
सर्दियां आते ही लोग मूंगफली खाने लगते हैं. लेकिन इसका चलन सिर्फ परंपरा मात्र नहीं है, बल्कि हमारे बड़े बुजुर्ग ठंड के मौसम की जरूरतों के हिसाब से मूंगफली खाने आदत डाल कर गए हैं. जिसके अब वैज्ञानिक कारण भी सामने आने लगे हैं. मूंगफली हमारे शरीर को गर्मी, एनर्जी, प्रोटीन और कई माइक्रोन्यूट्रिएंट्स देती है. लिहाजा इसकी मूंगफली भारत में एक बड़ी एग्री–कमर्शियल कमोडिटी है, जिसका उत्पादन और व्यापार करोड़ों की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है. यही वजह है कि हम सर्दी में मूंगफली खाने के इस चलन के पीछे के जैविक और पोषण-आधारित कारण बताएंगे, वैज्ञानिक अध्ययन जो इसके लाभ दिखाते हैं. साथ में ये भी जानेंगे कि भारत में मूंगफली का बाजार और इसका आकार कितना बड़ा है.
दरअसल, उत्तर भारत में सर्दी बहुत ज्यादा पड़ती है और ऐसे में शरीर को ज्यादा एनर्जी और गर्माहट की जरूरत होती है, इसलिए लोग पारंपरिक रूप से हाई‑एनर्जी स्नैक्स जैसे भुनी मूंगफली, गज़क, रेवड़ी, चिक्की आदि लेते हैं. मूंगफली ज्यादा इसलिए भी खाई जाती है क्योंकि ये सस्ती होती है, आसानी से उपलब्ध होती है, स्ट्रीट–स्नैक के रूप में लोकप्रिय है और लंबे समय तक बिना झंझट के स्टोर की जा सकती है. शहरों से ज्यादा मूंगफली ग्रामीण इलाकों में खाई जाती है, क्योंकि रबी की फसल से ठीक पहले खरीफ में इसकी फसल होती है.
दूसरा अहम कारण मूंगफली का ऊर्जा-घनत्व है. मूंगफली में वसा यानी फैट खूब होता है. इसलिए ये कम मात्रा में भी अधिक कैलोरी देती हैं. इसलिए पुराने जमाने से ही सर्दियों में शरीर को गर्म रखने और दैनिक ऊर्जा क्षमता के कारण मूंगफली लोकप्रिय हुई. इसके साथ ही मूंगफली का प्रोटीन और फैट मिलकर लंबे समय तक भूख को शांत रखते हैं. लिहाजा सर्दियों में भूख और थकावट कम करने के तौर पर भी मूंगफली खाई जाती है.
अगर मूंगफली के पोषण को देखें तो मूंगफली में लगभग इसका आधा दाना ऊर्जा वसा से भरा होता है. इसलिए ये कम मात्रा में ज्यादा कैलोरी देती हैं. मूंगफली अच्छे प्लांट बेस्ड प्रोटीन देती है जो शाकाहारियों के लिए विशेष लाभदायक होती है. इसके अलावा मूंगफली में फाइबर, फोलेट, विटामिन-E, मैग्नीशियम, पोटैशियम जैसी पोषक तत्व भर-भरकर पाए जाते हैं. यही कारण है कि ये माइक्रोन्यूट्रिएंट-समृद्ध स्नैक मानी जाती है.
एक मुट्ठी मूंगफली (प्रति 28 ग्राम) में लगभग 180 कैलोरी और करीब 15 ग्राम वसा होता है. इनमें ज्यादातर मोनोसैचुरेटेड और पॉलीसैचुरेटेड “गुड” फैट होता है. ये वसा मेटाबोलिज़्म के जरिए हीट और लगातार ऊर्जा देता है, जो ठंड में फायदेमंद है. एक मुट्ठी मूंगफली में लगभग 8 ग्राम प्रोटीन और अच्छी मात्रा में फाइबर होता है, जिससे पेट देर तक भरा महसूस होता है.
पैथकाइंड लैब की एक रिपोर्ट बताती है कि मूंगफली में विटामिन E, रेस्वेराट्रोल, ज़िंक और अन्य एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो शरीर के इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करते हैं और सर्दियों में होने वाले इन्फेक्शन और फ्लू से लड़ने में मदद कर सकते हैं. कई रिसर्च और पोषण–रिव्यू बताते हैं कि मूंगफली जैसे नट्स में मौजूद अनसैचुरेटेड फैट, मैग्नीशियम और नियासिन जैसी चीजें LDL (खराब) कोलेस्ट्रॉल घटाने और HDL (अच्छा) कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में मदद कर सकती हैं, जो दिल की सेहत के लिए लाभकारी है.
अमेरिका और शंघाई के मॉल्टि-एथनिक डेटा में पता लगा है कि मूंगफली सेवन ज्यादा बनाम कम करने वालों में कुल मृत्यु और विशेषकर कार्डियोवास्कुलर मृत्यु का जोखिम कम पाया गया. इस शोध में 17–21% तक कुल मृत्यु में कमी और कार्डियोवस्कुलर मृत्यु में और भी बड़ी कमी देखी गई है. इसके साथ ही मूंगफली का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम होने और फाइबर–प्रोटीन अधिक होने की वजह से मूंगफली भूजन के बाद ब्लड शुगर स्पाइक्स को बैलेंस करने में मदद कर सकती है, जिससे इसे डायबिटीज़–फ्रेंडली स्नैक के रूप में भी सुझाया जाता है.
इसके अलावा कुछ रिपोर्ट और एक्सपर्ट के मुताबिक, मूंगफली में पाए जाने वाले मैग्नीशियम और B‑विटामिन के कारण स्ट्रेस और चिंता कम करने में मदद कर सकते हैं. ये दोनों ही चीजें न्यूरोट्रांसमीटर और नर्वस सिस्टम के सामान्य फंक्शनिंग के लिए जरूरी हैं.
एशिया–पैसिफिक दुनिया के कुल मूंगफली बाजार का लगभग 52–53% हिस्सा रखता है, जिसमें चीन सबसे बड़ा और भारत दूसरे नंबर का उत्पादक है. 2024 के आसपास भारत की सालाना मूंगफली पैदावार लगभग 7.1 मिलियन मीट्रिक टन (71 लाख टन) बताई जाती है. भारत मूंगफली की खेती के रकबे में दुनिया में सबसे आगे है और कुल उत्पादन में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, लगभग 54.2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी फसल बोई जाती है.
2023 में भारत में मूंगफली मील, (यानी तेल निकालने के बाद बचा केक, जिसका उपयोग फीड में होता है) की घरेलू खपत लगभग 1.66 मिलियन मीट्रिक टन रही और 2024–2028 के बीच इसे लगभग 2.3% सालाना CAGR से बढ़ने का अनुमान है. वहीं 2023–24 में भारत ने लगभग 6,80,700 मीट्रिक टन मूंगफली एक्सपोर्ट किया, जिसकी कीमत करीब 7,135 करोड़ रुपये (लगभग 860 मिलियन USD) रही है. इसका मुख्य बाज़ार इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देश हैं. एक मार्केट–रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कुल मूगफली का बाजार जिसमें तेल, टेबल–नट, स्नैक्स, प्रोसेस्ड फूड आदि हैं, 2025–2030 के बीच लगभग 6% से ज़्यादा CAGR से बढ़ने की संभावना है.
सर्दियों में मूंगफली क्यों खाई जाती है?
क्योंकि यह शरीर को गर्मी और ज्यादा एनर्जी देने वाला हाई‑कैलोरी स्नैक है.
क्या मूंगफली हेल्दी फैट का स्रोत है?
हां, इसमें ज्यादातर मोनो‑ और पॉलीअनसैचुरेटेड “गुड” फैट होते हैं.
क्या मूंगफली प्रोटीन भी देती है?
हां, मूंगफली अच्छा प्लांट‑बेस्ड प्रोटीन स्रोत मानी जाती है.
क्या डायबिटीज वाले लोग मूंगफली खा सकते हैं?
सीमित मात्रा में, डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह से, यह हेल्दी स्नैक का हिस्सा बन सकती है.
क्या भारत में मूंगफली बड़ा बाजार है?
भारत दुनिया के प्रमुख उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल होने के कारण इसका बड़ा कृषि‑व्यापारिक बाजार है.
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