Property Law: पैतृक संपत्ति के बंटवारे की रजिस्ट्री अब 10 हजार रुपये में भी, यूपी सरकार का बड़ा फैसला

Property Law: पैतृक संपत्ति के बंटवारे की रजिस्ट्री अब 10 हजार रुपये में भी, यूपी सरकार का बड़ा फैसला

योगी सरकार के नए निर्णय के तहत अब पैतृक संपत्ति के बंटवारे की रजिस्ट्री केवल 10,000 रुपये में कराई जा सकेगी. इसमें 5,000 रुपये स्टांप ड्यूटी और 5,000 रुपये निबंधन शुल्क शामिल होंगे. यह सुविधा तीन पीढ़ियों से अधिक के वंशजों के बीच पैतृक अचल संपत्ति के विभाजन पर लागू होगी. इस व्यवस्था के तहत सिर्फ पैतृक अचल संपत्तियों का ही बंटवारा किया जाएगा.

नवीन लाल सूरी
  • नई दिल्ली,
  • Jan 07, 2026,
  • Updated Jan 07, 2026, 1:46 PM IST

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पैतृक संपत्ति के बंटवारे और किराया रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में बड़ा सुधार करते हुए आम जनता को बड़ी राहत दी है. इस फैसले से जहां पारिवारिक संपत्ति विवादों में कमी आने की उम्मीद है, वहीं किरायेदारों और मकान मालिकों को भी सीधा लाभ मिलेगा. सरकार का मानना है कि यह कदम प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग लिविंग को बढ़ावा देने के साथ कानूनी पारदर्शिता को भी मजबूत करेगा.

संपत्ति बंटवारे में बड़ी राहत

योगी सरकार के नए निर्णय के तहत अब पैतृक संपत्ति के बंटवारे की रजिस्ट्री केवल 10,000 रुपये में कराई जा सकेगी. इसमें 5,000 रुपये स्टांप ड्यूटी और 5,000 रुपये निबंधन शुल्क शामिल होंगे. यह सुविधा तीन पीढ़ियों से अधिक के वंशजों के बीच पैतृक अचल संपत्ति के विभाजन पर लागू होगी. इस व्यवस्था के तहत सिर्फ पैतृक अचल संपत्तियों का ही बंटवारा किया जाएगा. इसमें कृषि भूमि, आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियां शामिल हैं. संपत्ति का विभाजन उत्तराधिकार कानून के अनुसार निर्धारित हिस्सेदारी के आधार पर किया जाएगा. इससे विवाद की संभावनाएं काफी हद तक कम होंगी.

रेंट रजिस्‍ट्रेशन भी सस्‍ता 

सरकार ने किराया रजिस्ट्रेशन को भी सरल और किफायती बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. नए नियमों के तहत स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क में 90 प्रतिशत तक की कटौती की गई है. इससे अब अलग-अलग किराया अवधि और वार्षिक किराया श्रेणियों में रेंट एग्रीमेंट का रजिस्‍ट्रेशन पहले की तुलना में कहीं अधिक सस्ता हो गया है. सरकार का मकसद है कि अधिक से अधिक लोग अपने किराया समझौतों का विधिवत रजिस्‍ट्रेशन कराएं. इससे पारदर्शिता बढ़े और अवैध या कच्चे समझौतों पर रोक लग सके. 

फैसले से मिलेंगे ये बड़े फायदे

योगी सरकार के इस सुधारात्मक कदम से मकान मालिक और किरायेदार दोनों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी. संपत्ति और किराया विवादों में कमी आएगी, रेंट एग्रीमेंट को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी और न्यायिक प्रक्रिया पर भी दबाव कम होगा. सरकार का मानना है कि यह फैसला प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और आम नागरिकों को सुविधा देने की दिशा में एक अहम पहल साबित होगा. 

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