अमेरिका की ओर से भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत के कई व्यापार क्षेत्राें में कारोबार पर खतरा मंडराने लगा है. इनमें से एक मेंथा उद्योग भी है. यहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रामपुर में मेंथा उद्योग की 1000 करोड रुपये प्रतिवर्ष का कारोबार है, जिसमें से अधिकतर कारोबार अमेरिका की कोलगेट जैसी बड़ी कंपनियों से होता है. इससे मेंथा उद्योग से बनाए जाने वाला पिपरमेंट दवाओं और टूथपेस्ट आदि में इस्तेमाल होता है, लेकिन 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद आप भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में चीन और दूसरे देशों से प्रतिस्पर्धा करना बेहद मुश्किल हो जाएगा. अभी से ही कंपनियों के ऑर्डर होल्ड पर लगा दिए हैं या निरस्त कर दिए गए हैं, जिससे अकेले रामपुर के मेंथा उद्योग को 400 करोड़ से अधिक का व्यापार खतरे में है. इसके चलते यहां के हजारों किसानों और मजदूरों की जीविका पर बुरा असर पड़ने की आशंका है.
इस बारे में रामपुर के मेंथा उद्योग के उद्योगपतियों और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोशिएशन के रामपुर चैप्टर के अध्यक्ष शिरीष गुप्ता से बात की तो उन्होंने इसे अमेरिकी दबाव की रणनीति बताते हुए देश के साथ खड़े रहने की बात कही. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को चाहिए कि टैरिफ प्रकरण के चलते जो उद्योग खतरे में आ गए हैं, उनके लिए ऐसी योजनाएं बनाएं कि वह बंद ना हो और लोगों का रोजगार खतरे में ना पड़े.
शिरीष गुप्ता ने कहा कि ट्रेड डील को लेकर अमेरिका का यह नाजायज दबाव है, जो भारत नहीं मानेगा और समझौता नहीं करेगा. जहां तक इंडस्ट्री का सवाल है, थोड़े समय की परेशानी है. इस बीच, मिंट के कारोबारी दूसरे देशों में अन्य विकल्प में तलाश करेंगे. वहां पर अपना कारोबार करेंगे.
गुप्ता ने मिंट इंडस्ट्री को राहत देने के लिए सरकार से सब्सिडी या अन्य सुविधा देने की मांग की. उन्होंने कहा कि अकेले रामपुर में ही कम से कम 5-10 हजार हजार किसान इससे जुड़े हुए हैं. गुप्ता ने कहा कि हमारी कॉमर्स मिनिस्ट्री से बातचीत जारी है. जल्द ही कोई सकारात्मक परिणाम निकलेगा.
वहीं, कारोबार पर असर पड़ने पर मिंट कारोबारी अमृत कपूर ने कहा कि यह टैरिफ जिस तरह से बढ़ रहा है, उसकी वजह से रामपुर की मिंट इंडस्ट्री पर बहुत ज्यादा असर होने वाला है. मेंथा के उद्योग से 10 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हुए हैं और इन पर सबसे पहले बहुत असर होने वाला है, जिसके चलते किसानों पर्याप्त पैसे नहीं मिल पाएंगे. यहां तक कि लागत भी निकलना मुश्किल हो सकता है.
वैसे ही हमारा मिंट का ट्रेड सिंथेटिक मेन्थोल की वजह से जूझ रहा था और अब अमेरिका ने मुश्किल बढ़ा दी है. वहीं, उद्योग से जुड़ी कंपनियों में 1000 से 1200 लोग लेबर के रूप में काम करते हैं. इस तरह से करीब 4000 से मजदूर अलग-अलग कंपनियों में काम करते हैं और मांग घटने की वजह से प्रोडक्शन कम होगा तो आने वाले टाइम में फैक्ट्री से मजदूरों को कम करना पड़ सकता है. अब कितनी जल्दी हमारी सरकार इसके ऊपर एक्शन लेती है और हम लोगों को सब्सिडी के रूप में कुछ हेल्प देती है तो हो सकता है हम लोग इस स्थिति को झेल पाएंगे.
टैरिफ लगने के बाद कितने प्रोडक्ट होल्ड हुए हैं? इसे लेकर अमृत कपूर ने बताया कुछ ऑर्डर होल्ड पर गए है और कुछ कैंसिल हो गए है. वहीं कुछ निश्चित काल के लिए होल्ड पर डाल दिए गए हैं. कपूर ने कहा कि हमारा जो प्रोडक्ट 20 डॉलर का है, उसके ऊपर 50 प्रतिशत टैरिफ लगने से वह एकदम से रातों-रात 30 डॉलर का हो गया है.
ऐसे में वहां का खरीदार 30 डॉलर खर्च करने में हिचक रहा है. इसलिए ऑर्डर होल्ड पर हैं और हमारी फैक्ट्रियों में माल बना हुआ रखा है. लेकिन हमें पता नहीं है कि वह कब जाएगा. कपूर ने अनुमानित आंकड़े देते हुए बताया कि अकेले रामपुर में ही करीब मैंथॉल का 400-500 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट होगा और पूरी यूपी का करीब 1000 से 1500 करोड़ के बीच होगा. कपूर ने कहा कि हमें प्रधानमंत्री मोदी से राहत की आस है. (आमिर खान की रिपोर्ट)