Agriculture Education: कृषि शिक्षा में भारत को ग्लोबल लीडर बनाने की तैयारी, शिवराज ने संस्थानों को दिए सख्त निर्देश

Agriculture Education: कृषि शिक्षा में भारत को ग्लोबल लीडर बनाने की तैयारी, शिवराज ने संस्थानों को दिए सख्त निर्देश

केंद्रीय कृषि मंत्री ने देश के कृषि संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों को कृषि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने का सख्त निर्देश दिया है. उन्होंने संस्थानों से ग्लोबल स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाने के लिए कार्य करने को कहा है और इसके लिए बाकायदा एक खास टारगेट भी सेट किया है.

कृषि शिक्ष के क्वालिटी पर अब शिवराज सिंह का फोकसकृषि शिक्ष के क्वालिटी पर अब शिवराज सिंह का फोकस
जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • Aug 11, 2026,
  • Updated Aug 11, 2026, 9:48 AM IST

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत में कृषि शिक्षा  की क्वालिटी को सुधारने और दुनिया भर में इसका नाम रोशन करने पर विशेष जोर दिया है. नई दिल्ली के ICAR-IARI, पूसा में नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल' के जरिए देशभर के कृषि विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप और फेलोशिप की राशि जारी करते हुए उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है, जब हमारे देश के सभी कृषि संस्थानों को दुनिया के बेहतरीन संस्थानों के बीच अपना एक मजबूत मुकाम बनाना होगा. कृषि मंत्री ने इस बात पर खास जोर दिया कि छात्रों को सिर्फ किताबी ज्ञान तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए.

क्लासरूम से बाहर निकलकर खेतों में जाना, मिट्टी के मिजाज को समझना और 'प्रैक्टिकल नॉलेज' पर ध्यान देना आज के वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है. उनकी सख्त हिदायत है कि हर कृषि संस्थान और यूनिवर्सिटी अपने लिए एक बड़ा टारगेट सेट करे, ताकि हमारी कृषि शिक्षा का स्तर सच में ग्लोबल बन सके. हमारे नौजवान सिर्फ डिग्रियां लेकर न निकलें, बल्कि असल मायनों में वे खेतों और किसानों की हर परेशानी सुलझाने वाले काबिल इंसान बनें.

किताबी ज्ञान से काम नहीं चलेगा

कृषि मंत्री ने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया कि खेती की पढ़ाई में सिर्फ क्लासरूम तक सिमट कर रहना काफी नहीं है. असली हुनर तब आता है जब छात्र खेत की मिट्टी, किसान की तकलीफों और नए जमाने की साइंस को आपस में जोड़ते हैं. सरकार की पहली प्राथमिकता देश की खाद्य सुरक्षा, बेहतर पोषण और किसान की आमदनी बढ़ाना है. इस मुकाम को हासिल करने के लिए युवाओं को सिर्फ नौकरी ढूंढने वाला नहीं, बल्कि खुद का काम शुरू करने वाला, रिसर्चर और नई-नई नवाचार ईजाद करने वाला बनना होगा.

उन्होंने कहा खेत, किसान और साइंस जब ये तीनों मिलते हैं, तभी देश की तरक्की और आत्मनिर्भरता मजबूत होती है. इसलिए, छात्रों को नौकरी से एक कदम आगे बढ़कर नई तकनीकों की खोज में अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी. जब हमारी युवा पीढ़ी तकनीक का सही इस्तेमाल करके नए रास्ते तलाशेगी, तभी देश की खेती का भविष्य रोशन, खुशहाल और पूरी तरह सुरक्षित बनेगा.

ग्लोबल लिस्ट में चमके भारत के कृषि संस्थान

कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने बड़ी खुशी के साथ बताया कि 'क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026' में पहली बार भारत के कृषि संस्थानों ने अपनी पक्की जगह बनाकर एक बहुत ही बेहतरीन काम किया है. दुनिया की इस बड़ी लिस्ट में भारत का नाम आना यह साबित करता है कि हम बिल्कुल सही दिशा में जा रहे हैं.

इस साल पहली बार देश के दो बड़े संस्थानों ने ग्लोबल लिस्ट में अपनी  जगह पक्की की है. 'इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IVRI), बरेली' ने पूरी दुनिया में 51 से 100 के बीच रैंकिंग हासिल करके बड़ा मुकाम पाया है. यह भारत की इकलौती यूनिवर्सिटी है जो टॉप 100 में शामिल हुई है.

वहीं, कृषि की पढ़ाई के लिए मशहूर 'भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली' ने भी 151 से 200 के बीच अपनी जगह बनाकर एक बहुत ही अच्छी शुरुआत की है. इनके अलावा बीएचयू, दिल्ली यूनिवर्सिटी, आईआईटी खड़गपुर, तमिलनाडु और हरियाणा एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी जैसी कुछ और नामी यूनिवर्सिटीज भी इस लिस्ट में अपनी खास जगह बनाने में कामयाब रही हैं.

कृषि संस्थान कृषि विश्वविद्यालयो को कड़ा टारगेट

कृषि मंत्री ने साफ कर दिया है कि हम सिर्फ इतने पर ही रुकने वाले नहीं हैं, हमारे इरादे इससे भी कहीं ज्यादा बड़े और बुलंद हैं. उन्होंने आईएआरआई जैसी देश की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी को एक बहुत ही कड़ा और साफ टारगेट दिया है कि उन्हें हर हाल में दुनिया के 'टॉप 100' संस्थानों में अपनी पक्की जगह बनानी है. देश के तमाम संस्थानों और यूनिवर्सिटीज को अपनी शिक्षा में ऐसा शानदार सुधार लाना होगा जिससे पूरी दुनिया में हमारी पढ़ाई का डंका बजे और हमारा परचम लहराए.

इसके लिए बिल्कुल ग्लोबल लेवल की रिसर्च करनी होगी और पुरानी सोच को पूरी तरह से बदलना होगा. सरकार चाहती है कि छात्र खेती में नई तकनीक लाएं, शानदार स्टार्टअप्स शुरू करें और दूसरों को भी रोजगार  दें. जब हमारे संस्थान दुनिया की टॉप लिस्ट में शुमार होंगे, तब जाकर असल मायनों में किसानों का भला होगा और देश की आमदनी में इजाफा होगा.

बिना रुके सीधे बैंक खाते में आएगी स्कॉलरशिप

कृषि शिक्षा को इस ऊंचे मुकाम तक पहुंचाने र छात्रों की पूरी मदद करने के लिए सरकार ने एक और बहुत ही बेहतरीन और फायदेमंद कदम उठाया है. कृषि मंत्री जी ने छात्रों के लिए 'नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल' (NSP) के जरिए 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (DBT) सिस्टम की बहुत शानदार शुरुआत की है. इस नए तरीके का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब 6000 से भी ज्यादा कृषि छात्रों के बैंक खातों में कुल 21.35 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप की रकम सीधे और बिना किसी देरी के पहुंच जाएगी.

पहले छात्रों को अपने ही पैसों के लिए बहुत लंबा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब इस नए सिस्टम से सारा काम बेहद आसान और तेज हो जाएगा. सही वक्त पर पैसा मिलने से किसी भी छात्र को कोई आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा. इस शानदार मदद से छात्र अपना पूरा ध्यान सिर्फ अपनी पढ़ाई, प्रैक्टिकल काम और नई खोजों पर लगा सकेंगे.

MORE NEWS

Read more!