
भुवनेश्वर में मंगलवार को एक बड़ा कृषि सम्मेलन आयोजित किया गया, जहां देश के कई राज्यों के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक और किसान प्रतिनिधि एक साथ जुटे. इस सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan और ओडिशा के मुख्यमंत्री Mohan Charan Majhi ने किया. इस खास कार्यक्रम में ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वी राज्यों की खेती को और बेहतर बनाने पर चर्चा की गई.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक सामान्य बैठक नहीं है, बल्कि किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने का बड़ा प्रयास है. उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत की जमीन बहुत उपजाऊ है और यहां पानी की भी अच्छी सुविधा है. अगर सही तरीके से खेती की जाए, तो यह इलाका देश की खेती का सबसे मजबूत क्षेत्र बन सकता है.
उन्होंने किसानों को देश का “जीवनदाता” बताया और कहा कि किसानों की सेवा करना भगवान की पूजा करने जैसा है. उन्होंने कहा कि खेती का सबसे बड़ा लक्ष्य है कि देश के सभी लोगों को अच्छा भोजन मिले और किसानों की कमाई भी बढ़े.
सम्मेलन में यह बात भी कही गई कि अब किसानों को केवल गेहूं और धान तक सीमित नहीं रहना चाहिए. दलहन, तिलहन, फल, सब्जियां और दूसरी फसलों की खेती भी जरूरी है. इससे किसानों को ज्यादा कमाई हो सकती है. पूर्वी भारत में इन फसलों की खेती के लिए बहुत अच्छी संभावना बताई गई.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पूर्वी राज्यों में ज्यादातर किसानों के पास छोटी जमीन होती है. इसलिए किसानों को ऐसी खेती करनी होगी जिससे एक ही खेत से कई तरह की कमाई हो सके. उन्होंने कहा कि किसान अनाज के साथ मछली पालन, पशुपालन, मधुमक्खी पालन और पेड़-पौधों की खेती भी करें. इससे उनकी आय बढ़ सकती है.
सम्मेलन में मिट्टी की सेहत को बचाने की बात भी कही गई. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिना जांच के ज्यादा खाद डालना जमीन को खराब कर सकता है. इसलिए किसानों को जरूरत के हिसाब से ही खाद का उपयोग करना चाहिए. उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की भी अपील की.
उन्होंने बताया कि 1 जून से “खेत बचाओ अभियान” शुरू किया जाएगा. इसके जरिए किसानों को मिट्टी की जांच, सही खाद उपयोग और नई खेती तकनीकों के बारे में जानकारी दी जाएगी.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नकली खाद, खराब बीज और नकली दवाएं किसानों के साथ बड़ा धोखा हैं. सरकार इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी. उन्होंने राज्यों से भी कहा कि किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाली चीजें मिलनी चाहिए ताकि उनका नुकसान न हो.
सम्मेलन में दाल और तिलहन की खेती बढ़ाने पर भी खास चर्चा हुई. मंत्री ने कहा कि पूर्वी भारत देश को इन फसलों में आत्मनिर्भर बना सकता है. इसके लिए जरूरी है कि किसानों को भरोसा हो कि उनकी फसल सही दाम पर खरीदी जाएगी.
सम्मेलन में वैज्ञानिकों और कृषि संस्थानों से कहा गया कि नई तकनीक और रिसर्च की जानकारी सीधे किसानों तक पहुंचाई जाए. इससे किसान नई तकनीक सीख पाएंगे और खेती को और बेहतर बना सकेंगे.
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने कहा कि यह सम्मेलन पूर्वी भारत के किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि ओडिशा सरकार खेती को आधुनिक और किसानों के लिए फायदेमंद बनाने के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने दाल उत्पादन, खाद्य तेल, मिलेट्स और ऑर्गेनिक खेती पर भी जोर दिया.
उन्होंने कहा कि किसानों को अच्छी बाजार व्यवस्था, कोल्ड स्टोरेज और नई तकनीक से जोड़ना बहुत जरूरी है. इससे किसानों की फसल खराब नहीं होगी और उन्हें बेहतर दाम मिल सकेंगे.
यह सम्मेलन किसानों की आय बढ़ाने, खेती को आधुनिक बनाने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. सरकार का मानना है कि अगर किसान नई तकनीक और नई फसलों को अपनाएंगे, तो खेती और ज्यादा फायदेमंद बन सकती है.
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