
गन्ना किसानों की समस्याओं और चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए केंद्र सरकार ने एक समिति का गठन किया है. यह समिति गन्ने के लाभकारी मूल्य में बढ़ोतरी की मांग, चीनी की बिक्री कीमत, मिलों में गन्ने की तुलाई और शुगर रिकवरी की जांच जैसे अहम मुद्दों पर विचार करेगी. इसका उद्देश्य गन्ना किसानों की शिकायतों को समझना और उनके समाधान के लिए सरकार को सुझाव देना है.
भारत सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को जारी जानकारी में बताया कि इस समिति की अध्यक्षता नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद करेंगे. समिति का गठन महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों की केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री के साथ हुई बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर किया गया है.
गन्ना किसानों की प्रमुख मांगों में गन्ने का लाभकारी मूल्य बढ़ाना शामिल है. समिति इस मांग की समीक्षा करेगी. इसमें गन्ने की खेती पर आने वाली लागत और दूसरे जरूरी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा. किसान चाहते हैं कि उन्हें गन्ने की उपज का ऐसा मूल्य मिले, जिससे खेती की लागत निकालने के साथ उचित आमदनी भी हो सके. समिति इन मांगों और उनसे जुड़े पहलुओं का सोच विचार करके सरकार को सुझाव देगी,
समिति चीनी की एक्स-मिल न्यूनतम बिक्री कीमत में बदलाव की मांग पर भी विचार करेगी. एक्स-मिल कीमत का मतलब वह कीमत है, जिस पर चीनी मिल से चीनी बेची जाती है. इसकी समीक्षा करते समय चीनी उत्पादन की लागत, बाजार में मिलने वाले दाम और चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाएगा. यानी समिति किसानों को गन्ने का बेहतर मूल्य दिलाने की मांग के साथ-साथ चीनी उद्योग की आर्थिक स्थिति का भी आकलन करेगी.
गन्ना किसानों की आमदनी में शुगर रिकवरी की अहम भूमिका होती है. शुगर रिकवरी से पता चलता है कि गन्ने से कितनी मात्रा में चीनी मिल सकती है. इसी को ध्यान में रखते हुए समिति मौजूदा रिकवरी जांच और रिपोर्ट तैयार करने की व्यवस्था की समीक्षा करेगी. समिति यह भी देखेगी कि रिकवरी की जांच पारदर्शी तरीके से हो रही है या नहीं और किसानों को इसकी सही जानकारी मिल रही है या नहीं. इसके अलावा चीनी मिलों में गन्ने का वजन करने की व्यवस्था की भी जांच होगी. इसमें तौल मशीनों की सही माप के लिए उनकी जांच, निरीक्षण और सत्यापन की व्यवस्था शामिल होगी. इसका उद्देश्य यह देखना है कि गन्ने की तुलाई सही तरीके से हो रही है या नहीं.
आजकल कई जगहों पर मशीनों से गन्ने की कटाई की जाती है. ऐसे में मशीन से काटे गए गन्ने के वजन में की जाने वाली कटौती भी समिति की जांच के दायरे में होगी. समिति यह पता लगाएगी कि मशीन से कटाई के दौरान वास्तव में कितना नुकसान होता है और गन्ने के वजन में कटौती करने का मौजूदा तरीका कितना उचित है. साथ ही, इस कटौती का किसानों को मिलने वाले भुगतान पर कितना असर पड़ता है, इसका भी आकलन किया जाएगा. अगर जांच में किसी तरह की गड़बड़ी या सुधार की जरूरत सामने आती है, तो समिति उस पर सुझाव दे सकती है.
समिति अपनी जांच के दौरान जरूरत पड़ने पर गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों, चीनी मिल संघों, राज्य सरकारों और संबंधित विशेषज्ञों से बातचीत करेगी. इसके अलावा, चीनी क्षेत्र से जुड़े दूसरे संगठनों की राय भी ली जा सकती है. समिति को अपने निष्कर्षों और ठोस सुझावों वाली रिपोर्ट जल्द से जल्द सक्षम प्राधिकारी के सामने पेश करनी है. हालांकि, अभी समिति की जांच और सिफारिशों के आधार पर ही आगे के फैसले लिए जाएंगे,
इस समिति की अध्यक्षता कृषि अर्थशास्त्री और लोक नीति विशेषज्ञ प्रो. रमेश चंद करेंगे. उन्होंने 2015 से 2026 तक नीति आयोग के सदस्य के रूप में काम किया है. वह इससे पहले आईसीएआर-एनआईएपी के निदेशक और 15वें वित्त आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं. कृषि विकास, किसानों से जुड़े मुद्दों, खाद्य सुरक्षा, कृषि बाजार और फसलों की कीमत तय करने की नीतियों पर उन्हें विशेषज्ञता हासिल है. समिति में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि आयुक्त, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव (चीनी) और उपभोक्ता मामले विभाग के संयुक्त सचिव (विधिक माप-विज्ञान) भी सदस्य के रूप में शामिल हैं.