
हरियाणा के किसान उत्पादक संगठन यानी FPO अब खेती के उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. इसी कड़ी में हरियाणा के सोनीपत से 24 मीट्रिक टन फ्रोजन फूड प्रोडक्ट्स की खेप कनाडा भेजी गई है. यह खेप 1 अक्टूबर को सोनीपत से रवाना की गई. इसे अटेर्ना फूड्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने एक्सपोर्ट किया है. इस खेप की कीमत करीब 35,140 कनाडाई डॉलर है. इसमें फ्रोजन फूड के 2,295 बॉक्स शामिल हैं. इन बॉक्स में हरी मटर, मिक्स वेजिटेबल्स, मटर और गाजर, स्वीट कॉर्न और समोसे जैसे खाद्य उत्पाद भेजे गए हैं.
इस एक्सपोर्ट में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी APEDA ने सहयोग किया. APEDA ने अपनी वित्तीय सहायता योजना के तहत एक्सपोर्ट करने वाली यूनिट को मदद दी. इसका उद्देश्य भारतीय प्रोसेस्ड फूड उत्पादों के लिए विदेशी बाजारों में नए अवसर तैयार करना और FPOs को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ना है. FPO के जरिए किसान सिर्फ कच्ची फसल बेचने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि खेती के उत्पादों की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग करके उन्हें दूसरे देशों के बाजारों तक पहुंचाने का मौका मिलता है. इससे कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन होता है और किसानों को अपने उत्पादों की बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ती है.
इस खेप में कई तरह के फ्रोजन और प्रोसेस्ड फूड शामिल हैं. इसमें सब्जियों के साथ समोसे जैसे तैयार खाद्य उत्पाद भी भेजे गए हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि किसान समूह अब केवल कच्चे कृषि उत्पादों के एक्सपोर्ट से आगे बढ़कर प्रोसेस्ड और ज्यादा दाम वाले उत्पादों के बाजार में भी अपनी जगह बना रहे हैं. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए APEDA के चेयरमैन अभिषेक देव ने एक्सपोर्टर और इससे जुड़े अन्य लोगों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि FPO की ओर से सीधे एक्सपोर्ट करने से उत्पादकों को बेहतर मूल्य मिलने में मदद मिल सकती है. उन्होंने NIFTEM के योगदान की भी सराहना की और कनाडा के बाजार में एक्सपोर्ट बढ़ने की उम्मीद जताई.
APEDA लगातार FPOs और एक्सपोर्टर्स के बीच संपर्क बढ़ाने और किसान समूहों को विदेशी बाजारों से जोड़ने के लिए काम कर रहा है. हरियाणा से कनाडा भेजी गई यह खेप भी इसी तरह की पहल का हिस्सा है. कृषि उत्पादों को प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट से जोड़ने से किसान समूहों के लिए कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं. साथ ही, भारतीय प्रोसेस्ड फूड को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है. (ANI)