यवतमाल में किसान परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, 6 साल में पिता और दो बेटों की मौत

यवतमाल में किसान परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, 6 साल में पिता और दो बेटों की मौत

महाराष्ट्र के यवतमाल में एक किसान परिवार के तीन सदस्यों की छह साल के भीतर आत्महत्या से मौत का मामला सामने आया है. परिवार का आरोप है कि राशि जमा करने के बावजूद खेत को बिजली कनेक्शन नहीं मिला. फसल नुकसान और आर्थिक संकट के बीच परिजनों ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है.

Yavatmal Farmer SuicideYavatmal Farmer Suicide
क‍िसान तक
  • यवतमाल,
  • Oct 05, 2026,
  • Updated Oct 05, 2026, 6:43 PM IST

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के रालेगांव तहसील स्थित पिंपलापुर गांव में एक किसान परिवार के तीन सदस्यों की छह साल के भीतर आत्महत्या से मौत का मामला सामने आया है. पहले परिवार के दो बेटों और अब उनके पिता ज्ञानेश्वर मालेकर ने अपनी जान दे दी. परिजनों ने महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी की कथित लापरवाही, सिंचाई के लिए बिजली कनेक्शन नहीं मिलने, फसल नुकसान और आर्थिक संकट को परिवार की परेशानी की बड़ी वजह बताया है. हालांकि, इन आरोपों पर बिजली वितरण कंपनी ने अपना पक्ष अभी तक नहीं दिया है.

पिंपलापुर निवासी किसान ज्ञानेश्वर मालेकर ने अपने दोनों बेटों के साथ मेहनत कर करीब पांच एकड़ कृषि भूमि खरीदी थी. खेत की सिंचाई के लिए बोरवेल भी कराया गया. परिवार का आरोप है कि तमाम प्रयासों के बावजूद बोरवेल के लिए बिजली कनेक्शन नहीं मिल सका.

2020 में राशि जमा करने का दावा

परिवार के मुताबिक, बिजली कनेक्शन के लिए वर्ष 2020 में मांग के अनुसार आवश्यक राशि जमा कर दी गई थी, लेकिन इसके बाद भी खेत तक बिजली कनेक्शन नहीं पहुंचा. परिवार का कहना है कि इस दौरान खेती और आर्थिक स्थिति को लेकर परेशानियां लगातार बढ़ती गईं.

वर्ष 2021 में ज्ञानेश्वर मालेकर के बड़े बेटे निखिल मालेकर की आत्महत्या से मौत हो गई. इसके बाद छोटे बेटे ने खेती की जिम्मेदारी संभाली और बिजली कनेक्शन के लिए अधिकारियों से संपर्क करता रहा. वर्ष 2024 में छोटे बेटे ने भी आत्महत्या कर ली.

दोनों बेटों को खोने के बाद पिता ज्ञानेश्वर मालेकर ने खेती की कमान संभाली. परिवार का आरोप है कि उन्होंने भी सिंचाई के लिए बिजली कनेक्शन हासिल करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. अब उनकी भी आत्महत्या से मौत होने के बाद परिवार में नीमा मालेकर अकेली रह गई हैं.

बारिश की कमी से कपास-सोयाबीन को नुकसान

नीमा मालेकर के मुताबिक, इस साल करीब 50 दिनों तक पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण कपास और सोयाबीन की फसलों को नुकसान पहुंचा. परिवार की जमा पूंजी खेती में लगाने के बावजूद अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल सका. खेत में बोरवेल होने के बावजूद बिजली कनेक्शन नहीं होने से सिंचाई भी नहीं हो सकी.

नीमा ने आरोप लगाया कि बिजली कनेक्शन नहीं मिलने और लगातार बढ़ते आर्थिक संकट ने परिवार की मुश्किलें बढ़ाईं. उन्होंने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

भाई के साथ रह रहीं नीमा मालेकर

नीमा मालेकर के भाई विष्णु चौधरी के अनुसार, पति और दोनों बेटों की मौत के बाद नीमा फिलहाल उनके साथ कासोला गांव में रह रही हैं. परिवार के सदस्यों की मौत के बाद उनके सामने गुजर-बसर की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है.

प्राकृतिक संकट से जूझ रहे किसान: सरपंच

ग्राम पंचायत के सरपंच रवि चौधरी ने कहा कि यवतमाल के किसान पिछले कई वर्षों से मौसम की मार झेल रहे हैं. कभी अत्यधिक बारिश तो कभी सूखे जैसे हालात के कारण खेती प्रभावित हो रही है. कपास और सोयाबीन जैसी प्रमुख नकदी फसलों में नुकसान होने से किसानों का आर्थिक गणित भी बिगड़ रहा है.

उन्होंने किसानों को सरकारी स्तर पर प्रभावी सहायता देने के साथ सिंचाई और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने की जरूरत बताई.(भास्कर मेहरे की रिपोर्ट)

(नोट: आत्महत्या से संबंधित आरोप परिवार और स्थानीय लोगों के बयानों पर आधारित हैं.)

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