आंध्र में वेलिगोंडा इरिगेशन प्रोजेक्‍ट का पहला फेज शुरू, 1.19 लाख एकड़ क्षेत्र में होगी सिंचाई

आंध्र में वेलिगोंडा इरिगेशन प्रोजेक्‍ट का पहला फेज शुरू, 1.19 लाख एकड़ क्षेत्र में होगी सिंचाई

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने वेलिगोंडा सिंचाई परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन कर कृष्णा नदी का पानी नल्लामाला सागर में छोड़ा. पहले चरण से 1.19 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई और करीब 4 लाख लोगों को पेयजल का लाभ मिलेगा.

veligonda irrigation project phase 1 launchedveligonda irrigation project phase 1 launched
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Sep 01, 2026,
  • Updated Sep 01, 2026, 9:08 AM IST

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को वेलिगोंडा सिंचाई परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन किया और कृष्णा नदी का पानी नल्लामाला सागर में छोड़ा. इस परियोजना का उद्देश्य कम बारिश, घटते भूजल स्तर, फ्लोराइड प्रदूषण और सिंचाई के लिए पानी की कमी से जूझ रहे मार्कापुरम, प्रकाशम, नेल्लोर और कडप्पा क्षेत्रों को राहत देना है. योजना के तहत श्रीशैलम जलाशय से कृष्णा नदी का पानी गुरुत्वाकर्षण के जरिए नल्लामाला सागर तक पहुंचाया जाएगा.

यहां पानी का भंडारण करने के बाद मुख्य नहरों के माध्यम से इसे खेती और पेयजल की जरूरतों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. पहले चरण के शुरू होने के साथ नल्लामाला सागर में 10.70 टीएमसी कृष्णा जल पहुंचाया जाएगा. इससे 1.19 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी, जबकि करीब चार लाख लोगों को पेयजल का लाभ मिलने की बात कही गई है.

प्रोजेक्‍ट पूरा होने पर 4.47 लाख एकड़ में होगी सिंचाई

मुख्यमंत्री नायडू के अनुसार, पूरी वेलिगोंडा परियोजना शुरू होने के बाद 30 मंडलों में 4.47 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा. इसके अलावा करीब 23 लाख लोगों को पेयजल सुविधा मिलने की उम्मीद है, जिसमें फ्लोराइड प्रभावित इलाके भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि सिंचाई के दायरे में पुराने प्रकाशम जिले की 3.36 लाख एकड़ भूमि, नेल्लोर की 84 हजार एकड़ और कडप्पा की 27 हजार एकड़ भूमि शामिल होगी.

परियोजना पर 10,200 करोड़ रुपये हुए खर्च

नायडू ने बताया कि वेलिगोंडा परियोजना की कुल अनुमानित लागत 10,200 करोड़ रुपये है. पहले चरण को 7,983 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया है. इस चरण के तहत 18.8 किलोमीटर लंबे दो सुरंगों और 21.8 किलोमीटर लंबी फीडर नहरों का निर्माण पूरा किया गया है. मुख्यमंत्री ने इसे एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि बताते हुए कहा कि सूखा प्रभावित भूमि तक पानी पहुंचाने के लिए पहाड़ियों को काटकर सुरंगें बनाई गईं.

मुख्यमंत्री के मुताबिक, 2024 में सत्ता संभालने के बाद एनडीए गठबंधन सरकार ने परियोजना के काम में तेजी लाई. सरकार ने पिछले दो वर्षों में वेलिगोंडा परियोजना पर 2,400 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया है. उन्होंने कहा कि परियोजना को पूरा करना सरकार की प्रतिबद्धता का हिस्सा था और अब कृष्णा नदी का पानी सूखा प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने लगा है.

विस्थापित परिवारों को मिला 768 करोड़ मुआवजा

नायडू ने कहा कि परियोजना से प्रभावित 6,206 विस्थापित परिवारों को 48 दिनों के भीतर 768 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि परियोजना से लाभ पाने वाले लोगों के साथ-साथ विस्थापित परिवार भी संतुष्ट और खुश रहें. मुख्यमंत्री ने बताया कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद कुछ छूटे हुए लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त 169 करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई है. कट-ऑफ तारीख बढ़ाकर 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं को भी दो-दो लाख रुपये देने का फैसला किया गया है.

फ्लोराइड की समस्या से राहत की उम्मीद

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृष्णा नदी का पानी क्षेत्र में पहुंचने के बाद पश्चिमी प्रकाशम में फ्लोराइड से जुड़ी परेशानियों से राहत मिलने की उम्मीद है. उन्होंने इस परियोजना को सूखे और पानी की कमी के खिलाफ लंबे संघर्ष का परिणाम बताया. सीएम नायडू ने कहा कि वेलिगोंडा परियोजना केवल सिंचाई ढांचा नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य और सूखा प्रभावित क्षेत्रों के विकास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल है.

फसल विविधीकरण को मिलेगा सहारा

परियोजना से सिंचाई सुविधा बढ़ने के साथ फसल विविधीकरण, बागवानी और कृषि प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं, भूजल पर निर्भरता कम हो सकती है और रोजगार की तलाश में होने वाले पलायन पर भी असर पड़ सकता है.

नायडू ने पहले चरण को राष्ट्र को समर्पित करने के बाद कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के विकास को नई दिशा देगी. उन्होंने कहा कि सरकार ने अपना वादा पूरा करते हुए कृष्णा नदी का पानी क्षेत्र तक पहुंचाया है और अब आगे संपदा सृजन के अवसर विकसित किए जाएंगे.

तीन दशकों के संघर्ष का परिणाम है परियोजना

मुख्यमंत्री ने सूखे, फ्लोराइड प्रदूषण और पानी की कमी से लंबे समय तक जूझते रहे किसानों का जिक्र करते हुए कहा कि कृष्णा नदी का पानी पहुंचना उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया है. उन्होंने वेलिगोंडा परियोजना को सूखे को हराने के संकल्प, करीब तीन दशकों के संघर्ष और किसानों के भविष्य में विश्वास का प्रतीक बताया. नायडू ने इसे "भागीरथ प्रयास" करार देते हुए कहा कि पहाड़ियों के बीच सुरंग बनाकर कृष्णा नदी का पानी सूखा प्रभावित जमीन तक पहुंचाया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना से टीगलाइरू नहर के तहत 62 हजार एकड़, गोत्तीपाडिया नहर के तहत 9,500 एकड़ और ईस्टर्न मेन कैनाल के तहत 3.70 लाख एकड़ के आयाकट को स्थिरता मिलेगी. (पीटीआई)

MORE NEWS

Read more!