Oilmeal Export: जुलाई में 65 फीसदी गिरा भारत का खली निर्यात, इन कारणों से बिगड़ा पूरा गणित

Oilmeal Export: जुलाई में 65 फीसदी गिरा भारत का खली निर्यात, इन कारणों से बिगड़ा पूरा गणित

जुलाई 2026 में भारत का कुल ऑयलमील यानी खली निर्यात सालाना आधार पर 65 फीसदी घटकर 1.48 लाख टन रह गया. जानिए किन कारणों से निर्यात में कमी आई...

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Oct 15, 2026,
  • Updated Oct 15, 2026, 2:09 PM IST

भारत से ऑयलमील यानी खली के निर्यात में जुलाई 2026 के दौरान सालाना आधार पर 65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. दक्षिण अमेरिकी देशों से सस्ती सप्‍लाई, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोयाबीन खली की ऊंची कीमतों और समुद्री माल ढुलाई महंगी होने से निर्यात पर दबाव बढ़ा है. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अनुसार, जुलाई 2026 में देश से 1.48 लाख टन ऑयलमील का निर्यात हुआ, जबकि जुलाई 2025 में यह मात्रा 4.22 लाख टन थी.

अर्जेंटीना और ब्राजील से मिल रही कड़ी टक्कर

‘बिजनेसलाइन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, SEA के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने बताया कि भारतीय सोयाबीन खली को अर्जेंटीना और ब्राजील से आने वाली सस्ती आपूर्ति के कारण कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है. जुलाई 2026 में भारत का सोया मील निर्यात सालाना आधार पर करीब 90 प्रतिशत घट गया. जुलाई 2025 में 1,83,553 टन सोया मील का निर्यात हुआ था, जबकि जुलाई 2026 में यह घटकर 17,810 टन रह गया.

भारतीय सोयाबीन खली अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगा

भारतीय सोयाबीन खली की ऊंची कीमतें भी निर्यात में गिरावट की प्रमुख वजह बनीं. जुलाई 2026 में भारतीय सोया खली का भाव करीब 613 डॉलर प्रति टन था, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 428 डॉलर प्रति टन थी. इस बड़े अंतर के कारण भारतीय सोया खली वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर सका. बीवी मेहता के अनुसार, घरेलू बाजार में सोया मील की ऊंची कीमतों और पोल्ट्री और पशु आहार निर्माताओं की मांग ने भी निर्यात के लिए उपलब्ध मात्रा और प्रोत्साहन को कम किया.

लाल सागर में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण समुद्री परिवहन में देरी हुई. जहाजों को लंबे रास्तों से गुजरना पड़ा, जिससे माल पहुंचाने की लागत और समय दोनों बढ़ गए. इसका असर खास तौर पर यूरोप और पश्चिम एशिया को भेजी जाने वाली खेपों पर पड़ा. बढ़ती ढुलाई लागत ने भारतीय ऑयलमील की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा को और कमजोर कर दिया.

जुलाई में सरसों खली का निर्यात भी घटा

रिपोर्ट के मुताबिक, सोया खली के अलावा रेपसीड मील (सरसों खली) के निर्यात में भी गिरावट दर्ज की गई. जुलाई 2025 में भारत से 2,09,128 टन सरसों खली का निर्यात हुआ था, जबकि जुलाई 2026 में यह घटकर 96,539 टन रह गया.

वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों, अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान भारत का कुल खली निर्यात घटकर 11.05 लाख टन रह गया. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि, अप्रैल-जुलाई 2025-26 में यह 15.16 लाख टन था. इस तरह निर्यात में सालाना आधार पर 27 प्रतिशत की गिरावट आई.

बीवी मेहता ने कहा कि इस अवधि में कुल निर्यात घटने की प्रमुख वजह सोया खली की कमजोर खेप, दक्षिण अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं से कड़ी प्रतिस्पर्धा और समुद्री परिवहन में बाधाओं के कारण बढ़ी ढुलाई लागत रही. चीन को सरसों खली का अधिक निर्यात होने से कुछ राहत मिली, लेकिन इससे कुल गिरावट की भरपाई नहीं हो सकी.

अप्रैल-जून के दौरान सरसों खली का निर्यात बढ़ा

अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान भारत का रेपसीड मील निर्यात बढ़कर 7.56 लाख टन हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 7.40 लाख टन था. इसके विपरीत, सोया मील के निर्यात में भारी गिरावट आई. अप्रैल-जुलाई 2025-26 में भारत ने 6.76 लाख टन सोया मील का निर्यात किया था, जो चालू वित्त वर्ष की समान अवधि में घटकर 1.87 लाख टन रह गया.

चीन, बांग्लादेश और वियतनाम प्रमुख आयातक

अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान चीन, बांग्लादेश और वियतनाम भारतीय ऑयलमील के प्रमुख आयातक रहे. चीन ने इस अवधि में भारत से 3.55 लाख टन ऑयलमील खरीदा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह मात्रा 2.83 लाख टन थी. चीन की खरीद में 3.50 लाख टन रेपसीड मील, 1,616 टन अरंडी की खली और 3,127 टन सोया मील शामिल था.

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