UP News: बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से जालौन की बदली तस्वीर, खेती से कारोबार तक दिख रहा असर

UP News: बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से जालौन की बदली तस्वीर, खेती से कारोबार तक दिख रहा असर

बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे बनने के बाद जालौन में खेती और कारोबार दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. मटर किसानों को फसल समय पर मंडी पहुंचाने में आसानी हुई है, जिससे बेहतर दाम मिल रहे हैं और आय में सुधार दर्ज किया जा रहा है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 10, 2026,
  • Updated Apr 10, 2026, 7:45 PM IST

बुंदेलखंड क्षेत्र, जो लंबे समय तक बदहाल सड़कों, खेती की परेशानियों और पलायन की समस्या से जूझता रहा, अब तेजी से बदलाव की राह पर है. इस बदलाव के केंद्र में बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे है, जिसने जालौन जिले की तस्वीर और तकदीर दोनों को बदलने का काम किया है. यह एक्सप्रेस-वे अब सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की नई धुरी बन गया है. जालौन जिले में मटर की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. पहले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती फसल को समय पर दिल्ली की मंडियों तक पहुंचाने की होती थी. खराब सड़कें और लंबा सफर अक्सर फसल की गुणवत्ता को प्रभावित करता था, जिससे किसानों को उचित दाम नहीं मिल पाते थे. 

लेकिन, एक्सप्रेस-वे बनने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए हैं. जहां पहले दिल्ली पहुंचने में 9 से 10 घंटे का समय लगता था, अब वही दूरी 4 से 5 घंटे में तय हो रही है. कम समय में फसल मंडी पहुंचने से उसकी ताजगी बनी रहती है और किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है, जिससे उनकी आय में भी सुधार देखने को मिल रहा है.

सर्विस रोड बनी गांवों की लाइफलाइन

एक्सप्रेस-वे निर्माण के दौरान यह आशंका जताई जा रही थी कि गांव दो हिस्सों में बंट जाएंगे और स्थानीय लोगों को आवाजाही में दिक्कत होगी. हालांकि, उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने इस समस्या का समाधान करते हुए सर्विस लेन का निर्माण किया. 

किसानों को सर्विस रोड से बड़ा फायदा

जालौन में लगभग 76 किलोमीटर के दायरे में बनी ये सर्विस रोड आसपास के गांवों के लिए राहत का बड़ा जरिया बन गई है. किसान अब आसानी से एक गांव से दूसरे गांव और अपने खेतों तक पहुंच पा रहे हैं, जिससे खेती-बाड़ी के काम में किसी तरह की बाधा नहीं आ रही है.

धार्मिक यात्रा और पर्यटन को बढ़ावा

धार्मिक दृष्टि से भी इस एक्सप्रेस-वे का बड़ा महत्व सामने आया है. पहले जालौन से प्रयागराज, चित्रकूट और मथुरा जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने में 6 से 7 घंटे का समय लगता था, लेकिन अब यह सफर घटकर 2 से 3 घंटे रह गया है. इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ी है, जिससे स्थानीय स्तर पर व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है.

तेज हुई विकास की रफ्तार

बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे ने जालौन समेत पूरे क्षेत्र में विकास की रफ्तार को नई दिशा दी है. बेहतर कनेक्टिविटी, कम होता सफर और बढ़ती आमदनी अब इस इलाके की नई पहचान बनती जा रही है, जिससे आने वाले समय में और बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है.

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