
जम्मू-कश्मीर से मॉनसून की वापसी हो चुकी है. बारिश खत्म होने के साथ ही अब ठंड की शुरुआत हो जाएगी. श्रीनगर में फिलहाल अधिकतम तापमान 21 से 24 डिग्री सेल्सियस से बीच रह रहा है, जबकि न्यूनतम तापमान 7 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया जा रहा है. ऐसे में बदलते मौसम के दौरान पालतू जानवरों की विशेष देखभाल की जरूरत होती है क्योंकि तापमान में परिवर्तन उनकी सेहत पर असर पड़ सकता है. पशुपालक इस दौरान अपने पशुओं का सही तरीके से ख्याल रख पाएं इसलिए मौसम विभाग की तरफ से उनके लिए सलाह जारी की जाती है. जिसका पालन करके किसान पशुओं को होने वाले नुकसान से बच सकते हैं.
गौपालक किसानों के लिए जारी किए गए सलाह में कहा गया है कि गायों में स्तन संबंधी बीमारी की रोकथाम के लिए उनके बैठने वाले स्थान को साफ रखें और उनके थन की अच्छे तरीके से साफ-सफाई करें. अन्य पशु जो दूध नहीं दे रहे हैं उनकी स्वच्छता पर भी ध्यान देना चाहिए. दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए गायों को मिनरल मिक्सचर खिलाएं. इससे प्रजनन स्वास्थ्य में भी सुधार होता है. इस मौसम में हरी तिपतिया घास चरने के कारण पशुओं में सूजन की समस्या हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो पशुओं को ब्लोटोसिल, तारपीन का तेल या सरसों तेल पिलाएं.
ये भी पढ़ेंः सरसों की इन खास प्रजातियों से ज्यादा होगा तेल का उत्पादन, जानिए कब से मिलेगा बीज, यहां पढ़ें पूरी डिटेल
एफएमडी के लिए कराएं टीकाकरण
पशुओं में होने वाले फूट एंड माउथ (Foot And mouth) रोगों से बचाव के लिए अक्तूबर महीने में ही उनका टीकाकरण करा लेना चाहिए. इससे इस बीमारी से रोकथाम करने में मदद मिलती है. इस मौसम में पशुओं को सेब या शलजम खिलाने से ग्रासनली में रूकावट जैसी समस्या हो जाती है. इससे पशुओं को एसिडिटी हो जाती है. इसलिए इसे खिलाने से बचना चाहिए. इसके साथ ही रात में ठंड से पशुओं को बचाने के लिए उन्हें शेड में रखे और ठंड के मौसम को देखते हुए उनके शेड को अच्छे से बनाएं.
ऊन निकालने की प्रक्रिया करें पूरी
भेड़ और बकरी में भी इस दौरान सूजन की समस्या हो सकती है, इसे ठीक करने के लिए उन्हें ब्लोटोसिल, तारपीन या सरसों का तेल पिलाएं. मुंह और पैरों में होने वाले संक्रामक रोगों से बचाव के लिए एहतियाती कदम उठाएं. इस रोग से बचाव के लिए अक्टूबर महीने में भेड़ और बकरियों का टीकाकरण कराएं. पशुओं को इस समय कृमि मुक्ति की दवा खिलाएं. भेड़ बकरियों से ऊन निकालने की प्रक्रिया को इसी समय पूरा किया जाना चाहिए. इसके साथ ही अब कड़ाके की सर्दियां आने वाली है इसलिए घास और चारे का स्टॉक जमा कर लें. पशुओं को ठंड से बचाने के लिए शेड को उपयुक्त तरीके से बनाएं.
ये भी पढ़ेंः Haryana: पराली जलाने के आरोप में किसान पर केस दर्ज, सोनीपत में भी बढ़े मामले
मुर्गीपालन को लेकर सलाह
मुर्गीपालन को लेकर जारी किए गए सलाह में कहा गया है कि जब फार्म में नए पॉल्ट्री मुर्गियों की खेप आए तब उन्हें तुरंत भोजन उपलब्ध कराएं और ग्लूकोज भी दें. इसके साथ ही पहले तीन दिनों तक इलेक्ट्रोलाइट्स और तनाव-विरोधी विटामिन उन्हें दें. शेड में उचित ब्रूडिंग तापमान बनाए रखें. चूजों के पालन पोषण के दौरान तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक बनाए रखें. शेड में हानिकारक गैस जमा नहीं हो इसके लिए उचित वेंटिलेशन की व्यवस्था रखे, साथ ही शेड में उचित साफ-सफाई बनाए रखें.