
केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह 19 जुलाई को कोलकाता में अमूल बंगाल डेयरी परियोजना के तहत दुनिया के सबसे बड़े दही उत्पादन प्लांट का भूमि पूजन करेंगे. हावड़ा फूड पार्क में करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्लांट पश्चिम बंगाल के डेयरी क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. प्राजेक्ट पूरा होने के बाद यहां हर दिन 30 लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग और 10 लाख किलोग्राम दही और अन्य कल्चर्ड डेयरी उत्पादों का उत्पादन किया जा सकेगा.
इस प्रोजेक्ट से पश्चिम बंगाल के 1.25 लाख से ज्यादा दूध उत्पादक किसानों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है. इनमें 30 हजार से ज्यादा महिलाएं भी शामिल हैं. अमूल के सहकारी नेटवर्क के जरिए अभी राज्य में प्रतिदिन करीब 9 लाख लीटर दूध का कलेक्शन किया जा रहा है. नए प्लांट से किसानों को दूध के लिए बेहतर बाजार, आधुनिक प्रोसेसिंग सुविधाएं और वैल्यू एडिशन का फायदा मिलेगा, जिससे उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.
प्लांट में हर 10 लाख लीटर पैकेज्ड दूध, 2 लाख लीटर यूएचटी दूध, 1 लाख लीटर आइसक्रीम, 20 मीट्रिक टन पनीर, 10 मीट्रिक टन घी और 10 मीट्रिक टन मिठाई बनाने की क्षमता विकसित की जाएगी. इसके अलावा रोजाना करीब 2.5 लाख पैक फ्लेवर्ड मिल्क का भी उत्पादन किया जा सकेगा. इससे बंगाल में डेयरी प्रोसेसिंग का दायरा काफी बढ़ेगा.
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह श्वेत क्रांति 2.0 के तहत पश्चिम बंगाल में बनी 200 से अधिक नई डेयरी सहकारी समितियों में से एक समिति को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सौंपेंगे. इसके साथ ही नई रजिस्टर्ड 11 बहुउद्देशीय ग्रामीण सहकारी समितियों में से एक समिति को भी प्रतिनिधि के रूप में प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य सहकारिता के जरिए डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाना है.
अमित शाह सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय के कम्प्यूटरीकरण के तहत विकसित e-RCS पोर्टल का शुभारंभ भी करेंगे. यह पोर्टल सहकारी समितियों के पंजीकरण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाएगा. इसके अलावा 10 जिलों में 14 नए भंडारण गोदामों का शिलान्यास और दो तैयार गोदामों का उद्घाटन भी किया जाएगा.
कार्यक्रम के दौरान भारत टैक्सी और पश्चिम बंगाल सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के बीच मोबिलिटी सेवाओं के विस्तार के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. सरकार का कहना है कि इन पहलों से डेयरी सहकारिता, ग्रामीण भंडारण, डिजिटल प्रशासन और सदस्य आधारित सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा और किसानों और ग्रामीण सहकारी संस्थाओं के लिए नए आर्थिक अवसर तैयार होंगे.