
पश्चिमी मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल इलाकों में बारिश की कमी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. खेतों में खड़ी खरीफ फसलों को नुकसान हुआ है और आने वाली रबी फसल के लिए भी पानी की कमी का डर बना हुआ है. ऐसे में अलीराजपुर और झाबुआ जैसे जिलों से रोजगार की तलाश में गुजरात और दूसरे राज्यों की ओर लोगों का पलायन बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. स्थानीय जानकारों का कहना है कि दिवाली के बाद बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार काम की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख कर सकते हैं.
इस साल बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर अलीराजपुर जिले में देखने को मिला है. 1 जून से 30 सितंबर के बीच मानसून के दौरान जिले में सामान्य से 51 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. यह मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश की कमी वाला जिला रहा. वहीं, झाबुआ में भी सामान्य से 35 फीसदी कम बारिश हुई है. दोनों जिलों में बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है. यहां खेती का बड़ा हिस्सा बारिश के पानी पर निर्भर रहता है. ऐसे में कम बारिश का सीधा असर किसानों की फसल और उनकी कमाई पर पड़ा है.
रोजगार के लिए होने वाला पलायन अलीराजपुर और झाबुआ में पहले से ही एक बड़ी समस्या है. स्थानीय रोजगार पलायन विशेषज्ञ वीरेंद्र सिंह राठौर के मुताबिक, बारिश की कमी के कारण आदिवासी परिवार बेहतर रोजगार और कमाई की तलाश में दूसरे राज्यों में जा रहे हैं. उनका कहना है कि दिवाली के बाद यह पलायन और बढ़ सकता है. गुजरात इन जिलों के लोगों के लिए रोजगार का एक बड़ा केंद्र रहा है. इसके अलावा दूसरे राज्यों में भी लोग मजदूरी और अन्य काम की तलाश में जाते हैं. खेती से पर्याप्त कमाई नहीं होने पर परिवारों के सामने रोजगार के लिए बाहर जाने का विकल्प बचता है.
बारिश की कमी का असर सिर्फ खरीफ फसल तक सीमित नहीं है. अब किसानों को गेहूं और चने की रबी फसल के लिए भी पानी की चिंता सताने लगी है. स्थानीय जानकारों के मुताबिक, जिले के बांध भी पूरी तरह नहीं भरे हैं और उनमें करीब आधा ही पानी है. ऐसे में किसानों को डर है कि अगर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिला तो रबी की बुवाई का क्षेत्र भी कम हो सकता है. किसान मांग कर रहे हैं कि नर्मदा नदी का पानी पाइपलाइन के जरिए खेतों तक पहुंचाया जाए, ताकि रबी फसलों को बचाया जा सके.
संयुक्त किसान मोर्चा के इंदौर संभाग के संयोजक रामस्वरूप मंत्री ने भी बारिश की कमी के कारण पलायन बढ़ने की आशंका जताई है. उन्होंने कहा कि अलीराजपुर और झाबुआ में ज्यादातर खेती बारिश पर निर्भर है. ऐसे में उनका अनुमान है कि दोनों जिलों की 60 से 70 फीसदी आदिवासी आबादी रोजगार की तलाश में गुजरात और दूसरे राज्यों की ओर जा सकती है. मंत्री ने दोनों जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर किसानों को समय पर मदद नहीं मिली तो खेती के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ेगा.
अलीराजपुर को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग के बीच जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी है. जिला मजिस्ट्रेट नीतू माथुर ने बताया कि बारिश की कमी से जुड़ी जानकारी अलग-अलग विभागों से मांगी गई है. रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद आगे उचित कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी बताया कि जिले में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G के तहत पहले से कई काम चल रहे हैं. इच्छुक लोग इन परियोजनाओं में मजदूर के तौर पर काम कर सकते हैं. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने की संभावना बनी हुई है.
अलीराजपुर के किसान कमरू अजनार ने बताया कि उन्होंने खरीफ फसल की बुवाई के लिए महंगे खाद, बीज और कीटनाशक खरीदे थे. लेकिन बारिश की भारी कमी के कारण फसल बर्बाद होने की स्थिति में है. उनका कहना है कि इस बार उन्हें 10 फीसदी पैदावार मिलने की भी उम्मीद नहीं है. कमरू अजनार ने सरकार से किसानों को राहत देने की मांग की है. उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने खरीफ की बुवाई के लिए बैंक और सहकारी समितियों से कर्ज लिया है, उनसे अगले साल तक कर्ज की वसूली नहीं की जाए. इससे फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को कुछ राहत मिल सकती है.
अलीराजपुर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रमुख डॉ. आरके यादव ने बताया कि बारिश की कमी से जिले में कई फसलों की पैदावार में बड़ी गिरावट आई है. सोयाबीन, मक्का, उड़द, कपास और मूंगफली जैसी फसलों पर इसका असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि बारिश की कमी का असर आने वाली रबी फसल पर भी पड़ सकता है. पानी की उपलब्धता कम रहने की वजह से इस बार रबी सीजन में खेती का रकबा घटने की संभावना है.
अलीराजपुर और झाबुआ में कम बारिश ने किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है. एक तरफ खरीफ फसलों की पैदावार घटने से किसानों की आय प्रभावित हुई है, वहीं दूसरी तरफ रबी फसल के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है. ऐसे में ग्रामीण परिवारों के सामने रोजगार और आमदनी का संकट बढ़ सकता है. अगर स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार और खेती के लिए पानी की व्यवस्था नहीं हुई, तो दिवाली के बाद इन आदिवासी बहुल जिलों से गुजरात और दूसरे राज्यों की ओर मजदूरों का पलायन बढ़ सकता है. फिलहाल किसानों और स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की रिपोर्ट और सरकार की ओर से मिलने वाली राहत पर है. (PTI)
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