
आंध्र प्रदेश के पालनाडु जिले में शुक्रवार को पब्लिक सेक्टर बैंकों की ओर से आयोजित क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत 1 लाख से अधिक लाभार्थियों को कुल 3,216 करोड़ के लोन बांटे. इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, छोटे कारोबारियों, स्वयं सहायता समूहों, उद्यमियों और अन्य जरूरतमंद वर्गों तक संस्थागत लोन की पहुंच आसान बनाना रहा. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि छोटे कारोबारियों और ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने की सोच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल का हिस्सा रही है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद बैंकों को गांवों तक पहुंचने और खेती, कृषि मजदूरी, मत्स्य पालन, हस्तशिल्प और अन्य आजीविका से जुड़े लोगों को वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया है.
निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार ने रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और छोटे व्यापारियों के लिए कम ब्याज दर पर बिना गारंटी लोन की व्यवस्था शुरू की. इससे पहले ऐसे लोगों को बिचौलियों के जरिए ऊंचे ब्याज पर पैसा लेना पड़ता था.
उन्होंने कहा कि अब बैंक खुद पात्र लोगों तक पहुंचकर लोन उपलब्ध करा रहे हैं और लाभार्थियों को इस वित्तीय मदद का इस्तेमाल अपने कारोबार को बढ़ाने में करना चाहिए. उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगे भी बैंक उनका सहयोग करते रहेंगे.
वित्त मंत्री ने कहा कि पहले बैंकों की स्थिति नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) के कारण कमजोर हो गई थी. उन्होने आरोप लगाया कि पहले की सरकार के समय कुछ चुनिंदा लोगों को दबाव में लाेन दिए गए, जिनमें से कई बाद में एनपीए बन गए. उन्होंने कहा कि लोगों को पुराने दौर और वर्तमान व्यवस्था के बीच अंतर समझना चाहिए.
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि सरकार का लक्ष्य कल्याणकारी योजनाओं के साथ विकास को भी आगे बढ़ाना है, ताकि लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके. उन्होंने कहा कि पहले लोगों को लोन लेने के लिए बैंकों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जबकि अब बैंक खुद लाभार्थियों तक पहुंचकर कर्ज उपलब्ध करा रहे हैं.
मुख्यमंत्री ने बताया कि वितरित किए गए कुल लोन में से ₹2,363 करोड़ कृषि क्षेत्र के लिए मंजूर किए गए. इसके अलावा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को ₹325 करोड़ और आवास, शिक्षा, वाहन और सौर ऊर्जा से जुड़े उद्देश्यों के लिए ₹624 करोड़ के लोन मंजूर किए गए. उन्होंने कहा कि संस्थागत लोन किसानों, युवाओं, महिलाओं और उद्यमियों के लिए आर्थिक मजबूती का आधार बनता है और इससे साहूकारों के ऊंचे ब्याज वाले कर्ज से भी राहत मिलती है. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने बैंकिंग क्षेत्र में एनपीए की समस्या से सख्ती से निपटा और डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा दिया.
उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी दरों के तार्किक पुनर्गठन से सरकार के राजस्व में वृद्धि हुई है. केंद्र सरकार ने अमरावती, पोलावरम परियोजना और विशाखापट्टनम स्टील प्लांट के लिए वित्तीय सहायता देकर राज्य को आर्थिक चुनौतियों से उबरने में मदद की है. उन्होंने बताया कि वीबी-जी राम पहल के तहत राज्य को 7,707 करोड़ रुपये मिलेंगे, जबकि रायलसीमा को बागवानी हब के रूप में विकसित करने के लिए 40,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा.
नायडू ने कहा कि आंध्र प्रदेश के 10 लाख डीडब्ल्यूसीआरए (DWCRA) स्वयं सहायता समूहों ने अब तक 29,000 करोड़ रुपये की बचत की है और उनके लोन चुकाने की दर 99.5 प्रतिशत रही है. उन्होंने महिलाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए "वन फैमिली, वन एंटरप्रेन्योर" पहल का भी जिक्र किया और वर्ष 2047 तक आंध्र प्रदेश को समृद्ध, स्वस्थ और खुशहाल राज्य बनाने का लक्ष्य दोहराया.
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बैंक की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहल के तहत उपलब्ध कराई गई एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाई. इसके अलावा छात्राओं को साइकिल भी बांटी गई. कार्यक्रम से पहले निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री के आवास पर उनसे मुलाकात की, जहां उनका स्वागत राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश ने भी किया. (पीटीआई)