
अमेरिका में गेहूं उत्पादन घटने के अनुमान और वैश्विक सप्लाई पर बढ़ती चिंता के बीच गेहूं की कीमतों में तेजी आई है. अब बाजार की नजर USDA की बुधवार को आने वाली रिपोर्ट पर है, जिसमें उत्पादन और स्टॉक के नए आंकड़े सामने आएंगे. इधर, भारत में भी गेहूं निर्यात कोटे की समीक्षा की तैयारी शुरू हो गई है और DGFT ने निर्यातकों से कोटा इस्तेमाल का ब्योरा मांगा है. व्यापार जगत को उम्मीद है कि रिपोर्ट में अमेरिका के साथ-साथ दुनिया के गेहूं भंडार के अनुमान में कमी दिखाई जा सकती है. USDA की रिपोर्ट बुधवार को जारी होने वाली है. इससे पहले ,शिकागो में सबसे सक्रिय गेहूं वायदा 2.5 फीसदी तक चढ़कर 30 जुलाई के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया.
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, USDA की नई रिपोर्ट में अमेरिकी गेहूं की अधिकांश प्रमुख किस्मों के उत्पादन अनुमान में कटौती की आशंका है. फसलों को सूखे जैसी प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है, जबकि किसानों ने पहले ही गेहूं की बुवाई का रकबा घटा दिया था. ऐसे में उत्पादन अनुमान में कमी की आशंका ने बाजार में खरीदारी को बढ़ावा दिया है.
बाजार की चिंता केवल अमेरिकी उत्पादन तक सीमित नहीं है. विश्लेषकों को वैश्विक स्तर पर गेहूं और मक्का के भंडार में भी कमी आने की उम्मीद है. अमेरिका में मक्का की प्रति एकड़ उपज के अनुमान में मामूली गिरावट की संभावना भी जताई जा रही है. इन अनुमानों के चलते आने वाले दिनों में अनाज बाजार में सप्लाई को लेकर संवेदनशीलता बढ़ सकती है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गेहूं बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते हमले भी हैं. दोनों देशों के बीच अनाज से जुड़े बुनियादी ढांचे और जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने ब्लैक सी से अनाज निर्यात की विश्वसनीयता को लेकर चिंता बढ़ा दी है. रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया के कुल गेहूं निर्यात में एक चौथाई से अधिक हिस्सेदारी रखते हैं, जबकि वैश्विक मक्का निर्यात में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लैक सी क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिम के बीच तुर्किये ने हफ्ते के आखिरी में अपने जहाजों के लिए ब्लैक सी से आवागमन अस्थायी रूप से रोक दिया था. इस घटनाक्रम ने इस प्रमुख अनाज निर्यात मार्ग से होने वाली आपूर्ति पर बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया है. रूस और यूक्रेन से गेहूं की बड़ी मात्रा इसी क्षेत्र के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है.
मौजूदा स्थिति को देखते हुए कहा कि वैश्विक बाजार के बुनियादी संकेत मजबूत हो रहे हैं. वहीं, टोटल फार्म मार्केटिंग की विश्लेषक नाओमी ब्लोम ने कहा कि गेहूं को लेकर बाजार की बेहद मंदी वाली धारणा अब तटस्थ स्थिति की ओर बढ़ गई है. इस हफ्ते आने वाली USDA रिपोर्ट में वैश्विक उत्पादन के आंकड़े बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण रहेंगे. हालांकि, तेजी के बावजूद बाजार में पूरी तरह से तेजी की धारणा नहीं बनी है.
शुक्रवार को जारी नवीनतम नियामकीय आंकड़ों के अनुसार, निवेशकों ने शिकागो गेहूं वायदा में अपनी शुद्ध मंदी वाली पोजीशन बढ़ाई थी. इसका संकेत है कि कारोबारी अभी भी वैश्विक स्तर पर पर्याप्त आपूर्ति को ध्यान में रख रहे हैं. USDA ने पिछले महीने रूस और यूक्रेन के गेहूं उत्पादन के अनुमान में बढ़ोतरी की थी, हालांकि उस समय भी दोनों देशों के निर्यात पर हमलों का जोखिम बना हुआ था.
गेहूं बाजार के लिए अब सबसे बड़ा ट्रिगर USDA की नई रिपोर्ट होगी. इसमें अमेरिका और दुनिया के उत्पादन, खपत और अंतिम भंडार के नए अनुमान सामने आएंगे. अगर उत्पादन और स्टॉक में अपेक्षा से बड़ी कटौती होती है तो गेहूं की कीमतों को आगे भी समर्थन मिल सकता है. वहीं, पर्याप्त वैश्विक आपूर्ति का अनुमान बना रहने पर मौजूदा तेजी पर दबाव लौट सकता है.
वहीं, भारत ने भी अपने गेहूं निर्यात कोटा की समीक्षा की तैयारी शुरू कर दी है. केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी डीजीएफटी ने ट्रेड नोटिस जारी कर निर्यातकों से कोटे के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी मांगी है. गेहूं निर्यातकों को 31 अगस्त तक यह जानकारी डीजीएफटी को देनी होगी. इसके बाद बदलाव से जुड़ा कोई फैसला देखने को मिल सकता है.