सिर्फ फल नहीं, कमाई का खजाना है नारियल! जानिए क्यों खास है World Coconut Day

सिर्फ फल नहीं, कमाई का खजाना है नारियल! जानिए क्यों खास है World Coconut Day

विश्व नारियल दिवस हर साल 2 सितंबर को मनाया जाता है. नारियल सिर्फ स्वाद और सेहत के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों की कमाई और ग्रामीण रोजगार का भी बड़ा जरिया है. इसके पानी, गूदे, तेल, छिलके, रेशे और कोकोपीट का अलग-अलग काम होता है. जानिए नारियल की खेती, उपयोग, फायदे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसके महत्व की पूरी कहानी.

विश्व नारियल दिवस: एक नारियल, कई फायदेविश्व नारियल दिवस: एक नारियल, कई फायदे
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Sep 02, 2026,
  • Updated Sep 02, 2026, 5:20 PM IST

हर साल 2 सितंबर को विश्व नारियल दिवस मनाया जाता है. यह दिन नारियल के महत्व को समझाने और इसके उत्पादन से जुड़े किसानों व ग्रामीण परिवारों को पहचान देने के लिए मनाया जाता है. नारियल स्वादिष्ट होने के साथ-साथ कई पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है. भारत के साथ एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों में नारियल की खेती बड़े स्तर पर होती है. विश्व नारियल दिवस 2026 की थीम है- “अनिश्चितता के समय में नारियल: भोजन, ऊर्जा और आजीविका की सुरक्षा”. यह थीम बताती है कि बदलते समय में नारियल भोजन, रोजगार और किसानों की आय के लिए कितना जरूरी है.

कब हुई विश्व नारियल दिवस की शुरुआत?

विश्व नारियल दिवस पहली बार 2 सितंबर 2009 को मनाया गया था. यह दिवस एशियाई और प्रशांत नारियल समुदाय से जुड़ा है, जिसे अब अंतर्राष्ट्रीय नारियल समुदाय के नाम से जाना जाता है. 2 सितंबर को ही इस संगठन की स्थापना हुई थी, इसलिए इसी दिन विश्व नारियल दिवस मनाया जाता है. इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को नारियल के महत्व के बारे में बताना है. साथ ही नारियल की खेती, शोध, नई तकनीक और इससे जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देना भी इसका एक उद्देश्य है.

लाखों किसानों की कमाई का जरिया है नारियल

नारियल को सिर्फ एक फल समझना सही नहीं होगा. यह लाखों किसानों और ग्रामीण परिवारों की कमाई का एक महत्वपूर्ण साधन है. नारियल के पेड़ की खास बात यह है कि इसका लगभग हर हिस्सा किसी न किसी काम आता है. किसान नारियल बेचकर कमाई करते हैं. इसके अलावा नारियल पानी, तेल, दूध, कोयर और कोकोपीट जैसे उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं. इससे किसानों को एक ही फसल से कमाई के कई रास्ते मिलते हैं.

नारियल पानी से लेकर तेल तक, हर हिस्सा उपयोगी

नारियल पानी गर्मी में पसंद किया जाने वाला पेय है. यह शरीर को तरोताजा महसूस कराने में मदद करता है. नारियल के अंदर मिलने वाले सफेद गूदे से नारियल का दूध और तेल बनाया जाता है. नारियल तेल का इस्तेमाल खाना बनाने के अलावा साबुन, क्रीम, सौंदर्य उत्पाद और बालों की देखभाल से जुड़े सामान में भी किया जाता है. नारियल का गूदा कई तरह की मिठाइयों और पारंपरिक पकवानों में भी इस्तेमाल होता है.

छिलका और रेशा भी नहीं होता बेकार

नारियल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके छिलके और रेशे भी काम आते हैं. नारियल के रेशे को कोयर कहा जाता है. इससे रस्सियां, चटाइयां, जाल, ब्रश और दरवाजे के पायदान जैसी चीजें बनाई जाती हैं. नारियल के छिलके से बोर्ड भी तैयार किए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल फर्नीचर और कुछ दूसरे उत्पाद बनाने में होता है.

खेती में भी काम आता है नारियल का भूसा

नारियल से निकलने वाला भूसा यानी कोकोपीट आज की खेती में भी काफी उपयोगी है. इसका इस्तेमाल पौधे उगाने के लिए किया जाता है. हाइड्रोपोनिक खेती में भी कोकोपीट का उपयोग होता है. इसके अलावा ऑर्किड और मशरूम जैसी फसलों की खेती में भी यह काम आता है. यानी नारियल से मिलने वाला पदार्थ खेती को आसान बनाने में भी मदद करता है.

नारियल के खोल से पानी साफ करने में मदद

नारियल का कठोर खोल भी बेकार नहीं जाता. इससे एक्टिवेटेड कार्बन तैयार किया जाता है. इसका इस्तेमाल पानी साफ करने वाले फिल्टर में किया जाता है. इस तरह नारियल के फल से निकलने वाली कई चीजें अलग-अलग उद्योगों में काम आती हैं और किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया बनती हैं.

सेहत के लिए भी उपयोगी है नारियल

नारियल में फाइबर के साथ विटामिन और कई खनिज पाए जाते हैं. इसमें विटामिन सी, विटामिन ई और बी समूह के कुछ विटामिन के साथ आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और जिंक जैसे खनिज भी पाए जाते हैं. नारियल पानी एक लोकप्रिय पेय है, जबकि नारियल का गूदा और दूध खाने-पीने की कई चीजों में इस्तेमाल होता है. हालांकि, नारियल से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ व्यक्ति की जरूरत और पूरे आहार पर निर्भर करते हैं.

दुनिया के करीब 80 देशों में होती है खेती

नारियल की खेती दुनिया के लगभग 80 देशों में की जाती है. इसकी करीब 150 किस्मों का जिक्र मिलता है. अलग-अलग जगहों की जलवायु के अनुसार नारियल की अलग-अलग किस्में उगाई जाती हैं. इनमें मलेशियन येलो ड्वार्फ, फिजी ड्वार्फ, किंग कोकोनट, वेस्ट कोस्ट टॉल, ईस्ट कोस्ट टॉल, पनामा टॉल, ड्वार्फ ऑरेंज और ग्रीन ड्वार्फ जैसी किस्में शामिल हैं. भारत के अलावा इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देश भी नारियल उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

नारियल का पेड़ भी है बेहद खास

नारियल का पेड़ कई दशकों तक फल दे सकता है. अच्छी जलवायु और सही देखभाल मिलने पर एक पेड़ से हर साल काफी संख्या में नारियल मिल सकते हैं. यही वजह है कि कई क्षेत्रों में नारियल के पेड़ किसानों के लिए लंबे समय तक कमाई का साधन बने रहते हैं.

‘कोकोनट’ नाम के पीछे भी है रोचक कहानी

नारियल के नाम से जुड़ी एक दिलचस्प बात भी बताई जाती है. ‘कोकोनट’ शब्द को पुर्तगाली शब्द ‘कोको’ से जोड़ा जाता है. इसका अर्थ चेहरा बताया जाता है. नारियल के खोल पर बने तीन छोटे छेद कई बार चेहरे जैसी आकृति दिखाई देते हैं. इसी वजह से इसके नाम को इस शब्द से जोड़कर देखा जाता है.

युद्ध के समय नारियल पानी का हुआ था इस्तेमाल

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कुछ आपात परिस्थितियों में नारियल पानी का इस्तेमाल शरीर में तरल की कमी पूरी करने के लिए किया गया था. हालांकि, आज के समय में नारियल पानी को अस्पतालों में दिए जाने वाले नियमित अंतःशिरा यानी IV उपचार का विकल्प नहीं माना जाता है. वनस्पति विज्ञान की नजर से भी नारियल को केवल ‘सूखा मेवा’ कहना सही नहीं है. इसे एक प्रकार का फाइब्रोस ड्रूप माना जाता है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है नारियल

नारियल की खेती किसानों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है. इससे फल, नारियल पानी, तेल, कोयर, कोकोपीट और दूसरे उत्पादों के जरिए कमाई के कई रास्ते बनते हैं. नारियल से जुड़े उद्योगों में लोगों को रोजगार भी मिलता है. इसके अलावा नारियल से बने उत्पादों का देश-विदेश में कारोबार होता है.

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