IARI के बायो-फर्टिलाइजर घटाएंगे यूरिया, DAP और पोटाश का लोड! घटेगा अंधाधुंध इस्तेमाल

IARI के बायो-फर्टिलाइजर घटाएंगे यूरिया, DAP और पोटाश का लोड! घटेगा अंधाधुंध इस्तेमाल

खेती में यूरिया, DAP और पोटाश जैसे रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी की उपजाऊ ताकत घट रही है और पानी-पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। इस लोड को कम करने के लिए पूसा (IARI) ने प्राकृतिक 'जैव-उर्वरक' तकनीकें बनाई हैं। धान जैसी फसलों में यूरिया और अन्य खादों का भारी खर्च घटाने के लिए 'एज़ोटोबैक्टर' जीवाणु तैयार किया गया है, जो पौधों को प्राकृतिक नाइट्रोजन देता है। यह पाउडर और एडवांस लिक्विड रूप में आता है, इसे अपनाने से केमिकल खादों की निर्भरता और लागत कम होती है, जिससे पैदावार 10 से 35% तक बढ़ जाती है।

बेहद सस्ती और कारगर है बायोफर्टिलाइजर बेहद सस्ती और कारगर है बायोफर्टिलाइजर
जेपी स‍िंह
  • नोएडा,
  • May 20, 2026,
  • Updated May 20, 2026, 5:25 PM IST

यूरिया, डीएपी और पोटाश जैसी रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल ने आज हमारे खेतों की मिट्टी को बीमार कर दिया है. ज्यादा पैदावार की होड़ में जमीन की कुदरती उपजाऊ ताकत लगातार घट रही है, जिसका सीधा बुरा असर हमारे पर्यावरण और जमीन के नीचे के पानी पर पड़ रहा है. इस गंभीर समस्या से निपटने और अपनी खेती को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए 'जैव-उर्वरक' (Biofertilizers) सबसे बेहतरीन और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प बनकर उभरे हैं. जैव-उर्वरक असल में जीवित सूक्ष्मजीवों माइकोआर्गेनिज्मस से तैयार किए जाते हैं, जो मिट्टी की कमजोरी को दूर करके उसकी पोषण क्षमता को प्राकृतिक तरीके से बढ़ाते हैं. इस दिशा में देश के सबसे बड़े कृषि संस्थान IARI (भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान) पूसा नई दिल्ली ने कई ऐसी दमदार जैव-उर्वरक तकनीकें तैयार की हैं, जो आज किसानों के लिए काफी फायदेमंद हैं. यह तकनीकें न सिर्फ मिट्टी को उपजाऊ रखती हैं, बल्कि खेती की लागत को भी भारी-भरकम रूप से कम करती हैं.

धान में यूरिया की भारी खपत होगी कम

धान की खेती में यूरिया का सबसे ज्यादा, लगभग 37 फीसदी इस्तेमाल होता है, जिससे किसानों का खर्च बहुत बढ़ जाता है. यूरिया की इस भारी-भरकम खपत को कम करने के लिए IARI ने 'एज़ोटोबैक्टर' (Azotobacter) नाम का एक बेहद कारगर जीवाणु तैयार किया है, जो हवा में मौजूद नाइट्रोजन को सोखकर उसे पौधों के इस्तेमाल लायक बनाता है. वैज्ञानिकों ने इसे दो रूपों में तैयार किया है. 

  1. पहला पाउडर रूप में आता है, जिसे बुवाई के वक्त सीधे बीजों पर लपेटकर बीज उपचार या जिस खेत में धान की रोपाई के पहले मृदा उपचार में इस्तेमाल किया जाता है और इसकी शेल्फ लाइफ करीब 3 महीने की होती है. 
  2. दूसरा 'तरल एज़ोटोबैक्टर' है, जो लिक्विड बोतल के रूप में मिलता है और पाउडर के मुकाबले कहीं ज्यादा एडवांस है. इसे इस्तेमाल करना बहुत आसान है और यह बोतल में पूरे 36 महीनों तक खराब नहीं होता है. यह तकनीक धान, गेहूं, कपास, मक्का, आलू और प्याज जैसी फसलों के लिए बेहद फायदेमंद है, जिससे पैदावार में 10 से 35% तक का शानदार इजाफा देखा गया है।                         

मिट्टी में फंसी फास्फोरस गलाएगा

पौधों की जड़ों को मजबूत बनाने और उनके सही विकास के लिए फास्फोरस एक बेहद जरूरी तत्व है, लेकिन अक्सर खेतों की मिट्टी में पहले से मौजूद फास्फोरस फिक्स हो जाता है, जिसे पौधे चाहकर भी सोख नहीं पाते. किसानों की इस बड़ी मुश्किल को आसान करने के लिए IARI ने 'पूसा बायोफॉस' बायो फर्टिलाइजर बनाई है, जो फॉस्फेट सोलुबिलाइजिंग बैक्टीरिया (PSB) पर काम करती है. यह तकनीक भी दो रूपों में उपलब्ध है; पाउडर रूप जिसे सीधे बीजों के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है, और तरल पूसा बायोफॉस जो पानी में आसानी से घुलने वाला लिक्विड है. किसान इसे स्प्रे या ड्रिप सिंचाई के जरिए सीधे खेतों में दे सकते हैं. यह मिट्टी में जमे हुए जिद्दी फास्फोरस को पिघलाकर जड़ों तक पहुंचाता है, जिससे रासायनिक फॉस्फेट खाद की लगभग 10 से 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक की सीधी बचत होती है और फसल की उपज भी 15 से 20% तक बढ़ जाती है.

बायोपोटास पौधों का सुधरेगा सेहत

फसलों की पूरी सेहत के लिए सिर्फ नाइट्रोजन और फास्फोरस ही काफी नहीं होते, बल्कि पोटाश और जिंक जैसे बारीक पोषक तत्वों (Micronutrients) की भी सख्त जरूरत होती है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए IARI ने खास तौर पर तरल रूप (Liquid Formulation) में 'बायोपोटाश  बेहतरीन बायोफर्टिलाइजर तैयार की हैं. पूसा बायोपोटाश लिक्विड खाद मिट्टी में लॉक हो चुके तत्वों को दोबारा एक्टिव कर देती है, जिससे प्रति हेक्टेयर 10-15 किलो रासायनिक पोटाश की सीधी बचत होती है. इसी तरह बायो जिंक पौधों में जिंक की कमी को दूर करता है, जिससे फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इन सभी जरूरी तत्वों के आसान इस्तेमाल के लिए वैज्ञानिकों ने 'पूसा संपूर्ण' नाम का एक ऑल-इन-वन पैकेज भी तैयार किया है, जो पौधों को एक साथ कई जरूरी पोषक तत्व देकर उनका ऑलराउंड विकास सुनिश्चित करता है.  

बेहद सस्ती और कारगर है बायोफर्टिलाइजर 

IARI, नई दिल्ली की इन सभी बायोफर्टिलाइजर तकनीकों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये बेहद सस्ती हैं और मात्र ₹50 से ₹125 प्रति पैकेट या बोतल की कम कीमत पर सरकारी आउटलेट्स पर आसानी से मिल जाती हैं. इनके लगातार इस्तेमाल से न सिर्फ खेतों की पैदावार बढ़ती है, बल्कि फसलों की क्वालिटी भी लाजवाब हो जाती है, जैसे टमाटर का लाल रंग और अनाजों की कुदरती चमक बढ़ जाती है. सबसे अहम बात यह है कि ये बायोफर्टिलाइजर हमारी जमीन को हमेशा के लिए जिंदा, नर्म और उपजाऊ बनाए रखते हैं. अगर हमारे देश के किसान भाई केमिकल खादों पर अपनी निर्भरता को थोड़ा कम करके इन जैविक तकनीकों को महत्व दें, तो वे बेहद कम लागत में अपनी खेती से बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन को बंजर होने से भी बचा सकते हैं. 

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