
पिछले कई सालों से देश् में संस्थाओं के नाम बदलने पर बहस को राजनीतिक निशानी के तौर पर देखा जाता रहा है. कुछ लोग कहते हैं कि इस काम को सरकारें इतिहास को फिर से लिखने के लिए करती हैं. लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली में नाम बदलने के एक फैसले को अलग ही मोड़ मिल गया है. यह कोई सरकारी आदेश नहीं है बल्कि एक कॉर्पोरेट फैसला है जो भारत के इंडस्ट्रियल माहौल में मौजूद एक नैतिक मतभेद को खत्म करने की कोशिश करता है. दरअसल यहां पर क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह को मौत की सजा सुनाए जाने वाले जज के नाम एक चीनी मिल बनी है जिसका नाम अब बदला जाएगा.
जिस मिल की बात हो रही है उसे पिछले कई सालों से लंबे समय से 'सर शादी लाल' चीनी मिल के नाम से जाना जाता रहा है. लेकिन जल्द ही अब इसे शामली चीनी मिल के नाम से जाना जाएगा. इस मिल का नाम उस शहर के नाम पर रखा जाएगा जहां पर यह स्थित है. यह बदलाव इसके नए मालिक, त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड की तरफ से किया जा रहा है. यह देश का दूसरा सबसे बड़ा प्राइवेट चीनी प्रोड्यूसर है. कंपनी की तरफ से एक ऐसा फैसला किया जा रहा है जिससे एक ऐसा नाम मिट सकेगा जो कई लोगों को आजादी की लड़ाई के दौरान हुए एक दर्दनाक हिस्से की याद दिलाता है.
सर शादी लाल 1920 से 1934 तक पंजाब हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे. उनका कार्यकाल भगत सिंह की फांसी के साथ खत्म हुई कार्रवाई से जुड़ा है. इतिहासकारों ने लंबे समय से लाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं जिसमें क्रांतिकारी पर मुकदमा चलाने वाले स्पेशल ट्रिब्यूनल का गठन किया गया था. बाद में एक असहमत जज आगा हैदर को हटा दिया गया था. आगा हैदर ने क्रांतिकारियों को दोषी ठहराने से इनकार कर दिया था. आलोचकों का कहना है कि इन कदमों ने मौत की सजा का रास्ता बनाया. 23 मार्च 1931 को दोषी ठहराए जाने के मुश्किल से पांच महीने बाद ही भगत सिंह को फांसी दे दी गई.
आजाद भारत में एक बड़ी इंडस्ट्रियल यूनिट का उस नतीजे से जुड़े एक व्यक्ति के नाम पर रहना, स्थानीय निवासियों और लेबर यूनियंस को लंबे समय से परेशान करता रहा है. फिर भी इसका नाम बना रहा. यह बदलाव तब मुमकिन हुआ जब त्रिवेणी इंजीनियरिंग ने मिल की होल्डिंग कंपनी पर कंट्रोल मजबूत कर लिया. जून 2024 में त्रिवेणी ने सर शादी लाल एंटरप्राइजेज लिमिटेड (SSEL) में 36.34 परसेंट और हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की. इससे उसकी कुल शेयरहोल्डिंग 61.77 परसेंट हो गई और मैनेजमेंट कंट्रोल हासिल हो गया.
मर्जर के बाद अब नाम बदलने की पूरी उम्मीद है. त्रिवेणी का अंदरूनी रिवाज है कि मिलों को लोगों के बजाय उनकी ज्योग्राफिक लोकेशन से पहचाना जाए. इस मामले में इसका मतलब होगा शामली. मिल का अपना इतिहास भारत के कॉलोनियल बिजनेस से आजादी के बाद की इंडस्ट्री तक के मुश्किल सफर को दिखाता है. इसे 1933 में सर शादी लाल ने द अपर दोआब शुगर मिल्स लिमिटेड के नाम से शुरू किया था. यह कॉलोनियल दौर के आखिर में था जब भारतीय अमीर लोग अक्सर शाही आर्थिक ढांचों के साथ पार्टनरशिप करते थे. करीब पांच दशक बाद, 1982 में, उनके बेटों, लाला राजेंद्र लाल और लाला नरेंद्र लाल ने इसका नाम बदलकर सर शादी लाल एंटरप्राइजेज लिमिटेड कर दिया. इससे कॉर्पोरेट नाम में परिवार की विरासत पक्की हो गई.
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