
उत्तराखंड की प्रसिद्ध ताजा लीची ने अब यूरोपीय बाजार में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है. कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने 18 जून 2026 को देहरादून से इटली के लिए पहली बार ताजा लीची के निर्यात में मदद की. इस पहल को उत्तराखंड के बागवानी क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. इससे भारतीय फलों की वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता और निर्यात क्षमता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.
इटली भेजी गई पहली खेप में एक मीट्रिक टन ताजा लीची शामिल रही. यह निर्यात केवल एक व्यापारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्तराखंड के किसानों और बागवानी उत्पादकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच का नया रास्ता भी माना जा रहा है. इसके जरिए भारतीय ताजे फलों की पहचान यूरोप के उपभोक्ताओं तक और मजबूत होगी. साथ ही हिमालयी क्षेत्र के उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों को नई पहचान मिलने की संभावना है.
देहरादून की लीची लंबे समय से अपने स्वाद और गुणवत्ता के लिए जानी जाती है. इसकी प्राकृतिक मिठास, आकर्षक लाल रंग, सुगंध और बेहतर गूदे की वजह से यह देश और विदेश के बाजारों में पसंद की जाती है. उत्तराखंड में रोज सेंटेड, कलकत्तिया और बेदाना जैसी प्रमुख किस्मों का उत्पादन होता है. देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और उधम सिंह नगर जैसे जिलों की अनुकूल जलवायु और कृषि परिस्थितियां इसकी गुणवत्ता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं.
इस निर्यात पहल का सबसे बड़ा लाभ उत्पादकों को मिलने की संभावना जताई जा रही है. जानकारी के अनुसार, किसानों को घरेलू बाजार की तुलना में करीब 25 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हो रहा है. इससे किसानों में गुणवत्ता आधारित उत्पादन और निर्यात केंद्रित बागवानी अपनाने का उत्साह बढ़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा.
इटली तक लीची पहुंचाने की इस प्रक्रिया में एपीडा के साथ उत्तराखंड सरकार, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों, लॉजिस्टिक्स भागीदारों और अन्य संबंधित संस्थाओं ने मिलकर काम किया. यह पहल दिखाती है कि बेहतर समन्वय और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला के जरिए भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है. एपीडा आगे भी बाजार विस्तार, गुणवत्ता मानकों, बुनियादी ढांचे और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से कृषि निर्यात को बढ़ाने की दिशा में काम जारी रखेगा.