
सर्दियों का मौसम आने से पहले ही प्रदूषण को लेकर केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है. दरअसल, सर्दियों में दिल्ली-NCR की हवा को प्रदूषण से बचाने के लिए केंद्र सरकार पराली जलाने पर और सख्ती करने की तैयारी कर रही है. इसके तहत दिल्ली-NCR दिल्ली-NCR क्षेत्र (जिसमें पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश शामिल हैं) में पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए नए नियम प्रस्तावित किए गए हैं. इन नियमों में पराली जलाने वाली जमीन को कुछ समय के लिए ‘रेड कैटेगरी’ में रखने को कहा गया है.
प्रस्तावित नियमों के तहत अगर किसी खेत में पराली जलाने की घटना सामने आती है और किसान को इसके लिए जिम्मेदार पाया जाता है, तो जमीन को 15 महीने के लिए ‘रेड कैटेगरी’ में रखा जा सकता है. इसका मतलब यह होगा कि उस जमीन की पहचान राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े लेन-देन के दौरान की जा सकेगी.
ड्राफ्ट नियमों में कहा गया है कि जिस जमीन से पराली जलाने की घटना जुड़ी होगी, उसे 15 महीने के लिए ‘रेड कैटेगरी’ में रखा जा सकता है. हालांकि, ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ‘रेड कैटेगरी’ में जाने के बाद जमीन पर कौन-कौन से प्रतिबंध लागू होंगे. सूत्रों के मुताबिक, ऐसी जमीन को कुछ सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी हो सकती है. हालांकि, इस बारे में अंतिम नियम आने के बाद ही स्थिति साफ होगी.
पराली जलाने के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले किसानों पर उनकी खेती की जमीन के आकार के आधार पर पर्यावरण जुर्माना लगाया जाएगा. प्रस्तावित नियमों में जुर्माने की दरें वही रखी गई हैं, जो 2024 में किए गए संशोधन के बाद लागू हुई थीं, जिसमें 2 एकड़ से कम जमीन पर 5,000 रुपये, 2 से 5 एकड़ जमीन पर 10,000 रुपये और 5 एकड़ से ज्यादा जमीन पर 30,000 रुपये का जुर्माना लगेगा. यानी जमीन का आकार जितना बड़ा होगा, पराली जलाने पर जुर्माने की राशि भी उतनी ही ज्यादा होगी.
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, अगर ‘रेड कैटेगरी’ वाली जमीन के मामले में लगाया गया जुर्माना 30 दिनों के भीतर जमा नहीं किया जाता है, तो इसकी वसूली जमीन के राजस्व बकाये के तौर पर की जा सकती है. साथ ही अगर एक ही जमीन के टुकड़े से बार-बार पराली जलाने की घटनाएं जुड़ती हैं, तो उस जमीन की ‘रेड कैटेगरी’ की अवधि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है. प्रस्तावित नियमों में इसे अगले 15 महीने तक बढ़ाने का प्रावधान है. इस तरह बार-बार पराली जलाने वाली जमीन लंबे समय तक ‘रेड कैटेगरी’ में रह सकती है. हालांकि, इसके सटीक प्रशासनिक और सरकारी योजना से जुड़े असर अंतिम नियमों में स्पष्ट होंगी.
पराली जलाने पर लगाए गए जुर्माने से मिलने वाली राशि संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या प्रदूषण नियंत्रण समिति को दी जाएगी. इस पैसे का इस्तेमाल कई कामों में किया जा सकता है. इसमें पराली प्रबंधन की मशीनरी, फसल विविधीकरण, बायोमास का भंडारण और इस्तेमाल, रिसर्च और किसानों को जागरूक करने जैसे काम शामिल हैं.
प्रस्तावित नियमों को 2026 में लागू करने की तैयारी है. ये नियम मौजूदा 2023 के पर्यावरण मुआवजा नियमों और 2024 में किए गए संशोधनों की जगह ले सकते हैं. सरकार ने 8 सितंबर को ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर इस पर संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. इसके लिए 60 दिनों का समय दिया गया है. सुझाव मिलने के बाद नियमों में बदलाव किया जा सकता है और अंतिम अधिसूचना जारी होने पर ही इनके लागू होने की स्थिति स्पष्ट होगी.