GDP ग्रोथ में कृषि क्षेत्र की धीमी रफ्तार! विकसित भारत @2047 के लक्ष्‍य पर 'आंच', पढ़ें डिटेल

GDP ग्रोथ में कृषि क्षेत्र की धीमी रफ्तार! विकसित भारत @2047 के लक्ष्‍य पर 'आंच', पढ़ें डिटेल

Agriculture GDP Data: FY 2025-26 के Q2 में मजबूत GDP के बावजूद कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की वृद्धि 3.5% पर सिमट गई, जो पिछले वर्ष से कम है. Q1 में भी जरूरत के हिसाब से इस सेक्टर ने कुछ खास रफ्तार नहीं दिखाई.

कृषि क्षेत्र की ग्रोथ धीमी (AI फोटो)कृषि क्षेत्र की ग्रोथ धीमी (AI फोटो)
प्रतीक जैन
  • Noida,
  • Nov 30, 2025,
  • Updated Nov 30, 2025, 7:25 PM IST

Agriculture GDP Growth Rate: वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर की GDP अनुमार शुक्रवार को जारी हो चुका है. इस तिमाही भी भारत की आर्थिक वृद्धि काफी मजबूत रही और 8.2% की जीडीपी दर की रफ्तार ने सरकार का मनोबल बढ़ाया है. लेकिन, इसी रिपोर्ट में एक ऐसा सेक्टर है जिसे लेकर चिंता कम नहीं हो रही है. यह सेक्‍टर है- कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र. लगातार दूसरी तिमाही में इस सेक्‍टर की ग्रोथ धीमी ही दिखाई दी है.

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि Q2 में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की वास्तविक वृद्धि दर केवल 3.5% रही है. पिछले साल (FY 2024-25) की इसी तिमाही में यह 4.1% थी. इससे पहले इस साल की पहली तिमाही यानी Q1 में कृषि GDP में 3.7% की बढ़ोतरी हुई थी. साफ है कि किसान और कृषि आधारित उद्योग लगातार समग्र अर्थव्यवस्था की तुलना में  काफी पीछे चल रहे हैं.

विकस‍ित भारत@2047 के लिए इतनी कृषि ग्रोथ जरूरी

यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि केंद्र सरकार “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य में कृषि को बेहद अहम क्षेत्र मानती है. कई सरकारी दस्तावेजों और बयानों में यह बात आती रही है कि अगर देश को 2047 तक विकसित देशों की कतार में लाना है तो कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में लगातार करीब 5% की वृद्धि जरूरी होगी. लेकिन मौजूदा नतीजे इस मानक से काफी कम हैं.

पहली तिमाही में हुआ था सुधार

पिछले वित्त वर्ष FY 2024-25 की पहली तिमाही में कृषि वृद्धि सिर्फ 1.5% रही थी. उसके बाद इस साल FY 2025-26 की Q1 में इसमें सुधार जरूर दिखा और यह 3.7% पर पहुंच गई. लेकिन, Q2 में फिर गिरावट आई और वृद्धि 3.5% पर सिमट गई. इसका मतलब है कि अच्छा मॉनसून, खेती से जुड़ी योजनाएं और उत्पादन बढ़ाने की कोशिशें होने के बावजूद सेक्टर अभी भी स्थायी रफ्तार पकड़ नहीं पा रहा है.

कृषि क्षेत्र पर इन कारकों का असर

भारत के कृषि क्षेत्र पर बाहरी कारकों का असर भी दिख रहा है. अमेरिका के साथ चल रही व्यापारिक खींचतान के कारण भारतीय कृषि निर्यात पर टैरिफ का थोड़ा असर पड़ा है. कई दूसरे देश भी अब उन बाजारों में आक्रामक हो गए हैं, जहां पहले भारत की पकड़ मजबूत थी. ऊपर से घरेलू चुनौतियां- कभी ज्यादा बारिश तो कभी कम, तापमान, इनपुट लागत में बढ़ोतरी और फसल कीमतों में उतार-चढ़ाव ये सब मिलकर किसानों पर दबाव बढ़ा रहे हैं.

ओवरऑल GDP ग्रोथ अच्छी होने के बावजूद कृषि क्षेत्र की धीमी रफ्तार संकेत देती हैं कि सरकार के सामने लक्ष्य बड़ा है, लेकिन रास्ते में कई चुनौतियां मौजूद हैं. ऐसे में जब तक कृषि उत्पादकता, ग्रामीण अवसंरचना, निर्यात क्षमता और वैल्यू चेन में और ज्‍यादा तेजी से सुधार नहीं होता, तब तक सेक्टर की ग्रोथ 5% की स्थायी दर तक पहुंचना मुश्किल होगा. अगर ऐसा ही हुआ तो “विकसित भारत 2047” के रास्ते में यह एक बड़ी बाधा बन सकता है. 

कृषि क्षेत्र को इन कदमों से बड़ी आस

हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अब दलहन और तिलहन में आत्‍मनिर्भरता हासिल करने के लिए कदम उठाए हैं और इनपर काम भी शुरू हो गया है. वहीं, सरकार की ओर से एक और बड़ा कदम उठाते हुए कृषि में पिछड़े 100 जिलों को कम उत्‍पादकता से उबारने के‍ लिए पीएम धन-धान्‍य कृषि योजना भी अहम साबित होगी और आने वाले समय में जीडीपी आकलन में इसका साफ असर देखने को मिल सकता है.

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