किसान (89 प्रतिशत) वास्तविक रूप से खरीद केंद्रों तक धान लेकर पहुंचे.
धान खरीदी के लिए प्रदेश में कुल 1,436 खरीद केंद्र बनाए गए थे. इन केंद्रों के माध्यम से खरीदे गए धान में से 48 लाख 38 हजार 637 मीट्रिक टन से अधिक धान का परिवहन पूरा किया जा चुका है. परिवहन किए गए धान में से 46 लाख 30 हजार 21 मीट्रिक टन धान क्वालिटी टेस्ट के बाद स्वीकार भी कर लिया गया है. इससे भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूती मिली है.
सीएम ने कहा कि खरीदे गए धान के आधार पर इस सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य का कुल आंकलन लगभग 12 हजार 259 करोड़ रुपये किया गया है. इसमें से करीब 11 हजार करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर भी किए जा चुके हैं. तकनीक आधारित भुगतान प्रणाली के चलते किसानों को समय पर भुगतान मिला और बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई.
मुख्यमंत्री ने कहा कि उपार्जन से मिली आर्थिक मजबूती के कारण किसान अगली फसल की तैयारी अधिक आत्मविश्वास के साथ कर पा रहे हैं. पूरी खरीद प्रक्रिया की निरंतर निगरानी की गई, जिससे किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आई.