
केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि बस्तर में अब जंगल से मिलने वाले उत्पाद (वनोपज) और खेती से होने वाला पूरा फायदा सीधे आदिवासी समुदायों तक पहुंचाया जाएगा. उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में बस्तर की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए खेती, डेयरी और सहकारिता आधारित मॉडल पर काम होगा. इसके तहत आदिवासी परिवारों, खासकर महिलाओं को एक गाय और एक भैंस उपलब्ध कराकर उन्हें डेयरी व्यवसाय से जोड़ा जाएगा.
जगदलपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद की वजह से बस्तर लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहा. कई गांवों तक बिजली, पानी, स्कूल और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाया. लोगों को राशन कार्ड, मुफ्त अनाज योजना और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाओं से भी दूर रहना पड़ा. अब सरकार का लक्ष्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को पूरी तरह विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है.
शाह ने कहा कि क्षेत्र में PACS और गांव स्तर पर डेयरी व्यवस्था विकसित की जाएगी. उन्होंने बताया कि आदिवासी महिलाएं अपने पशुओं का दूध स्थानीय डेयरी तक पहुंचा सकेंगी और सहकारी मॉडल के जरिए उसकी खरीद-मार्केटिंग होगी. उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण परिवारों की नियमित आय बढ़ेगी और कृषि के साथ पशुपालन भी रोजगार का बड़ा साधन बनेगा.
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार बस्तर में केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय बहुआयामी रोजगार मॉडल पर काम कर रही है. इसके तहत युवाओं को कौशल विकास से जोड़कर स्वरोजगार और निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की योजना है. वहीं, किसानों और महिलाओं को सहकारी संस्थाओं के जरिए आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह शुरुआती कार्ययोजना है और पहले चरण के बाद विस्तृत रोडमैप जारी किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि केवल नक्सलमुक्त भारत बनाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि 2031 तक विकसित बस्तर तैयार करना सरकार का बड़ा लक्ष्य है. अमित शाह ने कहा कि जब बस्तर पूरी तरह विकसित होगा तब दुनिया देखेगी कि नक्सलवाद ने इस क्षेत्र की प्रगति को कितने वर्षों तक रोके रखा था.
केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की कि बस्तर में मौजूद करीब 200 सुरक्षा कैंपों में से 70 को “वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा” में बदला जाएगा. इन केंद्रों के जरिए लोगों को केंद्र और राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि इन सेवा केंद्रों के माध्यम से गांवों तक बिजली, पानी, शिक्षा और रोजगार जैसी सुविधाएं पहुंचाने का काम तेज किया जाएगा.
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी की प्रेरणा से आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करने के लिए “बस्तर पंडुम” जैसे आयोजन किए जा रहे हैं. इसमें आदिवासी समाज की लोक कला, भाषा, वेशभूषा, खानपान और हस्तशिल्प को बड़े स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा. उन्होंने बताया कि बस्तर ओलंपिक में लाखों खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिनमें पुनर्वास स्वीकार कर चुके पूर्व नक्सली भी शामिल रहे.