
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "रिफॉर्म एक्सप्रेस" विजन को लेकर बड़ा अपडेट दिया है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय अब किसानों, व्यापारियों और कृषि उद्योग से जुड़े लोगों के लिए कई अहम प्रक्रियाओं को आसान बनाने जा रहा है. शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में उच्चस्तरीय बैठक में कीटनाशक लाइसेंसिंग, नए उर्वरकों की मंजूरी, कृषि आयात व्यवस्था और एआई आधारित किसान प्लेटफॉर्म समेत कई बड़े सुधारों की समीक्षा बैठक की. मंत्रालय ने जानकारी दी कि कृषि क्षेत्र में कागजी प्रक्रिया घटाकर डिजिटल और तेज व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया जा रहा है.
बैठक में कृषि मंत्रालय के सचिव अतीश चंद्रा ने घरेलू उपयोग के कीटनाशकों की बिक्री और भंडारण से जुड़े सुधारों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अब लाइसेंस आवेदन प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया गया है. आवेदन पत्र को तीन पन्नों से घटाकर केवल एक पन्ने का कर दिया गया है. साथ ही उत्पादों के साथ दिए जाने वाले फिजिकल लीफलेट की व्यवस्था खत्म कर लेबल पर सीधे क्यूआर कोड की सुविधा शुरू की गई है.
मंत्रालय के अनुसार, इस फैसले से मच्छर भगाने वाली मैट, कॉइल, लिक्विड वेपोराइजर और कॉकरोच स्प्रे जैसे उत्पाद बेचने वाले 40 लाख से ज्यादा खुदरा विक्रेताओं और किराना दुकानदारों को राहत मिलेगी. सरकार का मानना है कि इससे लाइसेंसिंग प्रक्रिया तेज होगी और अनावश्यक कागजी काम कम होगा.
बैठक में उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत नए उर्वरकों के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी चर्चा हुई. पहले किसी नए उर्वरक की मंजूरी के लिए तकनीकी समिति और केंद्रीय उर्वरक समिति दोनों की अनुमति जरूरी होती थी, लेकिन अब दोहरी व्यवस्था खत्म कर केवल केंद्रीय उर्वरक समिति को अधिकृत किया गया है. इस नई व्यवस्था से अब तक 19 आवेदकों और निर्माताओं को लाभ मिल चुका है.
सरकार कृषि क्षेत्र में "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस" को बढ़ावा देने के लिए उर्वरक मंजूरी प्रक्रिया में और सुधार करने की तैयारी में है. प्रस्ताव के तहत गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाले अकार्बनिक उर्वरकों को अनिवार्य फील्ड ट्रायल से छूट दी जा सकती है. मंत्रालय ने बताया कि इस पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि उद्योग और राज्य सरकारों के साथ चर्चा के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा.
कृषि जिंसों के आयात को आसान बनाने के लिए देश के सभी 649 कस्टम पोर्ट्स को डिजिटल रूप से इंटीग्रेट कर दिया गया है. मंत्रालय के अनुसार, प्लांट क्वारंटाइन मैनेजमेंट सिस्टम और इंडियन कस्टम्स इलेक्ट्रॉनिक डाटा इंटरचेंज गेटवे के बीच एंड-टू-एंड इंटीग्रेशन स्थापित किया गया है. अब आयातकों को केवल एक ही प्लेटफॉर्म पर आवेदन करना होगा और इंपोर्ट रिलीज ऑर्डर सीधे उनके लॉगिन पर जारी हो जाएगा.
बैठक में बीज और रोपण सामग्री के आयात-निर्यात को आसान बनाने वाले सुधारों की भी जानकारी दी गई. सरकार ने एक्सिम कमेटी को समाप्त कर दिया है और "प्रायर रिकमेंडेशन" लेने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी है. इससे बीज और रोपण सामग्री के आयात-निर्यात की प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक तेज और सरल होने की उम्मीद है.
किसानों को एक ही मंच पर खेती से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए विकसित "भारत-विस्तार - एआई इन एग्रीकल्चर" प्लेटफॉर्म की भी समीक्षा की गई. 17 फरवरी 2026 को इसके पहले चरण की शुरुआत के बाद से अब तक इस प्लेटफॉर्म पर 44 लाख से अधिक सवाल मिल चुके हैं.
पहले किसानों को जानकारी के लिए 15 से अधिक अलग-अलग प्लेटफॉर्म का उपयोग करना पड़ता था, लेकिन अब वे दिन-रात किसी भी समय एक ही मंच पर जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. सरकार का दावा है कि इससे किसानों को योजनाओं, तकनीकी सलाह और कृषि सेवाओं तक आसान पहुंच मिलेगी.
बैठक के अंत में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी दक्षता और सुशासन को बढ़ावा देने के लिए सुधारों की प्रक्रिया को और तेज किया जाए. उन्होंने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य किसानों, व्यापारियों, उद्यमियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल, तेज और प्रभावी बनाना है.