सैटेलाइट को चकमा देने के लिए दोपहर बाद जलाई जा रही पराली! केंद्र ने बढ़ाई जमीनी निगरानी, पंजाब में एक दिन में 51 मामले

सैटेलाइट को चकमा देने के लिए दोपहर बाद जलाई जा रही पराली! केंद्र ने बढ़ाई जमीनी निगरानी, पंजाब में एक दिन में 51 मामले

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच केंद्र सरकार ने पराली जलाने पर निगरानी और सख्त कर दी है. रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि कई किसान सैटेलाइट निगरानी से बचने के लिए दोपहर 3 बजे के बाद खेतों में आग लगा रहे हैं. पंजाब में एक दिन में 51 नए मामले सामने आने के बाद केंद्र ने जमीनी गश्त, फ्लाइंग स्क्वाड और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

Stubble burning: CAQM deploys flying squads across 34 districts in Punjab, HaryanaStubble burning: CAQM deploys flying squads across 34 districts in Punjab, Haryana
क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Oct 14, 2026,
  • Updated Oct 14, 2026, 5:24 PM IST

उत्तर भारत में सर्दियों के आगमन के साथ ही पराली जलाने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. दिल्ली-एनसीआर की बिगड़ती हवा के बीच केंद्र सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी और सख्त करने का फैसला किया है. कई स्टडी और निगरानी रिपोर्टों में सामने आया है कि कुछ किसान सैटेलाइट की नजर से बचने के लिए दोपहर 3 बजे के बाद खेतों में पराली जला रहे हैं. इसी को देखते हुए अब सरकार केवल सैटेलाइट आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत कर रही है.

दिल्ली और एनसीआर में हर साल सितंबर के मध्य से एयर क्वालिटी खराब होने लगती है. धान कटाई के बाद पराली जलाना सर्दियों में प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल माना जाता है. इसके बाद ठंड बढ़ने, हवा की गति कम होने और दिवाली के दौरान पटाखों के इस्तेमाल से हालात और गंभीर हो जाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार पीएम 2.5 कणों की अधिकता से हवा की क्वालिटी सबसे ज्यादा प्रभावित होती है. परिवहन, उद्योग, ताप बिजली संयंत्र और बायोमास जलाने से निकलने वाले उत्सर्जन प्रदूषण की समस्या को और बढ़ाते हैं.

पराली जलाने की घटनाओं पर कड़ी नजर रखने के निर्देश

मंगलवार को हुई संयुक्त समीक्षा बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्यों को पराली जलाने की घटनाओं पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए. उन्होंने विशेष रूप से दोपहर 3 बजे के बाद लगाई जाने वाली आग पर निगरानी बढ़ाने को कहा, क्योंकि इस दौरान कई घटनाएं सैटेलाइट सिस्टम में दर्ज नहीं हो पाती हैं.

केंद्रीय मंत्री ने पंजाब के संगरूर, तरनतारन, अमृतसर, पटियाला, गुरदासपुर और हरियाणा के कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला और फतेहाबाद जिलों पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए हैं. इन इलाकों में धान की कटाई तेजी से चल रही है और पराली जलाने की घटनाओं की आशंका अधिक रहती है.

पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक जिला प्रशासनों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल सैटेलाइट डेटा के आधार पर कार्रवाई न करें, बल्कि जमीनी वेरिफिकेशन को भी प्राथमिकता दें. इसके लिए फ्लाइंग स्क्वाड, फील्ड निरीक्षण दल और स्थानीय प्रशासन की गश्त बढ़ाई जाएगी. साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी.

पंजाब में पराली जलाने के मामलों में तेजी

इस बीच पंजाब में पराली जलाने के मामलों में तेजी देखने को मिली है. मंगलवार को राज्य में 51 नए मामले सामने आए, जो मौजूदा धान कटाई सीजन में एक दिन में दर्ज की गई सबसे अधिक घटनाएं हैं. इसके साथ ही राज्य में कुल मामलों की संख्या बढ़कर 174 हो गई है.

सबसे ज्यादा मामले सीमावर्ती जिलों अमृतसर और तरनतारन से सामने आए हैं. मंगलवार को तरनतारन में 21 और अमृतसर में 16 घटनाएं दर्ज की गईं. पूरे सीजन में अब तक तरनतारन में 61 और अमृतसर में 77 मामले सामने आ चुके हैं. पंजाब के 23 जिलों में से 15 जिले पराली जलाने की समस्या से प्रभावित पाए गए हैं.

सरकार ने नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी तेज कर दी है. अधिकारियों ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत 16 एफआईआर दर्ज की हैं. इनमें 12 मामले तरनतारन, तीन अमृतसर और एक पटियाला में दर्ज हुआ है.

इसके अलावा 44 मामलों में कुल 2.30 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है, जिसमें से 1.15 लाख रुपये की वसूली भी हो चुकी है. वहीं 28 मामलों में किसानों की जमीन के रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' की गई है. इनमें तरनतारन के 15, अमृतसर के नौ और फिरोजपुर के चार मामले शामिल हैं.

प्रदूषण के मौसम की शुरुआत में बढ़ती घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारें पराली प्रबंधन मशीनों के इस्तेमाल, जागरुकता अभियान और सख्त निगरानी के जरिए इस समस्या पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती चरण में ही पराली जलाने की घटनाओं को रोका गया तो दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.

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