Clerodendrum Japonicum: पशुओं के घाव और सूजन में काम आता है ये पौधा, लंपी के बीच बढ़ी अहमियत

Clerodendrum Japonicum: पशुओं के घाव और सूजन में काम आता है ये पौधा, लंपी के बीच बढ़ी अहमियत

Clerodendrum japonicum पौधे का पारंपरिक पशु चिकित्सा में घाव भरने, सूजन कम करने और दर्द से राहत के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. पशुओं में त्वचा और घाव संबंधी परेशानियों के बीच इस पौधे की खूबियां पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं.

क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Oct 05, 2026,
  • Updated Oct 05, 2026, 1:17 PM IST

देश के कई इलाकों में पशुपालकों के लिए लंपी जैसी बीमारियां चिंता का कारण बनती रही हैं. ऐसी बीमारियों में पशुओं की त्वचा पर बनने वाली गांठों और घावों के कारण पशुओं की देखभाल चुनौतीपूर्ण हो जाती है. इसी बीच पशुओं के स्वास्थ्य से जुड़ा एक पारंपरिक औषधीय पौधा Clerodendrum japonicum चर्चा में है. इस पौधे को पारंपरिक पशु चिकित्सा ज्ञान में सूजन कम करने और घाव भरने जैसी खूबियों के लिए महत्व दिया गया है.

ICAR-Central Island Agricultural Research Institute यानी ICAR-CIARI की ओर से साझा किए गए पोस्टर में Clerodendrum japonicum को एक महत्वपूर्ण Ethno-veterinary Plant बताया गया है. पोस्टर के मुताबिक, पारंपरिक तौर पर इस पौधे को सूजन, घाव और दर्द जैसी समस्याओं में इस्तेमाल किया जाता रहा है.

यह बात पशुपालकों के दृष्टिकोण से इसलिए भी अहम है क्योंकि मवेशियों में त्वचा पर घाव होने की स्थिति में उनकी उचित देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है.

घाव भरने और सूजन कम करने की क्षमता

पोस्टर में Clerodendrum japonicum की प्रमुख Pharmacological Properties में Anti-inflammatory और Wound healing गुण बताए गए हैं. इसके अलावा इसमें दर्द से राहत देने वाली यानी Analgesic और शांत करने वाली Sedative क्षमता भी रिपोर्ट किए जाने की जानकारी दी गई है.

इसकी सबसे महत्वपूर्ण खूबी पशुओं के घाव और सूजन से जुड़ी है. पारंपरिक पशु चिकित्सा में इसका इस्तेमाल सूजन कम करने, घाव भरने और दर्द से राहत के लिए किया जाता रहा है.

हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि पोस्टर में Clerodendrum japonicum को लंपी स्किन डिजीज का इलाज नहीं बताया गया है. इसलिए इसे लंपी का उपचार या बीमारी खत्म करने वाली औषधि कहना उचित नहीं होगा. इसकी अहमियत मुख्य रूप से इसके पारंपरिक घाव भरने और सूजन कम करने वाले उपयोग से जुड़ी है.

पौधे की पत्तियों का होता है प्रमुख इस्तेमाल

Clerodendrum japonicum के अलग-अलग हिस्सों का पारंपरिक तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसकी पत्तियों का प्रमुख रूप से इस्तेमाल होता है. कुछ मामलों में फूल, तना और जड़ भी पारंपरिक उपयोग में शामिल रहे हैं.

पारंपरिक पशु चिकित्सा में इसे हर्बल फॉर्मूलेशन या पौधे से तैयार अर्क अथवा रस के रूप में इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख है. लेकिन पशुओं पर किसी भी औषधीय पौधे का इस्तेमाल पशु चिकित्सक की सलाह पर करना ज्यादा सुरक्षित है, खास तौर पर उस स्थिति में जब पशु गंभीर बीमारी या संक्रमण से पीड़ित हो.

कहां पाया जाता है Clerodendrum japonicum?

पोस्टर के मुताबिक यह पौधा भारत के अंडमान द्वीप और असम सहित दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों में पाया जाता है. यह पूर्वी हिमालय के क्षेत्रों में करीब 300 से 1,600 मीटर की ऊंचाई पर भी उगता है.

यह करीब दो मीटर ऊंचाई तक बढ़ने वाली झाड़ी हो सकती है. इसकी पत्तियां गोलाकार या दिल के आकार की होती हैं, जबकि इसके चमकीले लाल रंग के फूल गुच्छों में दिखाई देते हैं. यह पौधा नम जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता है.

पशुपालकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

पशुपालन में पशुओं का स्वास्थ्य सीधे किसान की आमदनी से जुड़ा होता है. ऐसे में स्थानीय रूप से उपलब्ध औषधीय पौधों से जुड़ा प्रमाणित पारंपरिक ज्ञान पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.

Clerodendrum japonicum की अहमियत इसलिए है क्योंकि पारंपरिक ज्ञान में इसे पशुओं के घाव, सूजन और दर्द से राहत देने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. ऐसे पौधों पर वैज्ञानिक अध्ययन और सुरक्षित उपयोग के तरीकों को आगे बढ़ाने से भविष्य में किफायती पशु स्वास्थ्य प्रबंधन के विकल्प विकसित किए जा सकते हैं.

हालांकि पशुपालकों को एक बात जरूर ध्यान में रखना चाहिए कि लंपी स्किन डिजीज एक संक्रामक बीमारी है. Clerodendrum japonicum को लंपी की प्रमाणित दवा या विकल्प मानकर पशु का इलाज नहीं करना चाहिए. संक्रमित पशु के घाव, बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर वेटनरी डॉक्टर से उपचार कराना जरूरी है.

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