
तमिलनाडु सरकार ने पूर्वोत्तर मॉनसून की तैयारी को ध्यान में रखते हुए राज्य के तालाबों और टैंकों की सफाई अभियान को तेज करने का फैसला लिया है. मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने इस बारे में समीक्षा बैठक की और जलाशयों में जमा गाद को किसानों समेत आम उपयोगकर्ताओं को मुफ्त देने की व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए. राज्य सरकार के मुताबिक, प्रदेश में करीब 40 हजार टैंक और तालाब जल संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग और पंचायत राज विभाग के अधीन आते हैं. इन जलाशयों में वर्षों से जमा गाद को हटाने से उनकी जल भंडारण क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि मॉनसून के दौरान अधिक पानी संग्रहित किया जा सके.
सरकार ने कहा है कि जलाशयों से निकाली जाने वाली गाद किसानों, कुम्हारों और घरेलू जरूरतों के लिए मिट्टी लेने वाले लोगों को बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जाएगी. अधिकारियों की निगरानी में लोग तय सीमा तक गाद निकाल सकेंगे और इसके लिए किसी प्रकार का स्वामित्व शुल्क नहीं देना होगा. राज्य सरकार ने पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन करने का फैसला लिया है.
इच्छुक किसान और अन्य लाभार्थी आवेदन के लिए TN eSevai Portal का इस्तेमाल कर सकेंगे. आवेदन मिलने के बाद संबंधित तहसील कार्यालयों को 10 दिनों के भीतर अनुमति जारी करने के निर्देश दिए गए हैं. राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों से कहा है कि योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए. साथ ही वर्ष 2026-27 के लिए जिलेवार तालाबों और टैंकों की सूची प्रकाशित करने और तय नियमों के अनुसार पूरे अभियान की निगरानी करने को कहा गया है.
महाराष्ट्र सरकार ने भी बीते हफ्ते सिंचाई परियोजनाओं की क्षमता बढ़ाने और किसानों की जमीन की उर्वरता सुधारने के लिए छह बड़े बांधों में गाद निकासी का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने को मंजूरी दी है. मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस फैसले पर मुहर लगी. योजना के तहत उजनी, गिरणा, गोसीखुर्द, मूला, जायकवाड़ी और हतनूर बांधों से निकाली जाने वाली पोषक तत्वों से भरपूर गाद किसानों को बिना किसी रॉयल्टी या स्वामित्व शुल्क के दी जाएगी.
किसानों को केवल परिवहन खर्च उठाना होगा. सरकार ने अवैध रेत खनन रोकने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था भी लागू की है, जिसमें सीसीटीवी निगरानी, जीपीएस ट्रैकिंग, जियो-फेंसिंग, ई-पास और ऑनलाइन रिकॉर्ड जैसी व्यवस्थाएं शामिल रहेंगी. जलाशयों से गाद हटाने से एक तरफ पानी स्टोर करने की क्षमता बढ़ेगी. वहीं, दूसरी ओर किसानों को खेतों के लिए उपजाऊ मिट्टी भी मिल सकेगी. इससे जल संरक्षण और कृषि सुधार दोनों उद्देश्यों को एक साथ आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है. (पीटीआई)