
भारत में खेत हैं, किसान हैं, तिलहन की फसलें हैं और दुनिया की सबसे बड़ी आबादी में शामिल एक बड़ा बाजार भी है. फिर भी जब भारतीय रसोई में तेल का तड़का लगता है तो उसमें बड़ा हिस्सा विदेशी तेल का होता है. सवाल यह नहीं है कि भारत तेल आयात क्यों करता है? बड़ा सवाल यह है कि तिलहन उत्पादन में सक्षम होने के बाद भी भारत आत्मनिर्भर क्यों नहीं बन पाया? क्यों किसान सरसों, सोयाबीन और मूंगफली उगाने के बाद भी बेहतर कमाई नहीं कर पा रहा? क्यों देश को हर साल लाखों टन पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल बाहर से खरीदना पड़ता है? जवाब छिपा है भारत के पूरे तिलहन सिस्टम की कमजोरियों में.
भारत दुनिया के बड़े तिलहन उत्पादक देशों में शामिल है. देश में हर साल करीब 350-400 लाख टन तिलहन उत्पादन होता है.
प्रमुख फसलें:
लेकिन इतनी बड़ी खेती के बावजूद भारत अपनी जरूरत का लगभग 55-57% खाद्य तेल विदेशों से आयात करता है. यानी खेतों में फसल भारत की है, लेकिन रसोई में पहुंचने वाला तेल कई बार इंडोनेशिया, मलेशिया, अर्जेंटीना और ब्राजील से आता है.
भारत में किसान वही फसल ज्यादा उगाता है जिसमें उसे जोखिम कम और आमदनी ज्यादा दिखाई देती है. गेहूं और धान जैसी फसलों को जहां सरकारी खरीद और MSP का मजबूत सहारा मिलता है, वहीं तिलहन किसानों को ऐसी सुरक्षा कम मिलती है. यानी इसमें किसानों को अधिक खतरा रहता है जिस वजह से वो इससे पीछे भागते हैं.
नतीजा:
लेकिन भारत में:
आज भी बड़ी चुनौती है.
यही वजह है कि किसान को अपनी फसल का पूरा फायदा नहीं मिलता और देश को तैयार तेल आयात करना पड़ता है.
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल या सोयाबीन तेल सस्ता होता है तो भारत में आयात बढ़ जाता है. इसका सीधा असर घरेलू किसानों पर पड़ता है. अगर बाजार में सस्ता विदेशी तेल उपलब्ध है तो मिलर्स और कंपनियां घरेलू तिलहन खरीदने में कम रुचि दिखाती हैं ना की किसानों से महंगा तेल खरीदते हैं.
नतीजा:
विदेशी किसान और विदेशी तेल कंपनियां मजबूत होती हैं, लेकिन भारतीय किसान को अपनी फसल का सही मूल्य नहीं मिलता.
भारत की खाद्य तेल निर्भरता
| साल | आयात निर्भरता |
| 2014-15 | करीब 60% |
| 2016-17 | करीब 55% |
| 2018-19 | करीब 55% |
| 2020-21 | करीब 65% |
| 2022-23 | करीब 57% |
| 2023-24 | करीब 55-57% |
यानी एक दशक बाद भी भारत अपनी आधी से ज्यादा जरूरत के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है.
भारत का खाद्य तेल आयात मुख्य रूप से इन देशों से आता है:
| देश | तेल |
| इंडोनेशिया | पाम ऑयल |
| मलेशिया | पाम ऑयल |
| अर्जेंटीना | सोयाबीन तेल |
| ब्राजील | सोयाबीन तेल |
| रूस/यूक्रेन | सूरजमुखी तेल |
भारत की समस्या उत्पादन की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की है.
किसान के पास क्या है:
लेकिन कमी क्या है:
भारत में तिलहन उगाने वाले किसान मौजूद हैं, बाजार मौजूद है और मांग भी लगातार बढ़ रही है. लेकिन उत्पादन, प्रोसेसिंग और बेहतर कीमत की कमी के कारण भारत अभी भी विदेशी तेल पर निर्भर है. जरूरत है कि देश सिर्फ तिलहन उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार, आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट और स्थिर कीमतें भी मिले.
क्योंकि जब तक खेत से लेकर बाजार तक पूरी व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक "खेत भारत के और मुनाफा विदेशों का" वाली तस्वीर बदलना मुश्किल रहेगा.
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