25 साल पुराना सोन नदी जल विवाद खत्म, बिहार-झारखंड के किसानों के लिए खुला सिंचाई का रास्ता

25 साल पुराना सोन नदी जल विवाद खत्म, बिहार-झारखंड के किसानों के लिए खुला सिंचाई का रास्ता

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बिहार और झारखंड ने सोन नदी के 77 लाख एकड़-फीट पानी के बंटवारे को लेकर ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस फैसले से 25 साल पुराना जल विवाद समाप्त हो गया है. समझौते से दोनों राज्यों के लाखों किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा, साथ ही कई जिलों में पेयजल आपूर्ति भी बेहतर होगी.

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क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Sep 01, 2026,
  • Updated Sep 01, 2026, 11:38 AM IST

सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बिहार और झारखंड ने सोन नदी के 77 लाख एकड़-फीट पानी को साझा करने के लिए एक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए. इससे दोनों राज्यों के बीच लगभग 25 साल पुराना पानी का विवाद "हमेशा के लिए सुलझ" गया है.

इस समझौते पर हस्ताक्षर समारोह में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, बिहार के उपमुख्यमंत्री, केंद्रीय गृह सचिव और केंद्र और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.

शाह ने 'X' पर एक पोस्ट में कहा कि इस समझौते से बिहार और झारखंड की बड़ी आबादी के लिए सिंचाई और पीने के पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी.

उन्होंने कहा, "इससे दोनों राज्यों के लाखों किसानों को सीधा फायदा होगा और ग्रामीण इलाकों के विकास को नई गति मिलेगी. अगर सभी राज्य एक टीम के तौर पर आगे बढ़ें, तो ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसे हल न किया जा सके."

समारोह में बोलते हुए शाह ने कहा कि लगभग 25 साल पुराने पानी के विवाद को सुलझाने का यह समझौता इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे सहकारी संघवाद की भावना के साथ बातचीत के जरिए किसी भी समस्या का समाधान किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि इस समझौते से दोनों राज्यों में बड़े भौगोलिक क्षेत्रों, किसानों, ग्रामीण इलाकों और पीने के पानी की आपूर्ति से जुड़े मुद्दों का "स्थायी समाधान" हो गया है.

क्या है पानी के बंटवारे का मामला?

1973 में, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अविभाजित बिहार के बीच सोन नदी के पानी और मध्य प्रदेश में बाणसागर बांध की लागत को साझा करने के लिए एक समझौता हुआ था.

अधिकारियों ने बताया कि यह विवाद 2000 में तब शुरू हुआ जब बिहार से अलग होकर झारखंड एक नया राज्य बना. झारखंड ने बाणसागर परियोजना से पानी में बड़े हिस्से की मांग की क्योंकि परियोजना के कैचमेंट एरिया (जलग्रहण क्षेत्र) का एक बड़ा हिस्सा राज्य के अंतर्गत आता था, जबकि बिहार ने अपना दावा पेश करने के लिए 1973 के समझौते का हवाला दिया.

शाह ने कहा कि यह समझौता इस साल राज्यों के बीच पानी से जुड़ा चौथा समझौता है और इससे बिहार और झारखंड के बड़े ग्रामीण इलाकों में लाखों किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा, साथ ही लोगों को पीने का पानी भी उपलब्ध होगा.

मंत्री ने इस समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बढ़ावा दिए गए 'टीम भारत' और सहकारी संघवाद का एक "बेहतरीन" उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि राज्यों की अपनी अलग पहचान होती है, और अगर वे राष्ट्रीय संदर्भ में 'टीम भारत' के तौर पर आगे बढ़ें, तो ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसे हल न किया जा सके.

जल समझौते से इन जिलों को होगा फायदा

गृह मंत्री ने कहा कि इस समझौते से बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना जिलों की बड़ी आबादी के लिए पीने और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा.

उन्होंने कहा, "इसके अलावा, झारखंड के पलामू, गढ़वा और अन्य इलाकों में भी सिंचाई और पीने के लिए पानी उपलब्ध होगा."

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सोरेन और चौधरी ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए मोदी और शाह का आभार व्यक्त किया.

बयान में कहा गया, "गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर, अलग-अलग राज्यों के बीच कई दशकों से लंबित पानी के विवादों को अंतर-राज्य परिषद के माध्यम से सुलझाया जा रहा है. इस साल अब तक चार ऐतिहासिक समझौते हुए हैं."

कई राज्यों में नदियों का मामला सुलझा

7 जुलाई को, केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी में 'नर्मदा अवार्ड' के लाभार्थी राज्यों -- महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश -- के बीच बकाया भुगतान के निपटारे को लेकर एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए.

इससे सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण की लागत-साझाकरण को लेकर इन राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों का समाधान हुआ, और बकाया राशि का निपटारा एकमुश्त समझौते के माध्यम से किया गया.

29 जून को, राजस्थान और हरियाणा ने यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे राजस्थान ऊपरी यमुना बेसिन में इस्तेमाल योग्य सतही जल के बंटवारे से संबंधित 1994 के समझौते के तहत उसे आवंटित पानी का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकेगा.

16 जून को शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान लंबे समय से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर भी संबंधित राज्यों के बीच सहमति बनी.

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लागू करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर सहमत हुए.

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