गन्ना किसानों के आंदोलन का असर: महाराष्ट्र की 55 में से सिर्फ 15 चीनी मिलों में पेराई शुरू, कर्नाटक में एक भी मिल नहीं चली

गन्ना किसानों के आंदोलन का असर: महाराष्ट्र की 55 में से सिर्फ 15 चीनी मिलों में पेराई शुरू, कर्नाटक में एक भी मिल नहीं चली

महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ना किसानों के आंदोलन का असर चीनी उद्योग पर दिखने लगा है. महाराष्ट्र की 55 चीनी मिलों में से केवल 15 ने ही 2026-27 सीजन की पेराई शुरू की है, जबकि कर्नाटक में अब तक एक भी नियमित चीनी मिल चालू नहीं हुई है. किसान गन्ने के बेहतर दाम और चीनी का MSP 60 रुपये प्रति किलो करने की मांग पर अड़े हुए हैं. सरकार ने किसानों की मांगों पर विचार के लिए प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता में समिति गठित की है.

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क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Oct 15, 2026,
  • Updated Oct 15, 2026, 6:37 PM IST

गन्ना किसानों के चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच, महाराष्ट्र की 55 चीनी मिलों में से केवल 15 ने ही 2026-27 सीजन में गन्ने की पेराई शुरू की है, जबकि कर्नाटक में अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है. हालांकि, सरकार ने किसानों की शिकायतों को दूर करने के लिए एक समिति का गठन किया है. गन्ना पेराई की जानकारी सूत्रों ने दी.

सूत्रों ने बताया कि महाराष्ट्र में 40 मिलों ने अक्टूबर में पेराई सीजन शुरू होने से पहले की जाने वाली पारंपरिक पूजा तो कर ली है, लेकिन विरोध प्रदर्शन के कारण वहां अभी तक पूरी तरह से कामकाज शुरू नहीं हो पाया है.

15 मिलों ने 8 अक्टूबर से अपना कामकाज शुरू कर दिया है. एक सूत्र ने कहा, "इन 15 मिलों में बनने वाली चीनी से, चीनी की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है."

कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन का बड़ा असर

सूत्रों ने बताया कि कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन के चलते अभी एक भी मिल नहीं चल रही है. उन्होंने आगे कहा कि राज्य की 28 मिलों में से केवल आठ मिलें ही चल रही हैं, जो विशेष सीजन में उगाए गए गन्ने की पेराई कर रही हैं. महाराष्ट्र और कर्नाटक देश के क्रमशः दूसरे और तीसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य हैं.

दोनों राज्यों के किसान गन्ने के लिए अधिक समर्थन मूल्य (सपोर्ट प्राइस) और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) को बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग कर रहे हैं. जब किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्गों को जाम करने की धमकी दी, तो केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रहलाद जोशी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रमुख किसान संगठनों के साथ बातचीत की. उनकी चिंताओं पर विचार करने के लिए नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्णय लिया गया.

हालांकि, सूत्रों के अनुसार, किसान संगठनों ने इस कदम को खारिज कर दिया है और अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा है.

सरकार ने समिति के गठन की अधिसूचना तो जारी कर दी है, लेकिन रिपोर्ट सौंपने या सिफारिशों को लागू करने के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं की है. इससे किसान नाराज हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी मांगें तुरंत पूरी नहीं होंगी.

कोल्हापुर, सांगली में चीनी मिलें ठप

सूत्रों के मुताबिक, कोल्हापुर में गुरुवार को एक भी चीनी मिल शुरू नहीं हो पाई जबकि 15 अक्टूबर से पेराई का काम शुरू होना था. कोल्हापुर गन्ने का प्रमुख बेल्ट है जहां हजारों किसान गन्ने की खेती करते हैं. कोल्हापुर से सटा जिला सांगली में भी कोई चीनी मिल शुरू नहीं हो पाई है क्योंकि किसान नेता राजू शेट्टी के नेतृत्व में कई कार्यकर्ता मिलों के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

इससे पहले बुधवार को केंद्र सरकार ने गन्ने के रेट पर विचार करने के लिए एक समिति बनाने का ऐलान किया. यह समिति गन्ने के लाभकारी मूल्य में बढ़ोतरी की मांग, चीनी की बिक्री कीमत, मिलों में गन्ने की तुलाई और शुगर रिकवरी की जांच जैसे अहम मुद्दों पर विचार करेगी. इसका उद्देश्य गन्ना किसानों की शिकायतों को समझना और उनके समाधान के लिए सरकार को सुझाव देना है.

भारत सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को जारी जानकारी में बताया कि इस समिति की अध्यक्षता नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद करेंगे. समिति का गठन महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों की केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री के साथ हुई बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर किया गया है.(PTI के इनपुट के साथ)

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