
केंद्र सरकार ने किसानों और खेती को मजबूत बनाने के लिए पांच राज्यों को बड़ी वित्तीय मदद दी है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और त्रिपुरा के लिए कुल 1,283.11 करोड़ रुपये की दूसरी मदर सैंक्शन को मंजूरी दी है. यह राशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) और कृषोन्नति योजना (KY) के तहत दी गई है. सरकार का कहना है कि इस फंड से किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और खेती में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पांच राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. इस बैठक में राज्यों में चल रही कृषि योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई. साथ ही यह भी देखा गया कि केंद्र से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल किसानों के हित में किस तरह किया जा रहा है. बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. किसान आगे बढ़ेंगे तो देश भी आगे बढ़ेगा. केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ‘टीम इंडिया’ की तरह काम कर रही हैं, ताकि किसानों तक पानी, अच्छे बीज, कृषि मशीनें और डिजिटल सुविधाएं पहुंचाई जा सकें.
उन्होंने राज्यों में कृषि योजनाओं के बेहतर कामकाज की सराहना की और कहा कि किसानों के हित में पैसों और संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी. उन्होंने राज्यों से यह भी कहा कि मंजूर की गई राशि का इस्तेमाल तेजी से किया जाए, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके.
पांच राज्यों में सबसे ज्यादा राशि आंध्र प्रदेश को दी गई है. राज्य के लिए कुल 409.40 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. इसमें PM-RKVY के तहत 296.09 करोड़ रुपये और कृषोन्नति योजना के तहत 113.31 करोड़ रुपये शामिल हैं. बैठक में आंध्र प्रदेश के कृषि मंत्री किंजरापु अच्चेन्नायडू भी शामिल हुए. केंद्रीय मंत्री ने राज्य में ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ योजना और कृषि यंत्रीकरण के क्षेत्र में किए जा रहे काम की सराहना की. सूक्ष्म सिंचाई से कम पानी में ज्यादा फसल लेने में किसानों को मदद मिल सकती है.
तमिलनाडु को कुल 355.88 करोड़ रुपये दिए गए हैं. इसमें PM-RKVY से 251.79 करोड़ रुपये और कृषोन्नति योजना से 104.09 करोड़ रुपये शामिल हैं. बैठक में तमिलनाडु के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री आर. विनोथ शामिल हुए. राज्य में सूक्ष्म सिंचाई और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे कामों पर चर्चा हुई. इससे किसानों को पानी बचाने के साथ-साथ खेती में नई फसलों को अपनाने का मौका मिलेगा.
ओडिशा को कुल 219.65 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है. इसमें PM-RKVY के तहत 117.94 करोड़ रुपये और कृषोन्नति योजना के तहत 101.71 करोड़ रुपये दिए गए हैं. ओडिशा के उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने बैठक में हिस्सा लिया. राज्य में कृषि मशीनों के इस्तेमाल और किसानों तक कृषि से जुड़ी जानकारी पहुंचाने के लिए किए जा रहे कामों की समीक्षा की गई. सरकार का मानना है कि आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से किसानों का समय और मेहनत दोनों बच सकते हैं.
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड को कुल 106.67 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. इसमें PM-RKVY के तहत 65.78 करोड़ रुपये और कृषोन्नति योजना के तहत 40.89 करोड़ रुपये शामिल हैं. यह राशि कृषि ढांचे को मजबूत करने, प्राकृतिक खेती और बागवानी को बढ़ावा देने में इस्तेमाल की जाएगी. बैठक में उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने राज्य में चल रहे कृषि कार्यक्रमों की जानकारी दी. राज्य में परंपरागत कृषि विकास योजना और बागवानी से जुड़े कामों में हुई प्रगति पर भी चर्चा हुई.
पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा के लिए कुल 91.51 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. इसमें PM-RKVY से 36.51 करोड़ रुपये और कृषोन्नति योजना से 55 करोड़ रुपये दिए गए हैं. इस राशि से राज्य में बांस मिशन, ऑयल पाम और कृषि यंत्रीकरण जैसे क्षेत्रों को मजबूत करने में मदद मिलेगी. इससे किसानों को खेती के नए तरीकों और आधुनिक कृषि उपकरणों का लाभ मिलने की उम्मीद है.
केंद्र से मिली इस राशि का असर कई तरह से किसानों तक पहुंच सकता है. सूक्ष्म सिंचाई के जरिए खेतों में पानी की बचत होगी और कम पानी में बेहतर उत्पादन लेने में मदद मिलेगी. वहीं कृषि यंत्रीकरण के तहत छोटे किसानों को आधुनिक कृषि मशीनें खरीदने के लिए सहायता और सब्सिडी मिल सकती है. इसके अलावा मिट्टी की जांच और डिजिटल कृषि सेवाओं को बढ़ावा दिया जाएगा. इससे किसानों को अपने खेत की मिट्टी और फसल के बारे में बेहतर जानकारी मिल सकेगी. सरकार दलहन, तिलहन और बागवानी जैसी फसलों को बढ़ावा देकर खेती में विविधता लाने पर भी जोर दे रही है. इससे किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय दूसरी लाभ वाली फसलों से कमाई बढ़ाने का अवसर मिल सकता है.
सरकार कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को लगातार बढ़ावा दे रही है. खेती में मशीनों, डिजिटल सेवाओं, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल बढ़ने से किसानों की मेहनत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है. शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से कहा कि केंद्र की ओर से मंजूर की गई राशि को जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जाए. इसका मकसद यही है कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि समय पर किसानों तक पहुंचे.
केंद्र सरकार का कहना है कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना कृषि योजनाओं का मुख्य उद्देश्य है. खेती की लागत कम करना, पानी की बचत करना, आधुनिक मशीनों को बढ़ावा देना और किसानों को नई तकनीक से जोड़ना इसी दिशा में उठाए जा रहे कदम हैं. पांच राज्यों को मिली 1,283.11 करोड़ रुपये की मंजूरी से इन क्षेत्रों में चल रहे कृषि विकास कार्यों को और गति मिलने की उम्मीद है.
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